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झांसी: स्मार्ट सिटी...करोड़ों खर्च, हर माह आय सिर्फ 16 लाख, दो परियोजनाओं के संचालन का ठेका तक नहीं उठा पा रहा

Fri, 21 Nov 2025 02:05 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Fri, 21 Nov 2025 02:05 PM IST
सार

स्मार्ट सिटी के तहत कई परियोजनाओं के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद हर महीने सिर्फ 16 लाख रुपये की आय हो पा रही है।

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Smart City: Crores spent, monthly income only 16 lakh
नगर निगम, झांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्मार्ट सिटी के तहत कई परियोजनाओं के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद हर महीने सिर्फ 16 लाख रुपये की आय हो पा रही है। 72 करोड़ से अधिक की दो परियोजनाओं के संचालन का ठेका नहीं उठा पा रहा है। इसके अलावा, आईसीसीसी से आय में भी हिस्सा नहीं मिल रहा है। जबकि, भविष्य में इन परियोजनाओं के रखरखाव के लिए ही काफी बजट की जरूरत पड़ेगी।
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झांसी को स्मार्ट सिटी योजना सत्र 2016-17 में शामिल किया गया। योजना के तहत 930 करोड़ रुपये बजट मिला। इससे 66 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। हालांकि, इनमें कई ऐसी परियोजनाएं, जिन्हें लोक कल्याण के लिए लागू किया गया। इसमें पार्कों में बनाई गई ओपन जिम से लेकर कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों के जीर्णोद्धार का काम शामिल है। वहीं, मेजर ध्यानचंद म्यूजियम, स्पेस म्यूजियम, जीआईसी का स्पोर्ट्स स्टेडियम समेत कई ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनसे स्मार्ट सिटी को आय हो रही है।
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ठेका के लिए कोई भी फर्म नहीं आ रही आगे
बहुमंजिला कार पार्किंग और लक्ष्मीताल के संचालन का ठेका लेने के लिए कोई भी फर्म आगे नहीं आई है। हालांकि, कार पार्किंग का टेंडर इस साल तीन महीने के लिए उठा था लेकिन नुकसान होने पर फर्म ने टेंडर सरेंडर कर दिया था। अब टेंडर उठने तक नगर निगम खुद इसका संचालन कर रहा है। वहीं, नगर निगम में बने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से चालान के जरिये ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान से होने वाली आय का हिस्सा भी स्मार्ट सिटी को नहीं मिल रहा है। जबकि, 192.96 करोड़ खर्च करके स्मार्ट सिटी ने आईसीसीसी का निर्माण कराया है। इसके अलावा, 7.57 करोड़ से क्राफ्ट मेला मैदान में बनकर तैयार बुंदेलखंड सांस्कृतिक एवं पर्यटक सूचना केंद्र भी शुरू नहीं हो पा रहा है। हालांकि, संचालन का जिम्मा मिलने के बाद जेडीए ने एक बार निविदा निकाली थी। अब शर्तों में बदलाव करके फिर से टेंडर निकाला जाना है। इससे जेडीए को आय का 60 फीसदी और स्मार्ट सिटी को 40 प्रतिशत हिस्सा मिलना है।
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दूसरी तरफ, स्मार्ट सिटी को अभी हो रही आय का लगभग एक तिहाई हिस्सा तो स्टाफ के वेतन पर ही खर्च हो जाता है। बताया गया कि आने वाले समय में जब इन बड़ी परियोजनाओं के रखरखाव का खर्च बढ़ेगा, तब बहुत अधिक बजट की जरूरत पड़ेगी।

27 परियोजनाओं का खुद संचालन कर रहा
स्मार्ट सिटी लिमिटेड 33 परियोजनाओं को अलग-अलग विभागों को हैंडओवर कर चुका है। छह परियोजनाओं को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 27 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनका संचालन स्मार्ट सिटी लिमिटेड कर रहा है। वहीं, महापौर बिहारी लाल आर्य का कहना है कि इन परियोजनाओं को नगर निगम को हस्तांतरित किया जाना चाहिए। निगम इनसे आय बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा।


ये कार्य कराए गए
192.96 करोड़ से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
117.22 करोड़ से 26 एमएलडी का एसटीपी समेत पंपिंग स्टेशन
47.65 करोड़ से रानी लक्ष्मीबाई पार्क में स्पेस म्यूजियम
47.48 करोड़ से लक्ष्मीताल का सौंदर्यीकरण
27.86 करोड़ से रानी लक्ष्मीबाई पार्क में मेजर ध्यानचंद म्यूजियम
27.56 करोड़ से जीआईसी में स्पोर्ट्स स्टेडियम
25 करोड़ से इलाइट चौराहे के पास मल्टीलेवल कार पार्किंग
20.84 करोड़ से चार पैथोलॉजी सेंटर का निर्माण

इन्होंने यह कहा
स्मार्ट सिटी लिमिटेड की परियोजनाओं से आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आईसीसीसी से आय में स्मार्ट सिटी को भी हिस्सा मिले, इसके लिए संबंधित विभाग से बात की जाएगी। बहुमंजिला कार पार्किंग, लक्ष्मीताल का संचालन भी जल्द शुरू होगा। - राहुल यादव, एसीईओ, स्मार्ट सिटी
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