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फर्राटे से ले रहे हैं खर्राटे तो हो जाएं सावधान
Jhansi
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:41 AM IST
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फर्राटे से ले रहे हैं खर्राटे तो हो जाएं सावधान
- फोटो : demo
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झांसी। रात को सोते समय अगर आप जोर-जोर से खर्राटे लेते हैं और मोटापा भी है, तो सावधान हो जाइए। आपको ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया बीमारी शिकार बना सकती है। इससे सोते समय अचानक सांस न आना, नींद से जाग जाने की समस्या रहती है। समय पर इलाज न होने पर व्यक्ति की हार्टअटैक से मौत भी हो सकती है। मेडिकल कॉलेज में हर महीने औसतन छह मरीज इस बीमारी से पीड़ित आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी 30 से 60 साल के लोगों को होती है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह बीमारी होने की संभावना तीन गुनी होती है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों को यह बीमारी हो सकती है। जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 30 किलोग्राम प्रति मीटर स्क्वायर से ज्यादा हो उनके लिए खतरे की घंटी है। वहीं, गर्दन मोटा होने से श्वांस मार्ग छोटा हो सकता है, यह स्थायी मोटापा का संकेत हो सकती है। पुरुषों के लिए गर्दन की माप 17 इंच और महिलाओं के लिए 16 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर इस बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। बीमारी की समस्या उन लोगों में दोगुनी हो जाती है, जिन्हें अक्सर रात में नाक बंद होने की समस्या है। मेडिकल कॉलेज में हर महीने औसतन छह मरीज इलाज को आ रहे हैं।
घेर सकती हैं कई बीमारियां
इस बीमारी का इलाज न होने पर कई समस्याएं हो सकती हैं। खून में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाना, इससे सांस फूलने लगती है। बीपी व स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है, ह्रदय की धड़कन रुक सकती है। नींद पूरी न होने पर मानसिक रोग का खतरा बढ़ सकता है।
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- डॉ. आरके सिंह, चेस्ट फिजीशियन
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विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी 30 से 60 साल के लोगों को होती है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में यह बीमारी होने की संभावना तीन गुनी होती है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि मोटापे से ग्रस्त लोगों को यह बीमारी हो सकती है। जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 30 किलोग्राम प्रति मीटर स्क्वायर से ज्यादा हो उनके लिए खतरे की घंटी है। वहीं, गर्दन मोटा होने से श्वांस मार्ग छोटा हो सकता है, यह स्थायी मोटापा का संकेत हो सकती है। पुरुषों के लिए गर्दन की माप 17 इंच और महिलाओं के लिए 16 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर इस बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। बीमारी की समस्या उन लोगों में दोगुनी हो जाती है, जिन्हें अक्सर रात में नाक बंद होने की समस्या है। मेडिकल कॉलेज में हर महीने औसतन छह मरीज इलाज को आ रहे हैं।
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घेर सकती हैं कई बीमारियां
इस बीमारी का इलाज न होने पर कई समस्याएं हो सकती हैं। खून में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाना, इससे सांस फूलने लगती है। बीपी व स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है, ह्रदय की धड़कन रुक सकती है। नींद पूरी न होने पर मानसिक रोग का खतरा बढ़ सकता है।
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- डॉ. आरके सिंह, चेस्ट फिजीशियन