{"_id":"5efe32428ebc3e43171de57a","slug":"sinchai-department-corruption-report-reach-office-jhansi-news-jhs170542186","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिंचाई विभाग के घोटाले की जांच रिपोर्ट शासन के पास पहुंची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिंचाई विभाग के घोटाले की जांच रिपोर्ट शासन के पास पहुंची
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। सिंचाई विभाग के बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय में बिना कार्य कराए ही 75 लाख रुपये से अधिक के भुगतान की जांच रिपोर्ट मुख्यालय से शासन (सिंचाई अनुभाग) के पास भेज दी गई। रिपोर्ट में कई खामियां बताईं गईं हैं, जिससे संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
अमर उजाला ने सिंचाई विभाग के बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय में हुए लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। इसमें बताया गया था कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने न तो नहरों की सफाई कराई और नहीं मरम्मत, फिर भी साठगांठ कर छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया। इस घोटाले में कार्यालय के कैशियर समेत और भी कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। नहरों की सिल्ट सफाई, नहरों की मरम्मत, नहरों की खुदाई आदि कार्यों के नाम पर मेसर्स मां कामांक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख, मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सितंबर 2019 को 46.53 लाख, मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नवंबर 2019 को 4.98 लाख, मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख व श्री बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख का भुगतान किया गया। इन कार्यों से संबंधित कोई बिल कार्यालय में नहीं पाए गए।
इस मामले में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय लखनऊ भेज दी थी, जहां से रिपोर्ट को शासन के पास भेज दिया गया है। इस संबंध में मुख्य अभियंता केबी लाल ने बताया कि इस मामले में जो भी लिप्त होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ने सिंचाई विभाग के बेतवा नहर प्रखंड कार्यालय में हुए लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। इसमें बताया गया था कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने न तो नहरों की सफाई कराई और नहीं मरम्मत, फिर भी साठगांठ कर छह फर्मों को 75 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया। इस घोटाले में कार्यालय के कैशियर समेत और भी कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। नहरों की सिल्ट सफाई, नहरों की मरम्मत, नहरों की खुदाई आदि कार्यों के नाम पर मेसर्स मां कामांक्षी सप्लायर्स को एक अक्तूबर 2019 को 9.99 लाख, मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन को 26 सितंबर 2019 को 46.53 लाख, मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन को चार नवंबर 2019 को 4.98 लाख, मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख, मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज को चार दिसंबर 2019 को 5.90 लाख व श्री बाबू प्रसाद तिवारी फर्म को चार दिसंबर 2019 को 4.10 लाख का भुगतान किया गया। इन कार्यों से संबंधित कोई बिल कार्यालय में नहीं पाए गए।
विज्ञापन
इस मामले में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय लखनऊ भेज दी थी, जहां से रिपोर्ट को शासन के पास भेज दिया गया है। इस संबंध में मुख्य अभियंता केबी लाल ने बताया कि इस मामले में जो भी लिप्त होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है।
विज्ञापन