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‘बीरबल की खिचड़ी’ बना सीपरी ओवरब्रिज

Mon, 01 Jul 2019 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jul 2019 12:57 AM IST
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sipri overbridge seems to birbal ki khichdi
सीपरी बाजार ओवरब्रिज का अधर में अटका पड़ा कार्य। अमर उजाला
‘बीरबल की खिचड़ी’ बना सीपरी ओवरब्रिज
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झांसी।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज ‘बीरबल की खिचड़ी’ बनता जा रहा है। ये कब तक बनकर तैयार हो जाएगा इसका भी जवाब किसी के पास नहीं है। जिम्मेदारों के झूठे आश्वासनों से लोग आजिज आ रहे हैं। सरकारी ढर्रा है कि सुधरने का नाम नहीं ले रहा। निर्माण 2014 में शुरू किया गया था। इसे दो साल में बनाना था लेकिन अभी तक वह पूरा नहीं हुआ है। पहले ओवरब्रिज का निर्माण कराने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम बंद कर दिया। इसके बाद नई कंपनी को काम देने के लिए टेंडर निकाले गए, लेकिन इसके लिए कोई आगे नहीं आया।
सीपरी बाजार से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक के उस पार शहर की लगभग डेढ़ लाख की आबादी रहती है। सीपरी बाजार के अलावा रेलवे कॉलोनी, प्रेमनगर, आवास विकास कॉलोनी, नंदनपुरा समेत दर्जनों इलाकों की ओर जाने का यही प्रमुख मार्ग है। यातायात का दबाव अधिक होने की वजह से अक्सर यहां जाम की स्थिति बनी रहती थी। इससे निजात पाने के लिए यहां सालों से ओवरब्रिज निर्माण की मांग की जा रही थी, जिसे 27 सितंबर 2012 को झांसी आए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूरा किया और यहां ब्रिज निर्माण की घोषणा की। इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपी गई। निगम ने जून 2014 में काम शुरू किया, जो दो साल में पूरा होना था। बारह सौ मीटर लंबे पुल की दोनों ओर की भुजाएं सेतु निगम को बनानीं थीं, जो तय अवधि में तैयार कर भी ली गईं। ब्रिज के रेलवे ट्रैक के ऊपर के हिस्से का निर्माण रेलवे को करना था। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से रेलवे को धनराशि मुहैया कराई गई थी, लेकिन रेलवे ये काम दो साल बाद भी पूरा नहीं कर पाया है।
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स्थिति ये रही कि रेलवे की ओर से पिछले एक साल से ये बताया जा रहा था कि ब्रिज निर्माण के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) से लोहे के गर्डर नहीं मिल रहे हैं, लेकिन लंबा वक्त गुजरने के बाद जब पड़ताल हुई तो पता चला कंस्ट्रक्शन कंपनी ने सेल से गर्डर मांगे ही नहीं हैं। तब कहीं जाकर आनन फानन में रेलवे से कंपनी का काम निरस्त कर दिया। अब दूसरे कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम दिया जाना है, इसके लिए शुक्रवार को टेंडर मांगे गए थे, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
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इससे अब हालात और भी बिगड़ गए हैं। ब्रिज कब बनकर तैयार होगा, इसका जवाब अब किसी के पास नहीं बचा है। रेलवे अब दुबारा से ब्रिज निर्माण का काम पूरा करने के लिए टेंडर प्रक्रिया करने की तैयारी कर रहा है। कोई कंस्ट्रक्शन कंपनी इसके लिए आगे आएगी या नहीं, ये आने वाला वक्त ही बताएगा। ठेका लेने के बाद कंपनी की काम की गति क्या होगी और कब तक काम पूरा कर पाएगी, इन सारे सवालों के जवाब भी भविष्य के पास ही हैं लेकिन, इसका खामियाजा उन सभी इलाकों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें रोजाना यहां से गुजरना पड़ता है। ब्रिज के पिलर खड़े होने से सड़क संकरी हो गई है। उस पर बेतहाशा अतिक्रमण भी है। रेंगते हुए वाहन किसी तरह से यहां से गुजरते हैं। इस सब के बीच सहूलियत के ब्रिज निर्माण की मांग करने वाले स्थानीय लोग अपने को छला सा महसूस कर रहे हैं। अब ये उनके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।

जल्द ही दुबारा टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। टेंडर होते ही तेजी से ब्रिज निर्माण का काम शुरू करा दिया जाएगा। रेलवे की ब्रिज निर्माण का काम जल्द से जल्द पूरा कराने की तैयारी है।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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