हरकत में आया रेल प्रशासन, पानी भर के खड़े किए टैंकर
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सियासी चश्मा लगने के बाद आंखों का पानी मर जाना कोई बड़ी बात नहीं है। बुंदेलखंड की सूखी धरती पर इन दिनों पानी को लेकर जो बेपानी सियासत की जा रही है, उसने राजनीति बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए जिस तरह रतलाम से खाली टैंकर भेजे गए, उस पर तमाशा तो खूब हो ही रहा है रेलवे की भी किरकिरी हो रही है। शुक्रवार को रेल प्रशासन ने किरकिरी से बचने के लिए खाली दस टैंकरों को पानी से भर लिया। इस मशक्कत में बारह घंटे से अधिक समय लग गया। इस बीच प्लेटफार्म पांच पर ट्रेनों को नहीं लाया जा सका। अभी कहीं से मांग न आने के कारण टैंकरों को रेलवे यार्ड में खड़ा कर दिया गया है।
बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्र महोबा में पानी पहुंचाने के लिए रतलाम से भेजे गए खाली टैंकरों को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी शुक्रवार यह मुद्दा राज्यसभा में उठाया। रेल प्रशासन भी जवाब देते- देते परेशान हो गया है। इस कारण शुक्रवार की सुबह चार बजे से ही झांसी स्टेशन पर टैंकरों को पानी से भरने का काम शुरू कर दिया गया। पहले सभी दस टैंकरों का रैक प्लेटफार्म छह (बांदा साइडिंग) पर लगाया गया। मगर, प्रेशर कम मिलने के कारण दो टैंकरों को छोड़ बाकी सभी दुबारा यार्ड में खड़े कर दिए गए। इसके बाद प्लेटफार्म पांच पर तीन टैंकरों को लाकर पानी भरने का काम शुरू किया गया।
चूंकि, टैंकरों के साथ ही प्लेटफार्म पर आ रही ट्रेनों में भी पानी भरना था। इस कारण पानी का प्रेशर कम होने से एक टैंकर को भरने में पांच से छह घंटे का समय लग गया। तीन टैंकरों के भरने के बाद बाकी को प्लेटफार्म पांच पर लाकर भरा गया। बाद में सभी भरे टैंकरों को यार्ड में खड़ा कर दिया गया। हालांकि, रेल प्रशासन ने अभी साफ नहीं किया है कि भरे हुए टैंकरों को कहां भेजा जाएगा। मालूम हो कि, पेयजल संकटग्रस्त महोबा क्षेत्र के लिए पानी के टैंकर भेजे गए थे, मगर जिलाधिकारी महोबा ने अभी टैंकर लेने से मना कर रखा है।
‘रेलवे ने टैंकरों को पानी से भरकर अपनी तैयारी पूरी कर ली है। अब जहां से भी मांग आएंगी, वहां टैंकरों को भेज दिया जाएगा।’
गिरीश कंचन
जनसंपर्क अधिकारी।
ओएचई बंद करके भरे गए टैंकर
रेलवे प्लेटफार्म पांच व बांदा साइडिंग में बने प्लेटफार्म छह पर पानी के टैंकरों को भरने के दौरान संबंधित प्लेटफार्म की ओएचई (ओवर हैड इलेक्ट्रिक) लाइन को बंद रखा गया। चूंकि, प्लेटफार्म चार व पांच पर भोपाल व इलाहाबाद की तरफ से आने वाली सभी डाउन मार्ग की ट्रेनों को लाया जाता है। ओएचई बंद होने के कारण सभी गाड़ियां एक- एक कर प्लेटफार्म चार पर लायी गई। इससे कई ट्रेनों का समय पालन प्रभावित रहा।
रेलवे के एक टैंकर की क्षमता 70 हजार लीटर की है। इस हिसाब से शुक्रवार को दस टैंकरों में सात लाख लीटर पानी भरा गया। झांसी रेलवे स्टेशन पर जब एक- दो ही ट्रेनों का संचालन होता था। उस समय अंग्रेजों ने वर्ष 1906 में स्टेशन से छह किलोमीटर दूर गढ़िया डैम का निर्माण कराया था। अंग्रेजों की दूरदर्शिता से आज इस डैम का पूरा लाभ झांसी स्टेशन को मिल रहा है। झांसी स्टेशन से प्रतिदिन औसतन डेढ़ सौ सवारी गाड़ियां गुजरती है। इनमें सौ से अधिक गाड़ियों में झांसी स्टेशन पर पानी भरा जाता है। डैम से आने वाले पानी का शोधन करने के लिए वर्कशाप के निकट प्लांट बना हुआ है। इस प्लांट से पूर्व व पश्चिमी रेलवे कॉलोनी व रेलवे स्टेशन को पानी की सप्लाई दी जाती है।
स्टेशन पर जिन हाइड्रेंट की मदद से कोचों में पानी भरा जाता है, वह 57 हजार लीटर की पानी की टंकी से जुड़े हुए हैं। एक कोच की चार टंकियों को भरने के लिए 18 सौ लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है। इस हिसाब से एक ट्रेन के सभी कोचों को भरने के लिए कम से कम 45 हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। गर्मियों में एक ट्रेन में कम से कम 30 हजार लीटर पानी तो भरना ही पड़ता है। टंकी खाली होने पर उसे दोबारा भरने में पंद्रह मिनट से आधे घंटे का समय लग जाता है।