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थानों में अब भी ‘एसओजी’
ब्यूरो
Updated Mon, 02 Nov 2015 01:09 AM IST
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झांसी। शासन स्तर से स्पेशल आपरेशन ग्रुप (एसओजी) को खत्म किया जा चुका है, मगर थानों पर अभी भी यह चल रहे हैं। यह टीमें थानेदारों के नेतृत्व में स्वतंत्र रूप से भ्रमणशील रहती हैं।
बताते चलें कि शासन के आदेश पर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एसओजी को खत्म किया जा चुका है। इसके स्थान पर ‘स्वॉट’ का गठन किया गया है, जिसमें कई शाखाएं कार्यरत हैं। बावजूद इसके जिले में थाना स्तर पर स्पेशल आपरेशन ग्रुप कार्य कर रहे हैं, जिनमें तीन से चार सिपाही शामिल होते हैं।
इस टीम में शामिल पुलिस कर्मियों की सिर्फ कागजों पर ड्यूटी लगाई जाती है। खास बात यह है कि थानेदार के नेतृत्व में काम करने वाली एसओजी को अब तक कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी है। एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि थाना स्तर पर एसओजी का संचालन गलत है। यदि ऐसा हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
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तेजतर्रार दरोगा लूप लाइन में
जिले में कई तेज तर्रार दरोगा लंबे समय से लूप लाइन में पड़े हुए हैं। वहीं सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खड़े दरोगा थानों का चार्ज संभाले हुए हैं। यह मामला काफी समय से पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्ञातव्य हो कि दो माह पूर्व एक इंस्पेक्टर की सेवानिवृत्ति थाने के चार्ज से ही हुई थी। वर्तमान में कई थानेदार ऐसे हैं, जिनका कार्य कुछ माह ही बचा है। सूत्र बताते हैं कि राजनीतिक दखल की वजह से उन्हें चार्ज से नहीं हटाया जा रहा है। जबकि, पुलिस मैन्युअल के अनुसार सेवानिवृत्ति के दो वर्ष शेष रहने पर थाने का चार्ज नहीं दिया जा सकता है।
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बताते चलें कि शासन के आदेश पर करीब डेढ़ वर्ष पूर्व एसओजी को खत्म किया जा चुका है। इसके स्थान पर ‘स्वॉट’ का गठन किया गया है, जिसमें कई शाखाएं कार्यरत हैं। बावजूद इसके जिले में थाना स्तर पर स्पेशल आपरेशन ग्रुप कार्य कर रहे हैं, जिनमें तीन से चार सिपाही शामिल होते हैं।
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इस टीम में शामिल पुलिस कर्मियों की सिर्फ कागजों पर ड्यूटी लगाई जाती है। खास बात यह है कि थानेदार के नेतृत्व में काम करने वाली एसओजी को अब तक कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी है। एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि थाना स्तर पर एसओजी का संचालन गलत है। यदि ऐसा हो रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
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तेजतर्रार दरोगा लूप लाइन में
जिले में कई तेज तर्रार दरोगा लंबे समय से लूप लाइन में पड़े हुए हैं। वहीं सेवानिवृत्ति के मुहाने पर खड़े दरोगा थानों का चार्ज संभाले हुए हैं। यह मामला काफी समय से पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्ञातव्य हो कि दो माह पूर्व एक इंस्पेक्टर की सेवानिवृत्ति थाने के चार्ज से ही हुई थी। वर्तमान में कई थानेदार ऐसे हैं, जिनका कार्य कुछ माह ही बचा है। सूत्र बताते हैं कि राजनीतिक दखल की वजह से उन्हें चार्ज से नहीं हटाया जा रहा है। जबकि, पुलिस मैन्युअल के अनुसार सेवानिवृत्ति के दो वर्ष शेष रहने पर थाने का चार्ज नहीं दिया जा सकता है।