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हनुमान जी लाये संजीवनी बूटी, राम दल में छाया उत्साह
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सदर बाजार की रामलीला में लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेकर पहुंचे हनुमान। अमर उजाला
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हनुमान जी लाये संजीवनी बूटी, राम दल में छाया उत्साह
झांसी। रविवार को सदर बाजार की श्रीराम लीला के मंचन में लक्ष्मण और मेघनाद के बीच घनघोर युद्ध होता है। लक्ष्मण घायल होकर मुर्छित हो जाते हैं। हनुमान जी लक्ष्मण जी को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाते हैं, जिससे लक्ष्मण जी स्वस्थ हो जाते हैं। वहीं, श्रीराम हनुमान जी को गले लगा लेते हैं।
मंचन में रावण अंगद के संधि प्रस्ताव को ठुकरा देता है। इसके बाद राम और रावण की सेनाओं के बीच जबरदस्त युद्ध होता है। कई योद्धा मारे जाते हैं। मेघनाद युद्ध में ब्रह्मा द्वारा प्रदान की गई वीर घातनी शक्ति का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण मुर्छित हो जाते हैं। जामवंत की प्रेरणा से हनुमान जी हवा से बातें करते हुए द्रोणगिरी पर्वत पहुंचते हैं। रास्ते में रावण का भेजा हुआ कालनेमी उनका रास्ता रोकता है, लेकिन वह मारा जाता है। वहीं, संजीवनी की पहचान न होने पर हनुमान जी समूचा पर्वत ही उखाड़ लाते हैं। संजीवनी बूटी पर्वत को लाते देख राम दल में उत्साह छा जाता है। संजीवनी बूटी लक्ष्मण जी को पिलायी जाती है। इससे वह तुरंत स्वस्थ हो जाते हैं। मंचन में अर्पित मुखरैया ने श्रीराम की, कृष्णा पांडेय ने लक्ष्मण की, अंश तिवारी ने भरत की, रमाशंकर रावत ने हनुमान की, राजू मिश्रा ने रावण की, ऋषभ यादव ने मेघनाद की, एनडी सेन ने कालनेमी की, प्रशांत ने जामवंत की, हरीमोहन दुबे ने विभीषण की भूमिका निभायी। निर्देशन शांतनू पांडेय ने किया। इस अवसर पर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष विकास खत्री, नरेंद्र कौशिक, गगन जैन, श्याम बिहारी मुखरैया, अजय कक्कड़, अर्जुन यादव, कोमल चंद्र जैन, कमलेश खरे, राकेश शर्मा, विजय पटैरिया आदि मौजूद रहे।
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झांसी। रविवार को सदर बाजार की श्रीराम लीला के मंचन में लक्ष्मण और मेघनाद के बीच घनघोर युद्ध होता है। लक्ष्मण घायल होकर मुर्छित हो जाते हैं। हनुमान जी लक्ष्मण जी को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाते हैं, जिससे लक्ष्मण जी स्वस्थ हो जाते हैं। वहीं, श्रीराम हनुमान जी को गले लगा लेते हैं।
मंचन में रावण अंगद के संधि प्रस्ताव को ठुकरा देता है। इसके बाद राम और रावण की सेनाओं के बीच जबरदस्त युद्ध होता है। कई योद्धा मारे जाते हैं। मेघनाद युद्ध में ब्रह्मा द्वारा प्रदान की गई वीर घातनी शक्ति का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण मुर्छित हो जाते हैं। जामवंत की प्रेरणा से हनुमान जी हवा से बातें करते हुए द्रोणगिरी पर्वत पहुंचते हैं। रास्ते में रावण का भेजा हुआ कालनेमी उनका रास्ता रोकता है, लेकिन वह मारा जाता है। वहीं, संजीवनी की पहचान न होने पर हनुमान जी समूचा पर्वत ही उखाड़ लाते हैं। संजीवनी बूटी पर्वत को लाते देख राम दल में उत्साह छा जाता है। संजीवनी बूटी लक्ष्मण जी को पिलायी जाती है। इससे वह तुरंत स्वस्थ हो जाते हैं। मंचन में अर्पित मुखरैया ने श्रीराम की, कृष्णा पांडेय ने लक्ष्मण की, अंश तिवारी ने भरत की, रमाशंकर रावत ने हनुमान की, राजू मिश्रा ने रावण की, ऋषभ यादव ने मेघनाद की, एनडी सेन ने कालनेमी की, प्रशांत ने जामवंत की, हरीमोहन दुबे ने विभीषण की भूमिका निभायी। निर्देशन शांतनू पांडेय ने किया। इस अवसर पर कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष विकास खत्री, नरेंद्र कौशिक, गगन जैन, श्याम बिहारी मुखरैया, अजय कक्कड़, अर्जुन यादव, कोमल चंद्र जैन, कमलेश खरे, राकेश शर्मा, विजय पटैरिया आदि मौजूद रहे।
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