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विशेष संयोग: मकर संक्रांति को शनिवार, पिता और पुत्र को अर्पित होगा तिल
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झांसी। मकर संक्रांति का स्नान दान पर्व 15 जनवरी (शनिवार) को मनेगा। इस बार पर्व को लेकर विशेष संयोग है। भगवान सूर्य को सफेद तिल केे साथ अर्घ्य दिया जाएगा। जबकि शनिदेव को काला तिल का अर्पण होगा। ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों में सूर्य और शनि को पिता-पुत्र कहा गया है। ऐसे में इन दोनों को प्रसन्न करने के लिए तिल का बड़ा महत्व होगा।
पौष और माघ माह में तिल और उससे बने प्रसाद तथा व्यंजनों का विशेष आनंद है। इन माह के कई त्योहारों पर मंदिरों और घरों में देवताओं को तिल और गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यता के अनुसार इस बार मकर संक्रांति पर विशेष संयोग भगवान शिव, भगवान विष्णु, सूर्यदेव और शनिदेव की प्रसन्नता के लिए बन रहा है। आचार्य शांतनु पांडेय के अनुसार 15 जनवरी को शनि प्रदोष है। इस दिन भगवान शिव को काला तिल के साथ जल अर्पण करें। शनि दोष के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। मान्यता है कि तिल की उत्पत्ति श्रीहरि विष्णु के पसीने से हुई थी। ऐसे में विष्णु भगवान को भी तिल, गुड़ से बना प्रसाद अर्पण होता है। वहीं, एक और धार्मिक मान्यता है कि जब सूर्य अपने पुत्र शनि के घर यानि मकर राशि में जाते हैं, तब शनिदेव उनका स्वागत करते हैं। हालांकि सूर्य और शनि के मध्य अनबन रहती है, लेकिन इस दिन तिल अथवा उससे बने व्यंजनों का दान करने से दोनों ही प्रसन्न होंगे।
इन पर्वों पर देवताओं को अर्पण होंगे तिल से बने प्रसाद
पौष और माघ माह में कई त्योहारों पर देवताओं को तिल और गुड़ से बने प्रसाद का अर्पण होगा। महंत मार्तंड स्वामी के अनुसार 21 जनवरी को माघ माह की गणेश चतुर्थी पर गणेश जी और 28 जनवरी को षटतिला एकादशी पर भगवान श्रीहरि को गुड़ व तिल से बने लड्डू प्रसाद में लगेंगे। इन दोनों माह में तिल का सेवन करने स्वास्थ्य ठीक रहता है और देवता भी प्रसन्न रहते हैं।
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पौष और माघ माह में तिल और उससे बने प्रसाद तथा व्यंजनों का विशेष आनंद है। इन माह के कई त्योहारों पर मंदिरों और घरों में देवताओं को तिल और गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यता के अनुसार इस बार मकर संक्रांति पर विशेष संयोग भगवान शिव, भगवान विष्णु, सूर्यदेव और शनिदेव की प्रसन्नता के लिए बन रहा है। आचार्य शांतनु पांडेय के अनुसार 15 जनवरी को शनि प्रदोष है। इस दिन भगवान शिव को काला तिल के साथ जल अर्पण करें। शनि दोष के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। मान्यता है कि तिल की उत्पत्ति श्रीहरि विष्णु के पसीने से हुई थी। ऐसे में विष्णु भगवान को भी तिल, गुड़ से बना प्रसाद अर्पण होता है। वहीं, एक और धार्मिक मान्यता है कि जब सूर्य अपने पुत्र शनि के घर यानि मकर राशि में जाते हैं, तब शनिदेव उनका स्वागत करते हैं। हालांकि सूर्य और शनि के मध्य अनबन रहती है, लेकिन इस दिन तिल अथवा उससे बने व्यंजनों का दान करने से दोनों ही प्रसन्न होंगे।
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इन पर्वों पर देवताओं को अर्पण होंगे तिल से बने प्रसाद
पौष और माघ माह में कई त्योहारों पर देवताओं को तिल और गुड़ से बने प्रसाद का अर्पण होगा। महंत मार्तंड स्वामी के अनुसार 21 जनवरी को माघ माह की गणेश चतुर्थी पर गणेश जी और 28 जनवरी को षटतिला एकादशी पर भगवान श्रीहरि को गुड़ व तिल से बने लड्डू प्रसाद में लगेंगे। इन दोनों माह में तिल का सेवन करने स्वास्थ्य ठीक रहता है और देवता भी प्रसन्न रहते हैं।
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