{"_id":"603015038ebc3ee9614de9d6","slug":"state-boxer-kritika-will-be-want-police-officer-jhansi-news-jhs1889872105","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस अफसर बनना चाहती थीं स्टेट बॉक्सर कृतिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस अफसर बनना चाहती थीं स्टेट बॉक्सर कृतिका
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। छात्रा कृतिका पुलिस अफसर बनना चाहती थी। इसके लिए उसने एनसीसी ज्वाइन की थी। बतौर एनसीसी कैडेट कृतिका ने लॉकडाउन में ड्यूटी के दौरान शानदार भूमिका अदा की थी। वह अच्छी बॉक्सर भी थी। वह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी थी।
गोंदू कंपाउंड के चाणक्यपुरम निवासी कंप्यूटर हार्डवेयर कारोबारी सुजीत त्रिवेदी की बड़ी बेटी काव्या इंजीनियर है। जबकि कृतिका छोटी बेटी थी। कृतिका शुरू से ही निडर थी और पुलिस अफसर बनना चाहती थी। नौकरी में अपनी राह आसान करने के लिए कृतिका ने एनसीसी ज्वाइन की थी और ‘बी’ सर्टिफिकेट भी हासिल कर चुकी थी। मां संगीता त्रिवेदी ने बताया कि लॉकडाउन के दरम्यान अन्य एनसीसी कैडेट के साथ कृतिका की भी ड्यूटी लगाई गई थी। चौराहों पर खड़े होकर वह लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोकती थी। इस काम में उसे बेहद खुशी होती थी। वह अक्सर बाइक से आया जाया करती थी। एनसीसी कैडेट होने का उसे गर्व था। यही वजह थी कि उसने अपनी बाइक पर आगे एनसीसी कैडेट लिखा रखा था।
दो साल पहले सड़क हादसे में मौत के मुंह में जाने से बची थी
झांसी। कृतिका दो साल पहले एक सड़क दुर्घटना की शिकार हो गई थी। शहर के इलाइट - सीपरी मार्ग के पास एक बस से वह टकरा गई थी। इस घटना में उसके पैर में गहरी चोट आई थी। लेकिन वह घबड़ाई नहीं थी। परिजन या अन्य किसी को फोन कर घटना स्थल पर बुलाने की जगह वह खुद घायल अवस्था में घर पहुंच गई थी। बाद में परिजनों ने उसका उपचार कराया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोंदू कंपाउंड के चाणक्यपुरम निवासी कंप्यूटर हार्डवेयर कारोबारी सुजीत त्रिवेदी की बड़ी बेटी काव्या इंजीनियर है। जबकि कृतिका छोटी बेटी थी। कृतिका शुरू से ही निडर थी और पुलिस अफसर बनना चाहती थी। नौकरी में अपनी राह आसान करने के लिए कृतिका ने एनसीसी ज्वाइन की थी और ‘बी’ सर्टिफिकेट भी हासिल कर चुकी थी। मां संगीता त्रिवेदी ने बताया कि लॉकडाउन के दरम्यान अन्य एनसीसी कैडेट के साथ कृतिका की भी ड्यूटी लगाई गई थी। चौराहों पर खड़े होकर वह लोगों को घरों से बाहर निकलने से रोकती थी। इस काम में उसे बेहद खुशी होती थी। वह अक्सर बाइक से आया जाया करती थी। एनसीसी कैडेट होने का उसे गर्व था। यही वजह थी कि उसने अपनी बाइक पर आगे एनसीसी कैडेट लिखा रखा था।
विज्ञापन
दो साल पहले सड़क हादसे में मौत के मुंह में जाने से बची थी
झांसी। कृतिका दो साल पहले एक सड़क दुर्घटना की शिकार हो गई थी। शहर के इलाइट - सीपरी मार्ग के पास एक बस से वह टकरा गई थी। इस घटना में उसके पैर में गहरी चोट आई थी। लेकिन वह घबड़ाई नहीं थी। परिजन या अन्य किसी को फोन कर घटना स्थल पर बुलाने की जगह वह खुद घायल अवस्था में घर पहुंच गई थी। बाद में परिजनों ने उसका उपचार कराया था।
विज्ञापन