{"_id":"5f2c4f2f8ebc3eaac749ecf8","slug":"swarn-shakti-field-prodused-gold-reporters-news-jhs173275359","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वर्ण शक्ति से खेत उगलेंगे सोना, सूखे में लहलहाएगी धान की फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वर्ण शक्ति से खेत उगलेंगे सोना, सूखे में लहलहाएगी धान की फसल
विज्ञापन
झांसी। अब सूखे में भी किसानों के खेत में धान की फसल लहलहाएगी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने धान की उन्नत किस्में जैसे स्वर्ण शक्ति, स्वर्ण श्रेया मंगवाकर किसानों को दी हैं। इन किस्मों की खासियत ये है कि कम पानी में यह फसल जल्द पक जाती हैं और ज्यादा उत्पादन भी देती हैं।
मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर बदलने में जुटा हुआ है। देश भर से लगातार अलग-अलग फसलों के उन्नत बीज मंगवाकर किसानों को दिए जा रहे हैं। हाल ही में धान की चार किस्में मंगवाई गईं। इसमें स्वर्ण शक्ति और स्वर्ण श्रेया को आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स पूर्वी क्षेत्र पटना और पूसा 1850, पूसा 2511 को आईएआरआई, नई दिल्ली से मंगवाया गया है। इन्हें हस्तिनापुर और सिमरधा के किसानों को बांटा गया। कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि यह धान की खास किस्में हैं, जो कि कम पानी में भी पनप जाती हैं।
ये है उन्नत किस्मों की खासियत
इन उन्नत फसलों को लगाने के बाद सूखे की स्थिति में भी 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का दावा किया गया है। बताया गया कि सामान्यत: बुंदेलखंड में बोई जाने वाली धान की फसल 15 से 16 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती हैं। अभी किसान धान की रोपाई नर्सरी लगाकर करते हैं। इसमें पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है। जबकि, उन्नत किस्मों की सीधी बुवाई कर सकते हैं, जिससे कम पानी लगेगा। उन्नत फसल 115-125 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि, मौजूदा समय में बोई जाने वाली फसल 130-140 दिनों में तैयार होती है। विश्वविद्यालय के डॉ. धनंजय उपाध्याय, डॉ. विष्णु कुमार गोयल, डॉ. अमित तोमर, डॉ. एमके सिंह किसानों से लगातार संपर्क में हैं और उन्नत किस्मों का फीडबैक ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के किसानों की तकदीर बदलने में जुटा हुआ है। देश भर से लगातार अलग-अलग फसलों के उन्नत बीज मंगवाकर किसानों को दिए जा रहे हैं। हाल ही में धान की चार किस्में मंगवाई गईं। इसमें स्वर्ण शक्ति और स्वर्ण श्रेया को आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स पूर्वी क्षेत्र पटना और पूसा 1850, पूसा 2511 को आईएआरआई, नई दिल्ली से मंगवाया गया है। इन्हें हस्तिनापुर और सिमरधा के किसानों को बांटा गया। कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि यह धान की खास किस्में हैं, जो कि कम पानी में भी पनप जाती हैं।
विज्ञापन
ये है उन्नत किस्मों की खासियत
इन उन्नत फसलों को लगाने के बाद सूखे की स्थिति में भी 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का दावा किया गया है। बताया गया कि सामान्यत: बुंदेलखंड में बोई जाने वाली धान की फसल 15 से 16 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती हैं। अभी किसान धान की रोपाई नर्सरी लगाकर करते हैं। इसमें पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है। जबकि, उन्नत किस्मों की सीधी बुवाई कर सकते हैं, जिससे कम पानी लगेगा। उन्नत फसल 115-125 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि, मौजूदा समय में बोई जाने वाली फसल 130-140 दिनों में तैयार होती है। विश्वविद्यालय के डॉ. धनंजय उपाध्याय, डॉ. विष्णु कुमार गोयल, डॉ. अमित तोमर, डॉ. एमके सिंह किसानों से लगातार संपर्क में हैं और उन्नत किस्मों का फीडबैक ले रहे हैं।
विज्ञापन