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सुभाष गंज की रामलीला देखने को 12 घंटे पहले ही जुटने लगते थे लोग
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subhas ganj ramlila
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झांसी। शहर की पुरानी रामलीलाओं में शुमार सुभाष गंज की रामलीला कलाकारों की जीवंत अदाकारी के लिए अब भी याद की जाती है। वर्ष 1954 में शुरू हुई यह रामलीला इतनी प्रसिद्ध हुई कि इसका मंचन भले ही रात 10 बजे से शुरू होता था लेकिन इसे देखने के लिए लोग 12 घंटे पहले दोपहर 12 बजे से ही जगह पाने की जद्दोजहद में लग जाते थे। लीला अपने स्वर्णिम काल के साथ वर्ष 1984 तक लगातार होती रही। रामलीला के कलाकार और उनका अभिनय लोगों को संजोए रहा।
सुभाष गंज की रामलीला की बड़ी ख्याति थी। सिल्वर जुबली के विशेष मौके पर रामलीला का केवट संवाद लक्ष्मी तालाब पर और भरत मिलाप लीला का मंचन लक्ष्मी बाई पार्क में हुआ था। जिसे देखने हजारों की संख्या में लोग जुटे थे।
टेलीविजन युग के प्रारंभिक दौर तक काफी प्रसिद्ध रही सुभाष गंज की रामलीला अब नहीं होती है, लेकिन इस रामलीला से जुडे़ वरिष्ठ कलाकार आज भी उस स्वर्णिम काल को याद करते हैं। इनके अनुसार सुभाष गंज की रामलीला के कई कलाकार अपने अभिनय में इतना महारथ हासिल किए थे कि उन्हें मुंबई में कई फिल्मों में काम भी मिला है। इन कलाकारों के अभिनय को आज भी महत्व दिया जाता है। वरिष्ठ कलाकारों के अनुसार उस वक्त रामलीला 13 दिन तक चलती थी। टेलीविजन आने के कारण धीरे-धीरे सुभाषगंज में रामलीला की परंपरा सिमट गई है। वर्ष 1984 के बाद कभी-कभार लीला के कुछ संवादों का मंचन जरूर होता रहा।
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सुभाष गंज की रामलीला की सिल्वर जुबली पर केवट संवाद लक्ष्मी तालाब पर और भरत मिलाप रानी लक्ष्मीबाई पार्क पर हुआ था। यहां की रामलीला की कई विशेषताएं थीं।
हरीप्रकाश शर्मा, वरिष्ठ कलाकार
रामलीला में मेघनाद, रावण, कैकई सहित कई भूमिकाएं निभाईं। लक्ष्मी तालाब पर के वट संवाद का मंचन हुआ था। यह मंचन दिन में होता था। बहुत भीड़ होती थी।
राधाकृष्ण मिश्रा, पूर्व वरिष्ठ कलाकार
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सुभाष गंज की रामलीला की बड़ी ख्याति थी। सिल्वर जुबली के विशेष मौके पर रामलीला का केवट संवाद लक्ष्मी तालाब पर और भरत मिलाप लीला का मंचन लक्ष्मी बाई पार्क में हुआ था। जिसे देखने हजारों की संख्या में लोग जुटे थे।
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टेलीविजन युग के प्रारंभिक दौर तक काफी प्रसिद्ध रही सुभाष गंज की रामलीला अब नहीं होती है, लेकिन इस रामलीला से जुडे़ वरिष्ठ कलाकार आज भी उस स्वर्णिम काल को याद करते हैं। इनके अनुसार सुभाष गंज की रामलीला के कई कलाकार अपने अभिनय में इतना महारथ हासिल किए थे कि उन्हें मुंबई में कई फिल्मों में काम भी मिला है। इन कलाकारों के अभिनय को आज भी महत्व दिया जाता है। वरिष्ठ कलाकारों के अनुसार उस वक्त रामलीला 13 दिन तक चलती थी। टेलीविजन आने के कारण धीरे-धीरे सुभाषगंज में रामलीला की परंपरा सिमट गई है। वर्ष 1984 के बाद कभी-कभार लीला के कुछ संवादों का मंचन जरूर होता रहा।
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सुभाष गंज की रामलीला की सिल्वर जुबली पर केवट संवाद लक्ष्मी तालाब पर और भरत मिलाप रानी लक्ष्मीबाई पार्क पर हुआ था। यहां की रामलीला की कई विशेषताएं थीं।
हरीप्रकाश शर्मा, वरिष्ठ कलाकार
रामलीला में मेघनाद, रावण, कैकई सहित कई भूमिकाएं निभाईं। लक्ष्मी तालाब पर के वट संवाद का मंचन हुआ था। यह मंचन दिन में होता था। बहुत भीड़ होती थी।
राधाकृष्ण मिश्रा, पूर्व वरिष्ठ कलाकार