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बारिश की बेवफाई फिर भी तिल-उड़द की रिकार्ड बुवाई
amarujala
Updated Sat, 05 Aug 2017 01:11 AM IST
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farmer jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी।
इस बार बारिश भले ही औसत से 40 फीसदी कम हुई हो, लेकिन तिल और उड़द की रिकार्ड बुवाई हुई है। किसानों ने इस बार 77,350 हेक्टेयर में तिल और 86,210 हेक्टेयर में उड़द बोया है, जो जिले में इन दोनों फसलों की अब तक की सबसे अधिक बुवाई है। इन दोनों फसलों की कम पानी में भी अच्छी पैदावार हो जाती है। रुक-रुककर बारिश होने से किसानों को बुवाई करने का पर्याप्त समय मिला।
रुक-रुक कर बरसात तिल के लिए फायदेमंद होती है। जुलाई में औसत वर्षा 370.90 मिलीमीटर होती है, लेकिन अबकी बार 222 मिलीमीटर ही पानी गिरा, जो औसत से 150 मिलीमीटर कम है। खरीफ की बुवाई 25 जुलाई तक होती है। किसानों ने पानी की कमी को देखते हुए बुवाई धीमी कर दी थी। इस कारण अब तक 80 प्रतिशत खेतों में ही बुवाई हो सकी है। बुवाई में भी किसान उड़द और तिल की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं। कृषि विभाग ने तिल की बुवाई 76 हजार हेक्टेयर में करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन किसानों ने 77,350 हेक्टेयर में तिल की बुवाई कर दी है। उड़द की बुवाई भी लक्ष्य से अधिक हो गई है। इसका लक्ष्य 85,543 हेक्टेयर था, लेकिन 86,210 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। बुवाई अभी चल रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दोनों फसलों की जिले में अब तक की सर्वाधिक बुवाई है।
बुंदेलखंड की मिट्टी और तापमान के अनुरूप तिल व उड़द यहां खरीफ में मुख्य फसलें मानी जाती हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने कम पानी में पैदा होने वाली फसलों के बीज तैयार किए हैं। बार-बार सूखा से जूझ रहे किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर कम पानी में पैदा होने वाले उर्द की आजाद-3, पीयू-31 वैरायटी के बीज व तिल के शेखर एफएस, आरटी 351 और प्रगति बीज की बुआई की है। कम पानी में पैदा होने वाली फसलों की बुवाई से अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
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चित्रकूट में झमाझम, बाकी जगह कम
झांसी 222 मिलीमीटर
बांदा 333 मिलीमीटर
जालौन 158 मिलीमीटर
हमीरपुर 226 मिलीमीटर
ललितपुर 138 मिलीमीटर
महोबा 212 मिलीमीटर
चित्रकूट 555 मिलीमीटर
खाद खरीदें तो बिल जरूर लें
किसान यदि बुवाई के लिए रासायनिक खाद (उर्वरक) खरीदते हैं तो दुकानदार से उसका बिल जरूर लें, ताकि उन्हें मिलावटी खाद न मिले। दुकानदार अक्सर बिना बिल के उर्वरक बेच देते हैं, बाद में किसान शिकायत करते हैं। लेकिन, बिल नहीं होने के कारण कुछ नहीं होता है। इसलिए यदि बिल होगा तो किसान को फायदा मिलेगा।
धान के खेत से खरपतवार हटाएं
धान की फसल में खरपतवार बढ़ गए हैं। धान के खेतों में पानी का कम से कम उपयोग हो, इसके लिए जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को सलाह दी है कि वह खरपतवार नष्ट कर दें, ताकि खेत को पर्याप्त पानी मिल सके।
जहां पानी इकट्ठा हो, वहां बुवाई न करें
जिस खेत में पानी इकट्ठा न होता हो, किसान वहां पर तिल और उड़द की कम पानी में पैदा होने वाली फसलों की बुवाई कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में बुवाई देर से शुरू हुई थी। उम्मीद है कि बुवाई का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। उर्द का आजाद-3 बीज कृषि विभाग के गोदामों में उपलब्ध है।
