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सात बार के हारे हैं..बड्डे गुरु हमारे हैं
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झांसी। चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। इस बार कोरोना की वजह से चुनाव प्रचार भी धीमा है। वर्चुअल प्रचार पर जोर दिया जा रहा है। सामाजिक प्रचार पर रोक है। ऐसे में बुजुर्ग भी अपने जमाने के नेताओं को याद कर रहे हैं। इनमें से एक थे झांसी के सुभाषगंज निवासी पं. ओमप्रकाश दीक्षित उर्फ बड्डे गुरु जिनकी ख्याति पूरी झांसी में थी। इन्होंने सात बार निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिस वजह से उनका नारा भी बहुत चर्चित हुआ। लोग जनसंपर्क के दौरान इनकी जनसभा से नारे लगाते थे कि सात बार का हारा है बड्डे गुरु हमारा है।
झांसी जनपद के चुनावी गलियारों में बहुत नेता आए और गए लेकिन महज कुछ नेता और प्रत्याशी ही ऐसे हैं जिनकी ख्याति और प्रभाव लोगों के दिलों में आज भी है। 1989 में उन्होंने चुनाव लड़ा। तब उनकी माली हालत ठीक नहीं थी। ऐसे में उनके व्यक्तित्व से प्रसन्न होकर लोगों ने उन्हें अपनी गाड़ी तक प्रचार करने के लिए दे दी थी। 12 साल पहले उनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन आज भी बुजुर्ग हास्य और प्रतिभाशाली नेतृत्व के धनी पं. ओमप्रकाश दीक्षित उर्फ बड्डे गुरु को याद करते हैं। इसके साथ ही ये स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं, इनके योगदान के लिए सलमान खुर्शीद भी सम्मानित कर चुके हैं। क्षेत्रीय निवासी मोहन तिवारी बताते हैं कि वह हमेशा सफेद कुर्ता, पजामा और नेहरू जैकेट पहनते थे। माथे पर तिलक और मूछों पर ताव रहता था। जब भी कोई ये नारा लगाता था कि सात बार का हारा है बड्डे गुरु हमारा है तो वह बहुत चटकारे लेते थे। उनके प्रचार के लिए भी बड़े-बड़े नेता आए हैं।
अभिनेताओं से लेकर राजनेताओं तक से थी दोस्ती
बड्डे गुरु की दोस्ती अमिताभ बच्चन, एनडी तिवारी, इंदीवर, सुनील दत्त, राजेश खन्ना, महेंद्र कपूर गीतकार, जय मुखर्जी, सुजान सिंह बुंदेला आदि तक से इनकी दोस्ती थी। कई बार वह इनसे मिलने झांसी भी आए। इसके साथ ही इन्होंने बॉलीवुड में अभिनय किया है। नेताओं से लेकर बॉलीवुड अभिनेता तक इनसे प्रभावित थे।
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झांसी जनपद के चुनावी गलियारों में बहुत नेता आए और गए लेकिन महज कुछ नेता और प्रत्याशी ही ऐसे हैं जिनकी ख्याति और प्रभाव लोगों के दिलों में आज भी है। 1989 में उन्होंने चुनाव लड़ा। तब उनकी माली हालत ठीक नहीं थी। ऐसे में उनके व्यक्तित्व से प्रसन्न होकर लोगों ने उन्हें अपनी गाड़ी तक प्रचार करने के लिए दे दी थी। 12 साल पहले उनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन आज भी बुजुर्ग हास्य और प्रतिभाशाली नेतृत्व के धनी पं. ओमप्रकाश दीक्षित उर्फ बड्डे गुरु को याद करते हैं। इसके साथ ही ये स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं, इनके योगदान के लिए सलमान खुर्शीद भी सम्मानित कर चुके हैं। क्षेत्रीय निवासी मोहन तिवारी बताते हैं कि वह हमेशा सफेद कुर्ता, पजामा और नेहरू जैकेट पहनते थे। माथे पर तिलक और मूछों पर ताव रहता था। जब भी कोई ये नारा लगाता था कि सात बार का हारा है बड्डे गुरु हमारा है तो वह बहुत चटकारे लेते थे। उनके प्रचार के लिए भी बड़े-बड़े नेता आए हैं।
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अभिनेताओं से लेकर राजनेताओं तक से थी दोस्ती
बड्डे गुरु की दोस्ती अमिताभ बच्चन, एनडी तिवारी, इंदीवर, सुनील दत्त, राजेश खन्ना, महेंद्र कपूर गीतकार, जय मुखर्जी, सुजान सिंह बुंदेला आदि तक से इनकी दोस्ती थी। कई बार वह इनसे मिलने झांसी भी आए। इसके साथ ही इन्होंने बॉलीवुड में अभिनय किया है। नेताओं से लेकर बॉलीवुड अभिनेता तक इनसे प्रभावित थे।
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