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तीन सौ साल पुराने स्वरूप में नजर आएगा रघुनाथ राव महल, पुरातत्व विभाग ने शुरू की तैयारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Updated Mon, 29 Oct 2018 01:24 AM IST
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रघुनाथ राव महल
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तीन सौ साल पुराने रघुनाथ राव महल के दिन फिरने की आस जगी है। पुरातत्व विभाग ने इस प्राचीन धरोहर को उसका पुराना स्वरूप लौटाने की तैयारी कर ली है। इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है, जिसमें दो करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
झांसी में मराठा राज्य का सूर्यास्त होने के साथ रघुनाथ राव महल वीरान हो गया। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। आजाद हिंदुस्तान में भी ये महल उपेक्षित पड़ा रहा। इसी का नतीजा रहा कि महल के इर्दगिर्द घनी बस्ती बस गई। यहां तक कि महल की जमीन पर भी कब्जे हो गए और एक पूरा का पूरा मुहल्ला बस गया।
हालांकि, दो दशक पहले राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में लिया था, लेकिन ये संरक्षण सिर्फ कागजों में ही सीमित रहा। धरातल पर महल को बचाने के कोई उपाय नहीं किए गए। लगातार उपेक्षित होने की वजह से महल की दीवारें और छत दरकती चलीं गईं। अब अवशेष नाम पर सिर्फ खंडहर ही बाकी हैं। लेकिन, अपनी अद्भुत बनावट की वजह से ये भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
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अब जाकर पुरातत्व विभाग ने इस पुरातात्विक धरोहर की सुध ली है। पुरातत्व विभाग ने इसका प्राचीन स्वरूप लौटाने की तैयारी की है। महल का जीर्णोद्धार कर ठीक वैसा ही बनाया जाएगा, जैसा वो तीन सौ साल पहले था। महल के खंडहरों की सहायता से विशेषज्ञ इस काम को अंजाम देंगे। विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार इस काम पर दो करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया। इसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
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झांसी में मराठा राज्य का सूर्यास्त होने के साथ रघुनाथ राव महल वीरान हो गया। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। आजाद हिंदुस्तान में भी ये महल उपेक्षित पड़ा रहा। इसी का नतीजा रहा कि महल के इर्दगिर्द घनी बस्ती बस गई। यहां तक कि महल की जमीन पर भी कब्जे हो गए और एक पूरा का पूरा मुहल्ला बस गया।
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हालांकि, दो दशक पहले राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में लिया था, लेकिन ये संरक्षण सिर्फ कागजों में ही सीमित रहा। धरातल पर महल को बचाने के कोई उपाय नहीं किए गए। लगातार उपेक्षित होने की वजह से महल की दीवारें और छत दरकती चलीं गईं। अब अवशेष नाम पर सिर्फ खंडहर ही बाकी हैं। लेकिन, अपनी अद्भुत बनावट की वजह से ये भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
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अब जाकर पुरातत्व विभाग ने इस पुरातात्विक धरोहर की सुध ली है। पुरातत्व विभाग ने इसका प्राचीन स्वरूप लौटाने की तैयारी की है। महल का जीर्णोद्धार कर ठीक वैसा ही बनाया जाएगा, जैसा वो तीन सौ साल पहले था। महल के खंडहरों की सहायता से विशेषज्ञ इस काम को अंजाम देंगे। विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार इस काम पर दो करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया। इसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
दो गार्ड भी मांगे
पुरातात्विक धरोहर रघुनाथ राव महल की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। यही वजह है कि महल के परिसर में लोग बेरोकटोक प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा छुट्टा जानवरों का भी जमघट लगा रहता है। इससे यहां भारी गंदगी जमा है। महल परिसर में प्रवेश करते ही लोग बदबू की वजह से नाक भौंह सिकोड़ने लगते हैं। साथ ही, देखरेख न होने की वजह से असामाजिक तत्व भी यहां डेरा जमाए रहते हैं। इससे निपटने के लिए पुरातत्व विभाग ने शासन से महल की सुरक्षा के लिए दो गार्डों की भी मांग की है।
झांसी राज्य की शान था
रघुनाथ राव महल शहर की घनी आबादी के बीच नई बस्ती में स्थित पुरातात्विक धरोहर है। इसका निर्माण वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के पति गंगाधर राव के बड़े भाई रघुनाथ राव ने सत्रहवीं शताब्दी में कराया था। उन्हीं के नाम पर इसे रघुनाथ राव महल के नाम से जाना जाता है। ढाई एकड़ के क्षेत्रफल में फैला ये महल उस समय झांसी की शान ओ शौकत का प्रतीक हुआ करता था। ये मराठा स्थापत्य कला शैली की मिसाल माना जाता है।
रघुनाथ राव महल महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्मारक है। इसमें मराठा स्थापत्य शैली देखने को मिलती है। इसके महत्व को देखते हुए इसके जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई है। इस पर दो सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है, जिसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है।
- डॉ. एस के दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
पुरातात्विक धरोहर रघुनाथ राव महल की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। यही वजह है कि महल के परिसर में लोग बेरोकटोक प्रवेश कर जाते हैं। इसके अलावा छुट्टा जानवरों का भी जमघट लगा रहता है। इससे यहां भारी गंदगी जमा है। महल परिसर में प्रवेश करते ही लोग बदबू की वजह से नाक भौंह सिकोड़ने लगते हैं। साथ ही, देखरेख न होने की वजह से असामाजिक तत्व भी यहां डेरा जमाए रहते हैं। इससे निपटने के लिए पुरातत्व विभाग ने शासन से महल की सुरक्षा के लिए दो गार्डों की भी मांग की है।
झांसी राज्य की शान था
रघुनाथ राव महल शहर की घनी आबादी के बीच नई बस्ती में स्थित पुरातात्विक धरोहर है। इसका निर्माण वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के पति गंगाधर राव के बड़े भाई रघुनाथ राव ने सत्रहवीं शताब्दी में कराया था। उन्हीं के नाम पर इसे रघुनाथ राव महल के नाम से जाना जाता है। ढाई एकड़ के क्षेत्रफल में फैला ये महल उस समय झांसी की शान ओ शौकत का प्रतीक हुआ करता था। ये मराठा स्थापत्य कला शैली की मिसाल माना जाता है।
रघुनाथ राव महल महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्मारक है। इसमें मराठा स्थापत्य शैली देखने को मिलती है। इसके महत्व को देखते हुए इसके जीर्णोद्धार की योजना बनाई गई है। इस पर दो सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है, जिसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है।
- डॉ. एस के दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी