फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   retreat labour work in field

गांवों से आ सकता है बड़ा खतरा, बाहर से लौटे मजदूर नहीं रुक रहे घरों में

Fri, 03 Apr 2020 06:00 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Apr 2020 06:00 PM IST
विज्ञापन
retreat labour work in field
retreat labour work in field
झांसी। अभी तक कोरोना के कहर से बच रहे गांवों पर भी खतरा मंडराने लगा है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पंजाब और हरियाणा से अपने घरों को लौटे मजदूर क्वारंटीन की सीमा रेखा लांघकर खेतों पर काम कर रहे हैं। गेहूं की कटाई की जा रही है। जबकि प्रशासन ने सभी को 14 दिन घरों पर रहने के लिए कहा था। इन सभी के घरों पर बाकायदा नोटिस भी चस्पा किया गया। वहीं मजदूरों का कहना है कि गेहूं की कटाई न करेंगे तो परिवार को कैसे पालेंगे। शहरों में काम बंद हो गया है तो कम से काम गांव में तो मजदूरी मिल रही है।
विज्ञापन

बुंदेलखंड से एक बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, ग्वालियर, पंजाब और हरियाणा जाते हैं। लॉकडाउन के बाद तमाम मजदूर अपने गांवों को लौट आए हैं। 20 हजार से भी ज्यादा मजदूर झांसी और आसपास के जिलों में पहुंचे हैं। प्रशासनिक टीमों ने स्क्रीनिंग करने के बाद सभी को उनके घरों पर रहने के लिए कहा था। अकेले मोंठ ब्लाक में ही 1283 मजदूरों को क्वारंटीन किया गया था। इसके साथ ही तालबेहट, बंगरा, महरौनी, गुरसराय में भी 800 से 500 मजदूरों को घरों पर ही रहने की सलाह दी गई थी। प्रशासन ने इनके घरों पर बाकायदा नोटिस भी चस्पा कर दिए थे लेकिन प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक तो यह लोग घरों में ही हैं लेकिन हकीकत में सभी घरों से बाहर हैं। सुबह ही मजदूरी के लिए गेहूं कटाई करने निकल जाते हैं। इनके घरों पर पोस्टर लगे हैं कि लोग इनसे दूरी बनाकर रखें लेकिन फिर भी ग्रामीण बेरोकटोक इनके पास आ जा रहे हैं। जब हमने मजदूरों से बात की तो प्रहलाद का कहना था कि वह दिल्ली में नौकरी करता था। वहां काम बंद हो गया है। अब गांव का ही सहारा है। गेहूं कटाई से मजदूरी मिल जाएगी तो परिवार की गुजर बसर होगी। ललितपुर निवासी सोहन सिंह ने बताया कि वह पंजाब से लौटा है। पूरी तरह से स्वस्थ है। लिहाजा घर में रहने से क्या फायदा। महरौनी के ललता प्रसाद ने बताया कि एक साल से दिल्ली में था लेकिन अब गांव में काम कर रहा है। बच्चों का पेट तो पालना ही है।
विज्ञापन

यह स्थिति तब है जब 10 में से 3 मजदूरों में संक्रमण की आशंका बताई गई है
झांसी। केंद्र सरकार खुद कह चुकी है कि बड़े शहरों से पलायन करने वाले हर दस मजदूरों में से तीन के करोना संक्रमित होने की आशंका है। सरकार ने कहा था कि अभी तक महामारी से अछूते गांवों पर भी खतरा है। इसके लिए इंतजाम किए गए हैं। बाहर से लौटे मजदूरों को गांवों में अपने घर में चौदह दिन एकांत में रहने को कहा गया है। लेकिन बुंदेलखंड के गांवों की तस्वीर एकदम उलट है। अब गेहूं की कटाई के लिए मजदूर घरों से निकल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed