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धोखाधड़ी में कारोबारी संजय वर्मा गिरफ्तार
Fri, 18 Oct 2019 04:14 PM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 18 Oct 2019 04:14 PM IST
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पुलिस गिरफ्त में संजय वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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झांसी। नवाबाद थाना पुलिस ने शुक्रवार को मीना हत्याकांड के आरोपी कारोबारी संजय वर्मा को धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, यह गिरफ्तारी मीना हत्याकांड की जगह आयकर और जीएसटी में टैक्स चोरी करने के लिए की गई है। पुलिस ने हत्याकांड में गिरफ्तारी के लिए कारोबारी के स्टे आर्डर के खिलाफ हाईकोर्ट में आवेदन कर रखा है। हाईकोर्ट से स्टे खत्म होने पर मीना हत्याकांड में भी कारोबारी की गिरफ्तारी हो जाएगी।
पुलिस तालबेहट निवासी श्यामलता सोनी की पुत्री मीना सोनी की हत्या के मामले में पांच आरोपियों को पहले की गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि, कोतवाली क्षेत्र के वासुदेव मुहल्ला बड़ाबाजार निवासी कारोबारी संजय वर्मा की गिरफ्तारी होना बाकी रह गई थी। वह फरार चल रहा था। चूंकि, हत्याकांड के मामले में कारोबारी ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। इस कारण पुलिस कारोबारी को गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। लेकिन, शुक्रवार को पुलिस ने कारोबारी को धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में इलाइट चौराहे से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार कारोबारी अपने व्यापार में आयकर और जीएसटी बचाने के लिए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के खाते खुलवाने के बाद खुद ही उनका संचालन कर रहा था। इसी के तहत एक मामले में मीना सोनी के खाते में पैसा डालने के बाद वह अपने नौकर गौतम कुमार के खाते में स्थानांतरित कर दिए थे। इस बात की जानकारी नौकर को नहीं थी। विगत 23 मार्च 2019 को कारोबारी ने मीना सोनी को नई दिल्ली के अपोलो हास्पिटल के पास शराब की दुकान के पीछे जब अपने सहयोगियों के सुपुर्द किया था, उस वक्त मीना सोनी के चार एटीएम कारोबारी के पास ही थे। कारोबारी के पास से चारों एटीएम बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद कारोबारी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं, इस मामले में एसएसपी डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि मीना हत्याकांड में कारोबारी की गिरफ्तारी के लिए स्टे समाप्त कराने के खिलाफ आवेदन दे रखा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टे खत्म हो जाएगा।
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यह था मीना हत्याकांड
तालबेहट निवासी श्यामलता सोनी ने कोतवाली के वासुदेव मोहल्ला निवासी संजय वर्मा पर पुत्री का अपहरण कर दुबई ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले कारोबारी संजय वर्मा के चालक योगेश कुमार को पकड़ा था। उससे की गई पूछताछ में पता चला था कि संजय वर्मा ने उसे बताया था कि मीना को मारकर यमुना नदी में बहा दिया है। चालक को रिमांड पर लेने के बाद पुलिस टीम दिल्ली गई थी, जहां की गई पड़ताल के दौैरान पता चला था कि मीना सोनी की हत्या मेें संजय वर्मा के साथ और लोग भी शामिल थे। बाद में पुलिस ने कॉल रिकॉॅर्ड व अन्य सूत्रों की मदद से घटना में शामिल कोतवाली के डड़ियापुरा स्थित शिव परिवार कॉलोनी निवासी जितेंद्र राय, जालौन के राजेंद्र नगर निवासी नरेंद्र, बैंकर्स कॉलोनी निवासी सर्वेश कुमार और थाना सीपरी बाजार स्थित काशीराम कॉलोनी निवासी जयनारायण लिटौरिया को पकड़ लिया था।
पकड़े गए मुख्य आरोपी सर्वेश ने पूछताछ में बताया था कि संजय वर्मा ने मीना सोनी को मारकर लाश ठिकाने लगाने के लिए दिल्ली बुलाया था। उसने यह भी कहा कि दो तीन साथी भी मदद के लिए साथ ले आना, ताकि परेशानी न हो। उसने पहले जितेंद्र राय को बुलाया, उसके पास इनोवा गाड़ी थी। उसकी गाड़ी से ही दिल्ली जाने की योजना बनी। इसके लिए नरेंद्र व जयनारायण को भी साथ लेकर सभी 25 मार्च को दिल्ली पहुंचे। सभी लोग दिल्ली के पहाड़गंज स्थित एक हॉस्पिटल में रुके थे। अगले दिन 26 मार्च की रात करीब नौ बजे संजय वर्मा, मीना सोनी को लेकर अपोलो हॉस्पिटल के पीछे वाइन शॉॅप के पास आए, जहां मीना उनके साथ नशे की हालत में थी। इसके बाद संजय वर्मा ने उसे ठिकाने लगाने के लिए कहा। सभी लोग झांसी आने के लिए निकले, इसी दौरान मीना सोनी की तबीयत खराब होने लगी। जिस पर सभी ने पहले ही जहर खिलाने की तैयारी कर रखी थी। जिसके चलते मीना को दवा के धोखे में जहर खिला दिया औैर कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। उसकी लाश को ठिकाने लगाने के लिए झांसी न आकर यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ चल दिए। यहां से आगरा व औरैया होते हुए कालपी में यमुना नदी के पुल पर पहुंचे। सुबह करीब 3.30 बजे लाश को यमुना नदी में फेंक दिया। कुछ देर में लाश पानी से दूर जाने के बाद सभी कार में सवार होकर झांसी आ गए। पूछताछ में आरोपी सर्वेश ने बताया कि लाश ठिकाने लगाने के लिए एक लाख पांच हजार रुपये में सौदा हुआ था। एडवांस में संजय ने पंद्रह हजार रुपये दिए थे, बाकी के 90 हजार झांसी आने के बाद मिले थे। सभी के हिस्से में बीस - बीस हजार के करीब रकम आई थी।
संजय पर दर्ज हैं पांच मुकदमे
कारोबारी संजय वर्मा पर नवाबाद थाने में पांच मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या और धोखाधड़ी के दो- दो व प्राण घातक हमले का एक मुकदमा शामिल है।
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पुलिस तालबेहट निवासी श्यामलता सोनी की पुत्री मीना सोनी की हत्या के मामले में पांच आरोपियों को पहले की गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि, कोतवाली क्षेत्र के वासुदेव मुहल्ला बड़ाबाजार निवासी कारोबारी संजय वर्मा की गिरफ्तारी होना बाकी रह गई थी। वह फरार चल रहा था। चूंकि, हत्याकांड के मामले में कारोबारी ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। इस कारण पुलिस कारोबारी को गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। लेकिन, शुक्रवार को पुलिस ने कारोबारी को धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में इलाइट चौराहे से गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस के अनुसार कारोबारी अपने व्यापार में आयकर और जीएसटी बचाने के लिए अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के खाते खुलवाने के बाद खुद ही उनका संचालन कर रहा था। इसी के तहत एक मामले में मीना सोनी के खाते में पैसा डालने के बाद वह अपने नौकर गौतम कुमार के खाते में स्थानांतरित कर दिए थे। इस बात की जानकारी नौकर को नहीं थी। विगत 23 मार्च 2019 को कारोबारी ने मीना सोनी को नई दिल्ली के अपोलो हास्पिटल के पास शराब की दुकान के पीछे जब अपने सहयोगियों के सुपुर्द किया था, उस वक्त मीना सोनी के चार एटीएम कारोबारी के पास ही थे। कारोबारी के पास से चारों एटीएम बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद कारोबारी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। वहीं, इस मामले में एसएसपी डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि मीना हत्याकांड में कारोबारी की गिरफ्तारी के लिए स्टे समाप्त कराने के खिलाफ आवेदन दे रखा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टे खत्म हो जाएगा।
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यह था मीना हत्याकांड
तालबेहट निवासी श्यामलता सोनी ने कोतवाली के वासुदेव मोहल्ला निवासी संजय वर्मा पर पुत्री का अपहरण कर दुबई ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले कारोबारी संजय वर्मा के चालक योगेश कुमार को पकड़ा था। उससे की गई पूछताछ में पता चला था कि संजय वर्मा ने उसे बताया था कि मीना को मारकर यमुना नदी में बहा दिया है। चालक को रिमांड पर लेने के बाद पुलिस टीम दिल्ली गई थी, जहां की गई पड़ताल के दौैरान पता चला था कि मीना सोनी की हत्या मेें संजय वर्मा के साथ और लोग भी शामिल थे। बाद में पुलिस ने कॉल रिकॉॅर्ड व अन्य सूत्रों की मदद से घटना में शामिल कोतवाली के डड़ियापुरा स्थित शिव परिवार कॉलोनी निवासी जितेंद्र राय, जालौन के राजेंद्र नगर निवासी नरेंद्र, बैंकर्स कॉलोनी निवासी सर्वेश कुमार और थाना सीपरी बाजार स्थित काशीराम कॉलोनी निवासी जयनारायण लिटौरिया को पकड़ लिया था।
पकड़े गए मुख्य आरोपी सर्वेश ने पूछताछ में बताया था कि संजय वर्मा ने मीना सोनी को मारकर लाश ठिकाने लगाने के लिए दिल्ली बुलाया था। उसने यह भी कहा कि दो तीन साथी भी मदद के लिए साथ ले आना, ताकि परेशानी न हो। उसने पहले जितेंद्र राय को बुलाया, उसके पास इनोवा गाड़ी थी। उसकी गाड़ी से ही दिल्ली जाने की योजना बनी। इसके लिए नरेंद्र व जयनारायण को भी साथ लेकर सभी 25 मार्च को दिल्ली पहुंचे। सभी लोग दिल्ली के पहाड़गंज स्थित एक हॉस्पिटल में रुके थे। अगले दिन 26 मार्च की रात करीब नौ बजे संजय वर्मा, मीना सोनी को लेकर अपोलो हॉस्पिटल के पीछे वाइन शॉॅप के पास आए, जहां मीना उनके साथ नशे की हालत में थी। इसके बाद संजय वर्मा ने उसे ठिकाने लगाने के लिए कहा। सभी लोग झांसी आने के लिए निकले, इसी दौरान मीना सोनी की तबीयत खराब होने लगी। जिस पर सभी ने पहले ही जहर खिलाने की तैयारी कर रखी थी। जिसके चलते मीना को दवा के धोखे में जहर खिला दिया औैर कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। उसकी लाश को ठिकाने लगाने के लिए झांसी न आकर यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ चल दिए। यहां से आगरा व औरैया होते हुए कालपी में यमुना नदी के पुल पर पहुंचे। सुबह करीब 3.30 बजे लाश को यमुना नदी में फेंक दिया। कुछ देर में लाश पानी से दूर जाने के बाद सभी कार में सवार होकर झांसी आ गए। पूछताछ में आरोपी सर्वेश ने बताया कि लाश ठिकाने लगाने के लिए एक लाख पांच हजार रुपये में सौदा हुआ था। एडवांस में संजय ने पंद्रह हजार रुपये दिए थे, बाकी के 90 हजार झांसी आने के बाद मिले थे। सभी के हिस्से में बीस - बीस हजार के करीब रकम आई थी।
संजय पर दर्ज हैं पांच मुकदमे
कारोबारी संजय वर्मा पर नवाबाद थाने में पांच मुकदमे दर्ज हैं। इसमें हत्या और धोखाधड़ी के दो- दो व प्राण घातक हमले का एक मुकदमा शामिल है।