{"_id":"07ea5eb7120ca8d4e6bf2d394338f43d","slug":"sark-desh-lagu-karen-rastriya-krishi-vaniki-neeti-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सार्क देश लागू करें राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सार्क देश लागू करें राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति
झांसी / ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2015 01:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुवार को सार्क देशों के कृषि वानिकी विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संतुलन में वृक्षों की महत्ता, वृक्ष उत्पाद, सुरक्षा एवं गरीबी उन्मूलन समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति को किसानों के हित के लिए लागू करने पर जोर दिया।
‘कृषि वानिकी प्रणालियों में तकनीकी उन्नति, सार्क देशों में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकी हेतु रणनीति’ विषय पर केेंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन समापन के मुख्य अतिथि सार्क कृषि केंद्र ढाका के कृषि वानिकी विशेषज्ञ डॉ. संगय ने अनुसंधान एवं नीतिगत मुद्दे एवं कृषि वानिकी प्रसार एवं प्रशिक्षण विषय पर विस्तृत चर्चा की। सार्क के सभी देशों से आह्वान किया कि चारा प्रजातियां एवं पशुपालन को कृषि वानिकी अनुसंधान के तहत परीक्षण कर इसका क्रियान्वयन किया जाए। साथ ही कृषि वानिकी आधारित पद्धतियों को लागू किया जाए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विमला देवी ने जैव ईधन, जैव ऊर्जा पर विस्तृत जानकारी दी। पाकिस्तान के बलूचिस्तान कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. रजा अली जमाली ने कहा कि जिस तरह भारत में राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति 2014 जारी की गई है। इसी तरह अन्य सार्क देशों को भी अपनी कृषि वानिकी नीति लागू करनी चाहिए। इससे लघु एवं सीमांत किसानों को कृषि वानिकी अपनाने में सहायता मिलेगी।
प्रधान वैज्ञानिक आरपी द्विवेदी ने बताया कि कृषि वानिकी प्रसार एवं प्रशिक्षण के लिए सार्क देशों में नेटवर्क स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसके माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण को अपनाने में किसानों को मदद मिलेगी। उन्होंने कृषि वानिकी प्रसार हेतु कौशल वृद्धि की आवश्यकता बताई, साथ ही प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वानिकी प्रसार विषय विशेषज्ञ की तैनाती पर जोर दिया। केेंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. अनिल कुमार गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
इससे पूर्व सार्क देशों के वैज्ञानिकों ने संस्थान की ओर से परासई-सिंध जलागम परियोजना के अंतर्गत चल रही गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस मौके पर पूर्व निदेशक एसके ध्यानी, डा. केबी श्रीधर, प्रशासनिक अधिकारी जेएल शर्मा, वित्त अधिकारी एसबी शर्मा, वरिष्ठ प्रक्षेत्र प्रबंधक बी सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके हांडा ने किया। आभार डॉ. चमन ने जताया।
विज्ञापन
‘कृषि वानिकी प्रणालियों में तकनीकी उन्नति, सार्क देशों में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकी हेतु रणनीति’ विषय पर केेंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन समापन के मुख्य अतिथि सार्क कृषि केंद्र ढाका के कृषि वानिकी विशेषज्ञ डॉ. संगय ने अनुसंधान एवं नीतिगत मुद्दे एवं कृषि वानिकी प्रसार एवं प्रशिक्षण विषय पर विस्तृत चर्चा की। सार्क के सभी देशों से आह्वान किया कि चारा प्रजातियां एवं पशुपालन को कृषि वानिकी अनुसंधान के तहत परीक्षण कर इसका क्रियान्वयन किया जाए। साथ ही कृषि वानिकी आधारित पद्धतियों को लागू किया जाए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विमला देवी ने जैव ईधन, जैव ऊर्जा पर विस्तृत जानकारी दी। पाकिस्तान के बलूचिस्तान कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. रजा अली जमाली ने कहा कि जिस तरह भारत में राष्ट्रीय कृषि वानिकी नीति 2014 जारी की गई है। इसी तरह अन्य सार्क देशों को भी अपनी कृषि वानिकी नीति लागू करनी चाहिए। इससे लघु एवं सीमांत किसानों को कृषि वानिकी अपनाने में सहायता मिलेगी।
विज्ञापन
प्रधान वैज्ञानिक आरपी द्विवेदी ने बताया कि कृषि वानिकी प्रसार एवं प्रशिक्षण के लिए सार्क देशों में नेटवर्क स्थापित करने की आवश्यकता है, जिसके माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण को अपनाने में किसानों को मदद मिलेगी। उन्होंने कृषि वानिकी प्रसार हेतु कौशल वृद्धि की आवश्यकता बताई, साथ ही प्रत्येक कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि वानिकी प्रसार विषय विशेषज्ञ की तैनाती पर जोर दिया। केेंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. अनिल कुमार गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया।
विज्ञापन
इससे पूर्व सार्क देशों के वैज्ञानिकों ने संस्थान की ओर से परासई-सिंध जलागम परियोजना के अंतर्गत चल रही गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस मौके पर पूर्व निदेशक एसके ध्यानी, डा. केबी श्रीधर, प्रशासनिक अधिकारी जेएल शर्मा, वित्त अधिकारी एसबी शर्मा, वरिष्ठ प्रक्षेत्र प्रबंधक बी सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके हांडा ने किया। आभार डॉ. चमन ने जताया।