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रद्दी के ढेर में पड़े मिले आरटीआई के तहत मांगी गई सूचनाओं के प्रार्थना पत्र
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ललितपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) का मखौल किस तरह से उड़ाया जा रहा है, इसका अंदाजा विकासखंड बार में लगाया जा सकता है। जी हां, ब्लॉक से भ्रष्टाचार से जुड़े प्रश्नों के समुचित उत्तर नहीं दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रश्नों से जुड़े प्रार्थना पत्र रद्दी में फेंक दिए जा रहे हैं। शनिवार को आरटीआई के प्रार्थना पत्र रद्दी में मिलने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। इस मनमानी की शिकायत जिलाधिकारी से की गई है।
विकासखंड के ग्राम गदयाना निवासी करन सिंह ने विगत 27 जुलाई को ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पर विकासकार्यों में घपलेबाजी का आरोप लगाते हुए जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचनाएं मांगी थीं। उन्होंने बीते चार वर्षों में हुए कार्यों की जानकारी मांगी थी। करन ने बताया कि उन्हें केवल वर्ष 2016-17 में कराए गए कार्यों की आधी-अधूरी जानकारी दी गई, वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के कार्यों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। शनिवार को जब वह ब्लाक पर ग्राम पंचायत सचिव से पूरी जानकारी मांगने गए तो ग्राम पंचायत अधिकारी नहीं मिले। इसी दरम्यान उनकी नजर ब्लाक परिसर के एक कोने में जमा रद्दी के ढेर पर पड़ी, जहां अन्य सरकारी दस्तावेजों के अलावा उनके प्रार्थना पत्र भी पड़े हुए थे। उन्होंने जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र के जरिये गांव में चौपाल लगाने और ग्राम विकास के कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
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विकासखंड के ग्राम गदयाना निवासी करन सिंह ने विगत 27 जुलाई को ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी पर विकासकार्यों में घपलेबाजी का आरोप लगाते हुए जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचनाएं मांगी थीं। उन्होंने बीते चार वर्षों में हुए कार्यों की जानकारी मांगी थी। करन ने बताया कि उन्हें केवल वर्ष 2016-17 में कराए गए कार्यों की आधी-अधूरी जानकारी दी गई, वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के कार्यों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। शनिवार को जब वह ब्लाक पर ग्राम पंचायत सचिव से पूरी जानकारी मांगने गए तो ग्राम पंचायत अधिकारी नहीं मिले। इसी दरम्यान उनकी नजर ब्लाक परिसर के एक कोने में जमा रद्दी के ढेर पर पड़ी, जहां अन्य सरकारी दस्तावेजों के अलावा उनके प्रार्थना पत्र भी पड़े हुए थे। उन्होंने जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र के जरिये गांव में चौपाल लगाने और ग्राम विकास के कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
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