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बेखौफ अधिशासी अभियंता ने दो माह में छह एजेंसियों में बांट दिए थे 77.35 लाख
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झांसी। सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने मनमाने तरीके से एजेंसियों को दो महीने के भीतर ही 77.35 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। जांच कमेटी ने जब पड़ताल शुरू की तब उसमें फर्म के साथ कोई कांट्रैक्ट का कागज तक नहीं मिला। आरोपी रसीद भी नहीं दिखा सके। इस मामले को सबसे पहले अमर उजाला ने उजागर किया। इसके बाद मामला शासन तक पहुंचा। हुक्मरानों की नींद टूटी और अब जांच के बाद दोषियों पर गाज गिरी है।
झांसी प्रखंड में बेतवा नहर सबसे बड़ी नहर है। इसके रखरखाव, मरम्मत एवं सिल्ट सफाई के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च होते हैं। पिछले रबी सीजन 2019 में तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने सिल्ट सफाई से पहले ही एडवांस के तौर पर एजेंसियों को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया लेकिन, मौके पर कोई काम नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट के मुताबिक एक्सईएन ने मां कामाक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख रुपये, मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सिंतबर 2019 को 46.53 लाख रुपये, मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नंवबर 2019 को 4.98 लाख रुपये, मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख रुपये एवं बाबू प्रसाद तिवारी फर्म चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
इन एजेंसियों ने भुगतान हासिल करने के बाद कोई काम ही नहीं किया। इसी बीच तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार का तबादला हो गया। इसके बाद जांच-पड़ताल शुरू हो गई। जांच टीम के सदस्य भी मनमाने तरीके से सरकारी पैसे के बंटवारे को देखकर हैरान रह गए। सामान्य तौर पर कोई भी काम करने से फर्म के साथ कांट्रैक्ट होता है लेकिन, पैसों के बंटवारे की जल्दीबाजी में एक्सईएन ने कोई कांट्रैक्ट तक नहीं किया। जांच के दौरान कोई दस्तावेजों में कोई रसीद भी नहीं मिली। इस काम में कैशियर के साथ ही लेखाधिकारी ने भी भरपूर रोल अदा किया। जांच कमेटी ने तीनों को ही दोषी पाया है।
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सभी फार्मों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
सिंचाई विभाग के अभियंता एवं कर्मचारियों को विभागीय कार्रवाई के साथ ही एफआईआर भी झेलनी होगी। सभी छहों आरोपी फर्म के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उपसचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने इनके खिलाफ भी तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। शासन से निर्देश आने के बाद यहां विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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झांसी प्रखंड में बेतवा नहर सबसे बड़ी नहर है। इसके रखरखाव, मरम्मत एवं सिल्ट सफाई के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च होते हैं। पिछले रबी सीजन 2019 में तत्कालीन अधिशासी अभियंता संजय कुमार ने सिल्ट सफाई से पहले ही एडवांस के तौर पर एजेंसियों को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया लेकिन, मौके पर कोई काम नहीं हुआ। जांच रिपोर्ट के मुताबिक एक्सईएन ने मां कामाक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख रुपये, मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सिंतबर 2019 को 46.53 लाख रुपये, मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नंवबर 2019 को 4.98 लाख रुपये, मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख रुपये एवं बाबू प्रसाद तिवारी फर्म चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
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इन एजेंसियों ने भुगतान हासिल करने के बाद कोई काम ही नहीं किया। इसी बीच तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार का तबादला हो गया। इसके बाद जांच-पड़ताल शुरू हो गई। जांच टीम के सदस्य भी मनमाने तरीके से सरकारी पैसे के बंटवारे को देखकर हैरान रह गए। सामान्य तौर पर कोई भी काम करने से फर्म के साथ कांट्रैक्ट होता है लेकिन, पैसों के बंटवारे की जल्दीबाजी में एक्सईएन ने कोई कांट्रैक्ट तक नहीं किया। जांच के दौरान कोई दस्तावेजों में कोई रसीद भी नहीं मिली। इस काम में कैशियर के साथ ही लेखाधिकारी ने भी भरपूर रोल अदा किया। जांच कमेटी ने तीनों को ही दोषी पाया है।
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सभी फार्मों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
सिंचाई विभाग के अभियंता एवं कर्मचारियों को विभागीय कार्रवाई के साथ ही एफआईआर भी झेलनी होगी। सभी छहों आरोपी फर्म के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उपसचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने इनके खिलाफ भी तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। शासन से निर्देश आने के बाद यहां विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।