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तबादला होने के बावजूद कोठियां नहीं छोड़ रहे सिंचाई विभाग के अफसर

Thu, 29 Oct 2020 12:35 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2020 12:35 AM IST
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Sinchai department officer not left kodi
झांसी। सिंचाई विभाग के कई वरिष्ठ अभियंताओं का गैर जनपद तबादला हो चुका फिर भी उनका झांसी मोह नहीं छूट रहा। तबादला होने के बावजूद इन अभियंताओं ने अब तक सरकारी कोठियों पर कब्जा नहीं छोड़ा। इनको खाली कराने को लेकर शासन से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं लेकिन, न इन अभियंताओं के कान पर जूं रेंग रही है और न स्थानीय सिंचाई प्रबंधन ही इनको खाली कराने में दिलचस्पी दिखा रहा है।
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सिंचाई विभाग की सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी शहर के पॉश इलाके के बीचोंबीच है। यहां आवास आवंटित होने के बाद अभियंता आसानी से खाली नहीं करते। कोठी डीए-13 में बतौर एक्सईएन रहने वाले आरके सिंह का तबादला पिछले साल जुलाई में प्रतापगढ़ हो गया लेकिन, करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद उन्होंने इसे खाली नहीं किया। यह कोठी अभी भी उनके कब्जे में है, जबकि वह अधीक्षण अभियंता पर पदोन्नत हो चुके। इसकी मरम्मत एवं रखरखाव पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। जारी हुए नोटिस के मुताबिक सहायक अभियंता अजय वर्मा का पिछले सीजन में तबादला हो चुका, उन्होंने भी आवास नहीं छोड़ा।
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अवर अभियंता राकेश पाल, सुखदेश कुशवाहा का दो सत्र पहले तबादला हो चुका। इन सबका सरकारी आवास पर कब्जा बरकरार है जबकि शासनादेश में कार्यस्थल में आवास उपलब्ध कराने के साफ निर्देश हैं। तबादले के बाद इन अफसरों को शासन ने नोटिस भी भेजा लेकिन, अब तक आवास खाली नहीं कराए जा सके। इसी तरह माताटीला एवं नंदनपुरा कॉलोनी में डेढ़ दर्जन से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बावजूद सरकारी आवासों पर काबिज हैं। इन अफसर-कर्मचारियों से आवास खाली कराने के लिए स्थानीय सिंचाई प्रबंधन भी कोई कदम नहीं उठा रहा। नोडल अभियंता उमेश कुमार का कहना है आवंटन कमेटी के जरिए आवास दिए गए हैं। जिनकी समयावधि पूरी हो गई उनको पत्र भेजा गया है।
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रियायती दरों पर मिलते हैं आवास
सरकारी आवासों से कब्जा न छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण इन सरकारी बंगलों का बेहद रियायती दरों पर मिलना है। इन दरों पर इतने बड़े बंगले का मिलना आमतौर पर संभव नहीं। इस वजह से तमाम जोर-जतन लगाकर अफसर इन पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहते हैं। शासनादेश के मुताबिक एक अफसर को सिर्फ एक सरकारी आवास ही आवंटित किया जा सकता है लेकिन, कई अफसरों के पास दो-दो जनपदों में आवास आवंटित हैं।
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