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सोशल मीडिया से थमेगा अपराध
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:45 AM IST
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झांसी। सोशल मीडिया को हथियार बनाने के प्रयासों की रविवार को आईजी कानपुर
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जोन ने नब्ज टटोली। उन्होंने पुलिस कर्मियों से संवाद करके सोशल मीडिया का
बेहतर उपयोग का पाठ पढ़ाया।
आईजी आशुतोष पांडेय ने कहा कि समय के साथ बदलाव बेहद जरूरी है। हाईटेक होते समय के साथ नहीं चले तो काफी पिछड़ जाएंगे। नई-नई तकनीकी को अपराधी इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए जब तक पुलिस उसके बारे में नहीं जानेगी तब तक अंकुश लगाना संभव नहीं है। पुलिस की सोशल मीडिया पर कमांड होगी तो न सिर्फ अपराधियों पर अंकुश लग सकेगा बल्कि काफी हद तक अपराध भी थमेगा। उन्होंने पुलिस कर्मियों को आचरण में सुधार का भी पाठ पढ़ाया। जनता के बीच के कई उदाहरण भी पेश किए।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया में सक्रियता के लिए रेंज के हर थाने के एक दारोगा व दो सिपाहियों को प्रशिक्षित किया गया है जिनके वाट्स एप व फेस बुक पर दो प्रोफाइल (एकाउंट) हैं। एक एकाउंट पर पुलिस को सूचना देने वाले व मीडिया से संबंधित लोगों को जोड़ा गया है जबकि दूसरे से जनता को जोड़ा गया है। फेस बुक व वाट्स एप से प्रशिक्षित पुलिस कर्मी जनता के बीच फ्रैंड्स बना रहे हैं, जिसकी मदद से सूचनाओं व शिकायतों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन ग्राउंड में मौजूद दारोगाओं व सिपाहियों से सोशल मीडिया की मदद से जनता के बीच पहुंचने के प्रयासों की हकीकत जांची। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर पुलिस की कमांड होने से समय से पूर्व वारदातों की जानकारी अथवा सुराग मिल सकेगा। उन्होंने कई पुलिस कर्मियों के प्रयासों पर असंतोष जताया जबकि कइयों की पीठ थपथपाई। इस दौरान डीआईजी अजय मोहन शर्मा, एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे, एसपी सिटी राजेश कुमार आदि पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
व्यवहार व कार्यशैली में बदलाव करे पुलिस
आईजी ने प्रेसवार्ता में कहा कि पुलिस कर्मी अपने व्यवहार और कार्यशैली में बदलाव लाएं। थाने पर आने वाले फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया बड़ा आकार ले चुका है, जिसकी वजह से कोई बात अब छुपाना मुश्किल है। इसी वजह से उनका प्रयास है कि पुलिस सोशल मीडिया को हथियार बनाकर अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगाया जाए।
आईजी आशुतोष पांडेय ने कहा कि समय के साथ बदलाव बेहद जरूरी है। हाईटेक होते समय के साथ नहीं चले तो काफी पिछड़ जाएंगे। नई-नई तकनीकी को अपराधी इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए जब तक पुलिस उसके बारे में नहीं जानेगी तब तक अंकुश लगाना संभव नहीं है। पुलिस की सोशल मीडिया पर कमांड होगी तो न सिर्फ अपराधियों पर अंकुश लग सकेगा बल्कि काफी हद तक अपराध भी थमेगा। उन्होंने पुलिस कर्मियों को आचरण में सुधार का भी पाठ पढ़ाया। जनता के बीच के कई उदाहरण भी पेश किए।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया में सक्रियता के लिए रेंज के हर थाने के एक दारोगा व दो सिपाहियों को प्रशिक्षित किया गया है जिनके वाट्स एप व फेस बुक पर दो प्रोफाइल (एकाउंट) हैं। एक एकाउंट पर पुलिस को सूचना देने वाले व मीडिया से संबंधित लोगों को जोड़ा गया है जबकि दूसरे से जनता को जोड़ा गया है। फेस बुक व वाट्स एप से प्रशिक्षित पुलिस कर्मी जनता के बीच फ्रैंड्स बना रहे हैं, जिसकी मदद से सूचनाओं व शिकायतों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन ग्राउंड में मौजूद दारोगाओं व सिपाहियों से सोशल मीडिया की मदद से जनता के बीच पहुंचने के प्रयासों की हकीकत जांची। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर पुलिस की कमांड होने से समय से पूर्व वारदातों की जानकारी अथवा सुराग मिल सकेगा। उन्होंने कई पुलिस कर्मियों के प्रयासों पर असंतोष जताया जबकि कइयों की पीठ थपथपाई। इस दौरान डीआईजी अजय मोहन शर्मा, एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे, एसपी सिटी राजेश कुमार आदि पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
व्यवहार व कार्यशैली में बदलाव करे पुलिस
आईजी ने प्रेसवार्ता में कहा कि पुलिस कर्मी अपने व्यवहार और कार्यशैली में बदलाव लाएं। थाने पर आने वाले फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया बड़ा आकार ले चुका है, जिसकी वजह से कोई बात अब छुपाना मुश्किल है। इसी वजह से उनका प्रयास है कि पुलिस सोशल मीडिया को हथियार बनाकर अपराध व अपराधियों पर अंकुश लगाया जाए।