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राज्य वित्त आयोग की आस में अटका कर्मचारियों का वेतन
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झांसी। कोरोनाकाल में की जा रही कटौतियां और बजट की अनुपलब्धता नगर निगम के कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। नगर निगम के कर्मचारियों को अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि हर महीने दो तारीख तक वेतन मिल जाता था। वहीं नगर निगम अधिकारी वेतन देने के लिए राज्य वित्त आयोग की कि स्त आने का इंतजार कर रहे हैं।
नगर निगम में करीब दो हजार कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। जिनके वेतन पर हर महीने नगर निगम सात करोड़ रुपये खर्च करता है। कोरोना काल में शासन स्तर से राज्य वित्त आयोग के बजट में कटौती की जा रही है। पहले जहां नगर निगम को हर महीने राज्य वित्त के तहत 11 करोड़ रुपये तक मिलते थे। वहीं अब घटकर पांच से 6.5 करोड़ रुपये तक रह गया है। हालात यह हैं कि नगर निगम को हर महीने वेतन भुगतान करने के लिए राज्य वित्त के अलावा अपने स्तर से धन की व्यवस्था करनी पड़ती है। हर महीने तीन तारीख तक शासन स्तर से राज्य वित्त आयोग की किस्त मिल जाती थी, लेकिन इस महीने अब तक राज्य वित्त की किस्त नहीं मिल सकी है। वहीं नगर निगम के पास स्वयं के संसाधनों का इतना बजट नहीं है कि अपने स्तर से भुगतान किया जा सके।
सफाई कर्मचारियों में पनप रहा रोष
वेतन न मिलने के चलते सफाई कर्मचारियों में रोष है। साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन में से की जा रही कटौती को लेकर सफाई मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अशोक प्याल ने तमाम आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जो कंपनी काम करती थी वह 308 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कर्मचारियों को भुगतान करती थी और अपनी ओर अंशदान की राशि देती थी। साथ ही वेतन भी समय पर मिल जाता था। लेकिन अब अधिकारियों ने पुरानी कंपनी की सेवा समाप्त कर दी है और लखनऊ की किसी कंपनी से अनुबंध किया है। जो प्रतिदिन के पारिश्रमिक से कटौती करने के बाद भुगतान करती है और वेतन भी समय पर नहीं दिया जाता। उन्होंने पुरानी कंपनी को ही दोबारा सेवा देने के लिए अधिकृत करने की मांग की है। मांग करने वालों में सुभाष माते, सुरेश ठेकेदार शामिल हैं।
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वेतन के लिए राज्य वित्त आयोग की किस्त मिलने का इंतजार किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन दे रही पुरानी कंपनी का अनुबंध पूरा हो गया था। जिसके बाद टेंडर के जरिए नई कंपनी से अनुबंध किया गया। जल्द ही सफाई कर्मचारियों को वेतन दिलवाया जाएगा। शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त
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नगर निगम में करीब दो हजार कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। जिनके वेतन पर हर महीने नगर निगम सात करोड़ रुपये खर्च करता है। कोरोना काल में शासन स्तर से राज्य वित्त आयोग के बजट में कटौती की जा रही है। पहले जहां नगर निगम को हर महीने राज्य वित्त के तहत 11 करोड़ रुपये तक मिलते थे। वहीं अब घटकर पांच से 6.5 करोड़ रुपये तक रह गया है। हालात यह हैं कि नगर निगम को हर महीने वेतन भुगतान करने के लिए राज्य वित्त के अलावा अपने स्तर से धन की व्यवस्था करनी पड़ती है। हर महीने तीन तारीख तक शासन स्तर से राज्य वित्त आयोग की किस्त मिल जाती थी, लेकिन इस महीने अब तक राज्य वित्त की किस्त नहीं मिल सकी है। वहीं नगर निगम के पास स्वयं के संसाधनों का इतना बजट नहीं है कि अपने स्तर से भुगतान किया जा सके।
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सफाई कर्मचारियों में पनप रहा रोष
वेतन न मिलने के चलते सफाई कर्मचारियों में रोष है। साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन में से की जा रही कटौती को लेकर सफाई मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अशोक प्याल ने तमाम आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले जो कंपनी काम करती थी वह 308 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कर्मचारियों को भुगतान करती थी और अपनी ओर अंशदान की राशि देती थी। साथ ही वेतन भी समय पर मिल जाता था। लेकिन अब अधिकारियों ने पुरानी कंपनी की सेवा समाप्त कर दी है और लखनऊ की किसी कंपनी से अनुबंध किया है। जो प्रतिदिन के पारिश्रमिक से कटौती करने के बाद भुगतान करती है और वेतन भी समय पर नहीं दिया जाता। उन्होंने पुरानी कंपनी को ही दोबारा सेवा देने के लिए अधिकृत करने की मांग की है। मांग करने वालों में सुभाष माते, सुरेश ठेकेदार शामिल हैं।
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वेतन के लिए राज्य वित्त आयोग की किस्त मिलने का इंतजार किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन दे रही पुरानी कंपनी का अनुबंध पूरा हो गया था। जिसके बाद टेंडर के जरिए नई कंपनी से अनुबंध किया गया। जल्द ही सफाई कर्मचारियों को वेतन दिलवाया जाएगा। शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त