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मानसून की बेरुखी से सूखे की ओर बढ़ रहे कदम

Sun, 18 Jul 2021 12:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 12:51 AM IST
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Steps moving towards drought from the absurdity of monsoon
झांसी। मानसूनी सीजन का एक माह गुजरने के बाद भी जनपद पानी को तरस रहा है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 15 जुलाई तक बारिश का औसत आंकड़ा 205 मिमी है, जबकि अब तक महज 71.92 मिमी बारिश ही हुई है। हालात सूखे की ओर इशारा कर रहे हैं। बारिश न होने की वजह से जल संकट भी गहराता जा रहा है। सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खरीफ की बुवाई बुरी तरह से प्रभावित हो गई है।
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मौसम विभाग द्वारा इस बार जिले में सामान्य बारिश का पूर्वानुमान जताया गया था। 15 जून को मानसूनी सीजन शुरू होने से पहले हुई प्री-मानसून बारिश ने मौसम विभाग के पूर्वानुमान को हकीकत में बदलने के संकेत दिए थे। लेकिन, अब तक हालात एकदम इतर बने हुए हैं। इसका अंदाजा जून और जुलाई माह के बारिश के आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। जून में जिले में औसत बारिश का आंकड़ा 73.3 मिमी है और बारिश हुई 49.54 मिमी। जुलाई की तस्वीर तो और भी भयावह है। एक से 15 जुलाई के मध्य बारिश का औसत आंकड़ा 132.3 मिमी का है, जबकि पानी गिरा सिर्फ 22.38 मिमी। मानसून की बेरुखी की ये तस्वीर सूखे की ओर इशारा कर रही है। हालांकि, झांसी के लिए ये कोई नई बात नहीं है। पिछले एक दशक के बारिश के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो एक साल ही सामान्य (800-900 मिमी) से अधिक बारिश हुई है। इनमें से कई साल तो बारिश का आंकड़ा सामान्य के नजदीक भी नहीं पहुंच पाया।
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2013 के बाद से तरबतर नहीं हुआ जिला
झांसी। जिले में बारिश का औसत आंकड़ा 800-900 मिमी का है। लेकिन, पिछले एक दशक में सिर्फ साल 2013 में ही बारिश औसत से अधिक 1288 मिमी हुई थी। वहीं, जुलाई तक बारिश का औसत आंकड़ा 296.4 मिमी का है। पिछले 10 सालों के दरम्यान दो साल ही औसत से अधिक बारिश हुई है। 2012 में 323.24 मिमी और 2013 में 328.78 मिमी बारिश हुई थी।
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संकट में अन्नदाता, गहरा रहा संकट
झांसी। बारिश न होने की वजह से जल संकट गहरा गया है। इससे सबसे ज्यादा परेशान किसान हैं। समय पर बारिश न होने की वजह से धान की बुवाई नहीं हो पाई है। जबकि, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन एवं तिल की बुवाई हो चुकी। झांसी में इस बार कुल 2,43,316 हेक्टेयर में खरीफ फसल की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। कृषि विभाग के उप निदेशक केके सिंह ने बताया कि जिले में जुलाई से अगस्त तक खरीफ की बुवाई चलती है। अभी सूूखे वाली स्थिति नहीं है। लेकिन, आगे बारिश न होने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है।

समय पर बारिश न होने की वजह से उड़द एवं तिली में 90 प्रतिशत और मूंगफली में 80 प्रतिशत तक का नुकसान हो चुका है। हालात गंभीर हो चले हैं।
- जगराम सिंह, अस्ता
दो-तीन दिन के भीतर बारिश होने पर मूंगफली की पचास फीसदी फसल बच सकती है। वरना सब बर्बाद हो जाएगा। किसान पर कुदरत की बड़ी मार होगी।
- प्रकाश नारायण द्विवेदी, डोंड़िया
एक तो बारिश नहीं हुई और उस पर बांध भी खाली हैं। ऐसे में बगैर पानी के खेती कैसे हो सकती है। बीज में खर्च की गई रकम की वापसी होना भी मुश्किल लग रहा है।
- सूरज माते, खिरिया
क्षेत्र के लगभग चालीस प्रतिशत किसान खरीफ की बुवाई कर चुके हैं। शेष किसान बारिश के इंतजार में हैं। बारिश होने के बाद ही बुवाई शुरू होगी।
- रणवीर सिंह यादव, बछेह
महंगा बीज खरीदकर फसलों की बुवाई की। लेकिन, बारिश न होने की वजह से अब पूंजी डूबने का खतरा बना हुआ है। हालात सूखे जैसे लग रहे हैं।
- प्रभुदयाल पाठक, आमली
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