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कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए 10 ऑक्सीजन प्लांट तैयार

Thu, 23 Dec 2021 02:55 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 23 Dec 2021 02:55 AM IST
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Somewhere complete, some preparations incomplete to fight the third wave of Corona
झांसी। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से लड़ने के लिए झांसी में कहीं पूरी तो कहीं अधूरी तैयारी है। झांसी में शासन ने नौ सरकारी अस्पतालों में तो ऑक्सीजन के प्लांट लगवा दिए हैं। मगर 105 पंजीकृत नर्सिंगहोमों में से अब तक चार ने ही ऑक्सीजन प्लांट लगवाए हैं। जबकि, शासन ने निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन प्लांट लगवाने के निर्देश दिए थे। ऐसे में अगर तीसरी लहर आ जाती है तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर में झांसी में ऑक्सीजन का जबरदस्त टोटा हो गया था। दूसरी लहर के पीक के समय झांसी में रोजाना 25-26 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत थी। जबकि, 20-21 मीट्रिक टन मिल पा रही थी। कई दिन तो ऑक्सीजन का टोटा हो गया है हालात ऐसे बने कि ऑक्सीजन न मिल पाने से कई संक्रमितों ने दम तोड़ दिया। कुछ की नर्सिंगहोम में भर्ती रहने के दौरान ही ऑक्सीजन खत्म हो जाने से जान चली है। इसको मद्देनजर रखते हुए शासन ने सभी बड़े अस्पतालों, सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट लगवाए। झांसी में नौ ऑक्सीजन प्लांट स्थापित होकर पूरी तरह से तैयार हैं। किसी प्लांट की क्षमता 500 तो किसी की 100 लिक्विड प्रति मिनट है। ऑक्सीजन प्लांट के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. एनके जैन ने बताया कि कोरोना में ऑक्सीजन कम होने पर किसी मरीज को एक-दो लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है, तो एचएफएनसी पर 40 लीटर प्रति मिनट तक ऑक्सीजन दी जाती है। ऐसे में यदि दस लीटर प्रति मिनट का औसत निकाला जाए तो 550 से ज्यादा मरीजों को ये प्लांट मिलकर रोजाना ऑक्सीजन दे सकेंगे। सभी प्लांटों की क्षमता मिलाकर 5550 लीटर प्रति मिनट है। वहीं, झांसी में 105 में से सिर्फ चार ही नर्सिंगहोमों ने अपने यहां ऑक्सीजन प्लांट लगवाए हैं। कोरोना के मामले भी फिर से सामने आने लगे हैं। यदि कोविड की दूसरी की तरह तीसरी लहर में भी केस बढ़ने लगे तो हालात फिर से बेकाबू हो सकते हैं।
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मेडिकल कॉलेज की मांग पूरी करता है पहले से लगा प्लांट
कोरोना के ज्यादातर गंभीर मरीजों को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जाता है। यहां पर पहले से ही लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट है, जिसकी क्षमता 20 हजार लीटर है। कोरोना के पीक पर पहुंचने के दौरान रोज 10 हजार लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही थी। गुरुग्राम से रोजाना ऑक्सीजन आ जाती थी। ऐसे में यहां पर मरीजों को दिक्कत नहीं हुई।
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प्लांट होने के बावजूद झांसी में उत्पादन शुरू नहीं
झांसी में गोरामछिया में एक ऑक्सीजन प्लांट का लाइसेंस मिला हुआ है। इसके बावजूद यहां पर ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं किया जा रहा है। औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने बताया कि गोरामछिया, बिजौली में दो समेत झांसी में तीन रिफलिंग ऑक्सीजन गैस सेंटर हैं। इनकी क्षमता प्रतिदिन 20-20 मीट्रिक टन गैस रीफिलिंग करने की है। यानी कि ये प्लांट रोज 60 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की रीफिलिंग कर सकते हैं।
इन्होंने ऑक्सीजन की कमी से अपनों को खोया
केस-1
बरुआसागर में रहने वाली 65 साल की वृद्ध महिला की ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत हो गई थी। मिशन कंपाउंड के रहने वाले वृद्धा के भतीजे मनोज ने बताया कि अप्रैल 2021 में चाची को कोरोना हो जाने के बाद उन्होंने प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां उन्हें ऑक्सीजन लगा दी गई। इसी बीच झांसी में ऑक्सीजन की कमी हो गई। उनका आरोप है कि अस्पताल के एक कर्मी ने चाची की ऑक्सीजन हटाकर दूसरे मरीज को लगा दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
केस-2
22 जुलाई को कोविड पॉजिटिव बंगलाघाट निवासी आशिया को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। बेटे असद के मुताबिक वो मां को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। ऑक्सीजन 75 प्रतिशत से भी कम थी। इसलिए उन्होंने रेफर कर दिया। निजी अस्पताल पहुंचे तो वहां ऑक्सीजन न होने की बात कहते हुए मेडिकल भेज दिया गया। मेडिकल कॉलेज में बेड खाली नहीं था। अस्पताल के बाहर ही उनकी मां ने ऑक्सीजन न मिल पाने के चलते दम तोड़ दिया।

यहां लगे ऑक्सीजन प्लांट
स्वास्थ्य इकाई प्लांट क्षमता
कैंट हॉस्पिटल 200
सीएचसी रानीपुर 500
सीएचसी समथर 500
सीएचसी गरौठा 500
सीएचसी बड़ागांव 500
सीएचसी बरुआसागर 500
जिला अस्पताल 850
मेडिकल कॉलेज 1000 (दो)
(नोट: क्षमता लिक्विड प्रति मिनट में।)
जिले में नौ सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट चालू हैं। जबकि, चार नर्सिंगहोमों ने प्लांट लगवाए हैं। सभी निजी अस्पतालों के संचालकों की बैठक बुलाई गई है। उन्हें फिर से प्लांट लगवाने के निर्देश दिए जाएंगे, जो नहीं लगवाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। - डॉ. अनिल कुमार, सीएमओ, झांसी।
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