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मंदिर निर्माण के आंदोलन झांसी का जन - जन बना था सहभागी
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ram mandir nirman movement
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झांसी। अयोध्या में राम जन्म भूमि पर पांच अगस्त को मंदिर का भूमि पूजन होने जा रहा है। मंदिर निर्माण के लिए नब्बे के दशक में हुए आंदोलन में झांसी बड़ा केंद्र बनकर उभरा था। यहां हफ्तों बाहर से आए हजारों कार सेवकों का जमावड़ा बना रहा था, जिनके भोजन की व्यवस्था महानगर के घर-घर से हुई थी। किसी घर से राशन जाता था तो किसी घर से पका हुआ भोजन उपलब्ध कराता था। इसके जरिये लोगों ने मंदिर निर्माण के आंदोलन में अपनी भूमिका दर्ज कराई थी।
सन 1990 में दक्षिण के राज्यों से अयोध्या जा रहे हजारों को कारसेवकों को ट्रेनों से झांसी में उतार लिया गया था। लगभग नब्बे हजार कार सेवकों को यहां रोक लिया गया था। ऐसे में मंदिर निर्माण के आंदोलन में शामिल संगठनों के स्थानीय पदाधिकारियों ने कार सेवकों को यहां लक्ष्मी व्यायाम मंदिर, बुंदेलखंड महाविद्यालय व आर्य कन्या कॉलेज में ठहराया गया था। हजारों की संख्या में मौजूद इन कारसेवकों को भोजन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती थी। लेकिन, इस काम के लिए पूरा महानगर आगे आ गया था। कार सेवक भूखे न रहें, इसके लिए घर-घर से राशन, पका हुआ भोजन भेजा जाता था। हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर ये सामग्री एकत्र करते थे। लोग खुशी-खुशी उन्हें ये सामग्री उपलब्ध कराते थे।
राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ-साथ शहर के आम आदमी भी कार सेवकों की सेवा में जुट गए थे। जिससे जो बन पड़ता था, वो कार सेवकों के लिए भेज देता था। झांसी के लोगों के इस जज्बे कार सेवक बहुत खुश हुए थे। यही वजह है कि जाते समय उन्होंने ये नारा ‘कार्यकर्ता कैसा हो, झांसी वालों जैसा हो’ लगाया था।
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- डॉ. चंद्रकांत अवस्थी, तत्कालीन नगर संयोजक - बजरंग दल
उस समय पूरा झांसी राम मंदिर निर्माण के आंदोलन का सहभागी बन गया था। कार सेवकों के लिए व्यवस्थाएं जुटाकर लोग मंदिर निर्माण के आंदोलन में अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे थे। लोगों का अलग ही उत्साह था। घर में महिलाएं कार सेवकों के लिए भोजन पकाती थीं और युवाओं की टोलियां उन तक ये पहुंचाती थीं। हर ओर जय-जय श्रीराम के नारों की गूंज सुनाई देती थी।
- भगवत पोरवाल, तत्कालीन विभाग संगठन मंत्री - विश्व हिंदू परिषद
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सन 1990 में दक्षिण के राज्यों से अयोध्या जा रहे हजारों को कारसेवकों को ट्रेनों से झांसी में उतार लिया गया था। लगभग नब्बे हजार कार सेवकों को यहां रोक लिया गया था। ऐसे में मंदिर निर्माण के आंदोलन में शामिल संगठनों के स्थानीय पदाधिकारियों ने कार सेवकों को यहां लक्ष्मी व्यायाम मंदिर, बुंदेलखंड महाविद्यालय व आर्य कन्या कॉलेज में ठहराया गया था। हजारों की संख्या में मौजूद इन कारसेवकों को भोजन उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती थी। लेकिन, इस काम के लिए पूरा महानगर आगे आ गया था। कार सेवक भूखे न रहें, इसके लिए घर-घर से राशन, पका हुआ भोजन भेजा जाता था। हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर ये सामग्री एकत्र करते थे। लोग खुशी-खुशी उन्हें ये सामग्री उपलब्ध कराते थे।
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राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ-साथ शहर के आम आदमी भी कार सेवकों की सेवा में जुट गए थे। जिससे जो बन पड़ता था, वो कार सेवकों के लिए भेज देता था। झांसी के लोगों के इस जज्बे कार सेवक बहुत खुश हुए थे। यही वजह है कि जाते समय उन्होंने ये नारा ‘कार्यकर्ता कैसा हो, झांसी वालों जैसा हो’ लगाया था।
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- डॉ. चंद्रकांत अवस्थी, तत्कालीन नगर संयोजक - बजरंग दल
उस समय पूरा झांसी राम मंदिर निर्माण के आंदोलन का सहभागी बन गया था। कार सेवकों के लिए व्यवस्थाएं जुटाकर लोग मंदिर निर्माण के आंदोलन में अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे थे। लोगों का अलग ही उत्साह था। घर में महिलाएं कार सेवकों के लिए भोजन पकाती थीं और युवाओं की टोलियां उन तक ये पहुंचाती थीं। हर ओर जय-जय श्रीराम के नारों की गूंज सुनाई देती थी।
- भगवत पोरवाल, तत्कालीन विभाग संगठन मंत्री - विश्व हिंदू परिषद