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झांसी: दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- शारीरिक संबंध बनाने में नाबालिग की स्वीकृति महत्वहीन

Fri, 22 Apr 2022 12:48 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, झांसी
अमर उजाला ब्यूरो, झांसी Published by: सुशील कुमार Updated Fri, 22 Apr 2022 12:48 PM IST
सार

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अंजना ने कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने में नाबालिग की स्वीकृति महत्वहीन है।

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Rape accused bail plea rejected court said minor acceptance in having physical relationship is unimportant
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाने और उसके साथ रेप करने के आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। पीड़िता ने स्वेच्छा से जाने, शादी करने और अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाने के बयान दिए थे। इसी को आधार बनाते हुए आरोपी ने कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।

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विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अंजना ने कहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने में नाबालिग की स्वीकृति महत्वहीन है। आरोप की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने के पर्याप्त आधार नहीं है। इसलिए आरोपी की जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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सात माह से जेल में हैं आरोपी
जनपद के एक गांव निवासी महिला ने टोडीफतेहपुर थाना में तहरीर दी थी कि 18 मार्च 2021 की रात करीब 12 बजे उसकी बेटी बाथरूम करने के लिए मकान के बाहर गई थी। बाहर टहरौली निवासी जीतू, वीरेंद्र और प्रमोद कार लेकर खड़े थे। बेटी को बहला-फुसलाकर कार में बैठाकर ले गए। पुलिस ने केस दर्ज करके वीरेंद्र पुत्र भज्जू को गिरफ्तार किया था। 6 सितंबर 2021 से आरोपी जेल में बंद है। पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 363, 366 और पॉक्सो एक्ट की धारा के तहत कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में आरोपी नामजद है। उस पर पीड़िता को भगा ले जाने, उसके साथ शादी करने व रेप करने का आरोप है। पीड़िता ने अपने बयान में आरोपी के साथ स्वेच्छा से जाने, शादी करने और अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाने का कथन किया है। वह अगर आरोपी के साथ अपनी मर्जी से गई थी, तो भी उसके अपनी मर्जी से जाने या न जाने से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती, क्योंकि वह घटना के समय नाबालिग थी। नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाने में नाबालिग की स्वीकृति महत्वहीन है। अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी को जमानत प्रदान किए जाने का आधार पर्याप्त नहीं है। इसलिए आरोपी वीरेंद्र की जमानत याचिका खारिज की जाती है।

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