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रेलवे ट्रैक पर जानवरों को आने से रोकेगी दीवार
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झांसी। अब रेलवे ट्रैक पर आने वाले जानवरों को रोकने के लिए दीवार बनाने की तैयारी है। रेल प्रशासन ने शुरूआत में मंडल के चार सेक्शनों को चिह्नित किया है, जहां दीवार बनाकर जानवरोें को रेल ट्रैक पर आने से रोका जाएगा। दीवार तीन फिट ऊंची बनाई जाएगी।
नई दिल्ली से कटरा के बीच चलने वाली हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की तरह अन्य ट्रैकों पर भी रेलवे बोर्ड तेज गति वाली गाड़ियां दौड़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आरडीएसओ के अफसर लगातार अलग- अलग ट्रैकों की पटरियों की जांच कर रहे हैं। आरडीएसओ के अधिकारी मंडल के धौलपुर से झांसी और झांसी से बीना सेक्शन में लगातार हाई स्पीड ट्रेन दौड़ाकर ट्रायल कर रहे हैं। अधिकांश सुपरफास्ट ट्रेनों को 130 किलोमीटर प्रति घंटा से दौड़ाना भी शुरू कर दिया गया है। आरडीएसओ के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हाई स्पीड ट्रेनें दौड़ाने के लिए पटरियां तो ठीक हैं, मगर पटरी पर जानवर कब आ जाए? इसका कोई भरोसा नहीं है। इसलिए जब तक पटरियों को सुरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक हाई स्पीड ट्रेन नहीं दौड़ाई जा सकती है।
दरअसल, इसका कारण यहां पटरियों पर घूमने वाले छुट्टा जानवर हैं। पटरियों के आसपास बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण जानवर पटरी पर आ जाते हैं। इनमें अधिकांश वृद्ध जानवर होते हैं, जो अब किसान के लिए किसी काम के नहीं रहते हैं। एक जनवरी से अभी तक 135 से अधिक जानवर ट्रेन से कट चुके हैं। इससे हर समय रेल हादसे का डर बना रहता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए रेल प्रशासन अब जिन स्थानों पर ज्यादा जानवर कटते हैं, वहां पर दीवार बनाने जा रहा है। इनमें ग्वालियर से धौलपुर, झांसी से दतिया, झांसी से बबीना और ललितपुर से दैलवारा सेक्शन शामिल हैं।
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इस प्रयास का नहीं हो रहा असर
दिल्ली- मुंबई मुख्य ट्रैक पर झांसी रेल मंडल के अंतर्गत धौलपुर से झांसी व झांसी से आगासौद तक का सेक्शन आता है। यहां हर महीने ट्रेनों से 200 से 300 जानवर कटने का आंकड़ा रहता है। अक्सर जानवर का मांस इंजन में फंसने से वह खराब हो जाते हैं। इससे कई ट्रेनें लेट हो जातीं हैं। पटरियों पर जानवर न जाएं, इसके लिए आरपीएफ आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाती रहती है, लेकिन घटनाएं कम नहीं हो ही हैं।
पटरियों पर जानवर कटने की बड़ी समस्या है। एक बार ट्रेन रुकने पर पूरा संचालन प्रभावित होता है। यही कारण है कि कभी भी ट्रेनों का समय पालन 100 प्रतिशत नहीं हो पाता है। मंडल के चार सेक्शन चिह्नित किए गए हैं, जहां सबसे ज्यादा जानवर कटते हैं। इन सेक्शनों में पटरियों के पास दीवार बनाने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। कई जगह सीमेंट के स्लीपर व अन्य बैरिकेडिंग लगाए जा रहे हैं।
- संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक
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नई दिल्ली से कटरा के बीच चलने वाली हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की तरह अन्य ट्रैकों पर भी रेलवे बोर्ड तेज गति वाली गाड़ियां दौड़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आरडीएसओ के अफसर लगातार अलग- अलग ट्रैकों की पटरियों की जांच कर रहे हैं। आरडीएसओ के अधिकारी मंडल के धौलपुर से झांसी और झांसी से बीना सेक्शन में लगातार हाई स्पीड ट्रेन दौड़ाकर ट्रायल कर रहे हैं। अधिकांश सुपरफास्ट ट्रेनों को 130 किलोमीटर प्रति घंटा से दौड़ाना भी शुरू कर दिया गया है। आरडीएसओ के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हाई स्पीड ट्रेनें दौड़ाने के लिए पटरियां तो ठीक हैं, मगर पटरी पर जानवर कब आ जाए? इसका कोई भरोसा नहीं है। इसलिए जब तक पटरियों को सुरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक हाई स्पीड ट्रेन नहीं दौड़ाई जा सकती है।
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दरअसल, इसका कारण यहां पटरियों पर घूमने वाले छुट्टा जानवर हैं। पटरियों के आसपास बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण जानवर पटरी पर आ जाते हैं। इनमें अधिकांश वृद्ध जानवर होते हैं, जो अब किसान के लिए किसी काम के नहीं रहते हैं। एक जनवरी से अभी तक 135 से अधिक जानवर ट्रेन से कट चुके हैं। इससे हर समय रेल हादसे का डर बना रहता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए रेल प्रशासन अब जिन स्थानों पर ज्यादा जानवर कटते हैं, वहां पर दीवार बनाने जा रहा है। इनमें ग्वालियर से धौलपुर, झांसी से दतिया, झांसी से बबीना और ललितपुर से दैलवारा सेक्शन शामिल हैं।
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इस प्रयास का नहीं हो रहा असर
दिल्ली- मुंबई मुख्य ट्रैक पर झांसी रेल मंडल के अंतर्गत धौलपुर से झांसी व झांसी से आगासौद तक का सेक्शन आता है। यहां हर महीने ट्रेनों से 200 से 300 जानवर कटने का आंकड़ा रहता है। अक्सर जानवर का मांस इंजन में फंसने से वह खराब हो जाते हैं। इससे कई ट्रेनें लेट हो जातीं हैं। पटरियों पर जानवर न जाएं, इसके लिए आरपीएफ आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाती रहती है, लेकिन घटनाएं कम नहीं हो ही हैं।
पटरियों पर जानवर कटने की बड़ी समस्या है। एक बार ट्रेन रुकने पर पूरा संचालन प्रभावित होता है। यही कारण है कि कभी भी ट्रेनों का समय पालन 100 प्रतिशत नहीं हो पाता है। मंडल के चार सेक्शन चिह्नित किए गए हैं, जहां सबसे ज्यादा जानवर कटते हैं। इन सेक्शनों में पटरियों के पास दीवार बनाने का काम जल्द शुरू किया जाएगा। कई जगह सीमेंट के स्लीपर व अन्य बैरिकेडिंग लगाए जा रहे हैं।
- संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक