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Jhansi News: टसर रेशम ककून की तेजी से बढ़ रही मांग

Sun, 21 Apr 2024 04:47 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 21 Apr 2024 04:47 AM IST
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Rapidly increasing demand for tussar silk cocoon
- खरीद करने के लिए आने लगे हैं पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, बंगलूरु, कर्नाटक आदि राज्यों के व्यापारी
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- हर साल पैदा हो रहे 20-21 लाख ककून से बन रहा 2333 रेशम
- जल्द मऊरानीपुर के बुखारा में 27 एकड़ जमीन पर होगी पैदावार

अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जिले के टसर रेशम ककून की कई राज्यों में मांग तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, बंगलूरु, कर्नाटक आदि के रेशम कारोबारी खरीद करने के लिए आने लगे हैं। हर साल 20-21 लाख ककून की पैदावार हो रही है, जिससे 2333 किलो रेशम बन रहा है। जल्द ही मऊरानीपुर के गांव बुखारा में 27 एकड़ में पैदावार शुरू होगी। रेशम विभाग ने जिला प्रशासन से 25 एकड़ और जमीन की मांग की है।
प्रदेश के सिर्फ सात जिलों में टसर रेशम ककून की पैदावार है जिसमें सर्वाधिक झांसी में होती है। सहायक निदेशक रेशम एके राव ने बताया कि यह पैदावार किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया है। साल में दोबार ककून बनता है, वह भी जुलाई से सितंबर और अक्तूबर से दिसंबर तक। पहली पैदावार 35-50 दिन और दूसरी 60-65 दिन में तैयार होती है। यह पैदावार ग्राम पंचायत पर करवाई जाती है। शासन की तरफ से किसानों को काफी सहूलियत भी मिलती है। उन्होंने बताया बबीना के गांव हिसौली व बदनपुर तथा कटेरा देहात में 200 एकड़ ग्राम पंचायत की जमीन पर किसानों द्वारा पैदावार की जा रही है। इससे 2333 किलो रेशम का धागा बन रहा है। चूंकि टसर रेशम ककून की पैदावार कम है, इसलिए कई राज्यों के व्यापारी अब सीधे खरीद करने के लिए आ रहे हैं। इसके चलते जल्द बुखारा में 27 एकड़ में इसकी पैदावार शुरू की जाएगी।
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0- यह होता है ककून
टसर ककून की पैदावार तभी संभव है जब अर्जुन का पेड़ होगा। रेशम पैदा करने वाली कीट को अर्जुन के पेड़ पर छोड़ा जाता है। यह कीट अपनी पूरी उम्र पूरी करने तक करीब 200 ग्राम अर्जुन की पत्तियां खाकर लार्वा से अपने लिए घर बनाना शुरू करता है। कीट के लार्वा से बने घर को ही ककून कहते हैं। ककून से ही मशीनें रेशम का धागा बनाती हैं।
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