- दुर्गेश कुमार सिंह
जिला कृषि अधिकारी
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इस बार बारिश भले ही औसत से 40 फीसदी कम हुई हो, लेकिन तिल और उड़द की रिकार्ड बुवाई हुई है। किसानों ने इस बार 77,350 हेक्टेयर में तिल और 86,210 हेक्टेयर में उड़द बोया है, जो जिले में इन दोनों फसलों की अब तक की सबसे अधिक बुवाई है। इन दोनों फसलों की कम पानी में भी अच्छी पैदावार हो जाती है। रुक-रुककर बारिश होने से किसानों को बुवाई करने का पर्याप्त समय मिला।
रुक-रुक कर बरसात तिल के लिए फायदेमंद होती है। जुलाई में औसत वर्षा 370.90 मिलीमीटर होती है, लेकिन अबकी बार 222 मिलीमीटर ही पानी गिरा, जो औसत से 150 मिलीमीटर कम है। खरीफ की बुवाई 25 जुलाई तक होती है। किसानों ने पानी की कमी को देखते हुए बुवाई धीमी कर दी थी। इस कारण अब तक 80 प्रतिशत खेतों में ही बुवाई हो सकी है। बुवाई में भी किसान उड़द और तिल की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं। कृषि विभाग ने तिल की बुवाई 76 हजार हेक्टेयर में करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन किसानों ने 77,350 हेक्टेयर में तिल की बुवाई कर दी है। उड़द की बुवाई भी लक्ष्य से अधिक हो गई है। इसका लक्ष्य 85,543 हेक्टेयर था, लेकिन 86,210 हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। बुवाई अभी चल रही है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दोनों फसलों की जिले में अब तक की सर्वाधिक बुवाई है।
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बुंदेलखंड की मिट्टी और तापमान के अनुरूप तिल व उड़द यहां खरीफ में मुख्य फसलें मानी जाती हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने कम पानी में पैदा होने वाली फसलों के बीज तैयार किए हैं। बार-बार सूखा से जूझ रहे किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर कम पानी में पैदा होने वाले उर्द की आजाद-3, पीयू-31 वैरायटी के बीज व तिल के शेखर एफएस, आरटी 351 और प्रगति बीज की बुआई की है। कम पानी में पैदा होने वाली फसलों की बुवाई से अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
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चित्रकूट में झमाझम, बाकी जगह कम
झांसी 222 मिलीमीटर
बांदा 333 मिलीमीटर
जालौन 158 मिलीमीटर
हमीरपुर 226 मिलीमीटर
ललितपुर 138 मिलीमीटर
महोबा 212 मिलीमीटर
चित्रकूट 555 मिलीमीटर
खाद खरीदें तो बिल जरूर लें
किसान यदि बुवाई के लिए रासायनिक खाद (उर्वरक) खरीदते हैं तो दुकानदार से उसका बिल जरूर लें, ताकि उन्हें मिलावटी खाद न मिले। दुकानदार अक्सर बिना बिल के उर्वरक बेच देते हैं, बाद में किसान शिकायत करते हैं। लेकिन, बिल नहीं होने के कारण कुछ नहीं होता है। इसलिए यदि बिल होगा तो किसान को फायदा मिलेगा।
धान के खेत से खरपतवार हटाएं
धान की फसल में खरपतवार बढ़ गए हैं। धान के खेतों में पानी का कम से कम उपयोग हो, इसके लिए जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को सलाह दी है कि वह खरपतवार नष्ट कर दें, ताकि खेत को पर्याप्त पानी मिल सके।
जहां पानी इकट्ठा हो, वहां बुवाई न करें
जिस खेत में पानी इकट्ठा न होता हो, किसान वहां पर तिल और उड़द की कम पानी में पैदा होने वाली फसलों की बुवाई कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। कुछ क्षेत्रों में बुवाई देर से शुरू हुई थी। उम्मीद है कि बुवाई का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। उर्द का आजाद-3 बीज कृषि विभाग के गोदामों में उपलब्ध है।
- दुर्गेश कुमार सिंह
जिला कृषि अधिकारी