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रेडियो ने भी बदला अपना स्टाइल, ब्लूटूथ और पेन ड्राइव से कनेक्ट होने लगे
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झांसी। एक समय था कि रेडियो के लोग दीवाने हुआ करते थे। जिनके घर में बड़ा रेडियो होता था उसे धनाड्य माना जाता था। शादी में जिस दूल्हे को ससुराल से रेडियो दिया जाता था, उसकी शादी की चर्चा दूर तक कई दिनों तक होती रहती थी। भले ही बदलते दौर में मोबाइल हर जेब में बज रहा है लेकिन रेडियो के दीवाने भी खत्म नहीं हुए हैं। चूंकि रेडियो बनाने वाली कंपनियों ने बदलते दौर में रेडियो का स्टाइल भी बदल दिया है इससे आज मार्केट में ब्लूटूथ और मोबाइल से कनेक्ट होने वाले रेडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं।
हर साल 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने की शुरूआत 2012 में की गई थी। झांसी में रेडियो की बात करें तो कभी मानिक चौक में इसकी सात-आठ दुकानें हुआ करती थीं। धीरे-धीरे कलर टीवी के बाद मोबाइल क्रांति आई तो रेडियो का चलन कम होने लगा और दुकानें धीरे-धीरे बंद होने लगीं। ऐसे में अधिकांश दुकानें बंद हो गईं। कई दुकानदारों ने रेडियो का काम बिल्कुल कम कर दिया और दूसरे इलेक्ट्रानिक आइटम जैसे टीवी, फ्रिज, मोबाइल, वाशिंग मशीन आदि का कारोबार शुरू कर दिया। उधर, एंड्रायड मोबाइल के चलते रेडियो के शौकीन बिल्कुल ही कम हो गए। मानिक चौक के रेडियो कारोबारी सैफ अली खान बताते हैं कि इधर कोरोना काल के दौरान मार्केट में लेटेस्ट डिजायन और ब्लूटूथ व पैन ड्राइव से कनेक्ट होने वाले रेडियो आने से बिक्री फिर से ठीक होने लगी है। महीने में 30-35 लेटेस्ट रेडियो बिकने लगे हैं। दुकानदार घनश्याम कुमार ने बताया कि लेटेस्ट रेडियो की बिक्री ही अधिक है। साधारण रेडियो बहुत ही कम पसंद किए जा रहे हैं।
रेडियो अब कम ही लोग खरीदते हैं लेकिन पैन ड्राइव वाले रेडियो जब से मार्केट में आए हैं लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।
ग्यासी लाल-दुकानदार, मोबाइल मार्केट
--
बुजुर्गों के अलावा युवा भी नए रेडियो पसंद कर रहे हैं। इनमें मोबाइल से कनेक्ट कर मनचाहे गीत भी सुन सकते हैं।
उपेंद्र-दुकानदार-मानिक चौक
झांसी आकाशवाणी में आरंभ में पांच किलोवॉट का ट्रांसफार्मर था। वर्ष 2019 में इसकी क्षमता दस किलोवॉट की हो गई। जिससे इसे तकरीबन 80 किलोमीटर तक सुना जा सकता है। झांसी में लोकल कार्यक्रम रेडियो पर सुनने वाले बढ़े हैं, लेकिन 15 फरवरी से स्थानीय प्रसारण के समय में कमी की जा रही है। विविध भारती के प्रसारण का समय बढ़ाया जाएगा।
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कुंजबिहारी-निदेशक, आकाशवाणी केंद्र- झांसी
1936 में सरकारी इंपीरियल रेडियो ऑफ इंडिया की शुरूआत हुई थी
झांसी। ऐसा माना जाता है कि रेडियो की शुरूआत कनाडा के वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने 24 दिसंबर 1906 को रेडियो प्रसारण कर की थी। जिसके बाद 1918 में ली द फोरेस्ट ने न्यूयार्क के हाई ब्रिज क्षेत्र में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरू किया था। लेकिन पुलिस ने इसे अवैध करार देकर बंद करवा दिया। भारत में वर्ष 1936 में सरकारी इंपीरियल रेडियो ऑफ इंडिया की शुरूआत हुई थी। जो आजादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो आकाशवाणी बन गया। सुभाषचंद्र बोस ने नवंबर 1941 में रेडियो पर जर्मनी से भारतवासियों को संबोधित किया था।
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हर साल 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने की शुरूआत 2012 में की गई थी। झांसी में रेडियो की बात करें तो कभी मानिक चौक में इसकी सात-आठ दुकानें हुआ करती थीं। धीरे-धीरे कलर टीवी के बाद मोबाइल क्रांति आई तो रेडियो का चलन कम होने लगा और दुकानें धीरे-धीरे बंद होने लगीं। ऐसे में अधिकांश दुकानें बंद हो गईं। कई दुकानदारों ने रेडियो का काम बिल्कुल कम कर दिया और दूसरे इलेक्ट्रानिक आइटम जैसे टीवी, फ्रिज, मोबाइल, वाशिंग मशीन आदि का कारोबार शुरू कर दिया। उधर, एंड्रायड मोबाइल के चलते रेडियो के शौकीन बिल्कुल ही कम हो गए। मानिक चौक के रेडियो कारोबारी सैफ अली खान बताते हैं कि इधर कोरोना काल के दौरान मार्केट में लेटेस्ट डिजायन और ब्लूटूथ व पैन ड्राइव से कनेक्ट होने वाले रेडियो आने से बिक्री फिर से ठीक होने लगी है। महीने में 30-35 लेटेस्ट रेडियो बिकने लगे हैं। दुकानदार घनश्याम कुमार ने बताया कि लेटेस्ट रेडियो की बिक्री ही अधिक है। साधारण रेडियो बहुत ही कम पसंद किए जा रहे हैं।
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रेडियो अब कम ही लोग खरीदते हैं लेकिन पैन ड्राइव वाले रेडियो जब से मार्केट में आए हैं लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।
ग्यासी लाल-दुकानदार, मोबाइल मार्केट
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बुजुर्गों के अलावा युवा भी नए रेडियो पसंद कर रहे हैं। इनमें मोबाइल से कनेक्ट कर मनचाहे गीत भी सुन सकते हैं।
उपेंद्र-दुकानदार-मानिक चौक
झांसी आकाशवाणी में आरंभ में पांच किलोवॉट का ट्रांसफार्मर था। वर्ष 2019 में इसकी क्षमता दस किलोवॉट की हो गई। जिससे इसे तकरीबन 80 किलोमीटर तक सुना जा सकता है। झांसी में लोकल कार्यक्रम रेडियो पर सुनने वाले बढ़े हैं, लेकिन 15 फरवरी से स्थानीय प्रसारण के समय में कमी की जा रही है। विविध भारती के प्रसारण का समय बढ़ाया जाएगा।
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कुंजबिहारी-निदेशक, आकाशवाणी केंद्र- झांसी
1936 में सरकारी इंपीरियल रेडियो ऑफ इंडिया की शुरूआत हुई थी
झांसी। ऐसा माना जाता है कि रेडियो की शुरूआत कनाडा के वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने 24 दिसंबर 1906 को रेडियो प्रसारण कर की थी। जिसके बाद 1918 में ली द फोरेस्ट ने न्यूयार्क के हाई ब्रिज क्षेत्र में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरू किया था। लेकिन पुलिस ने इसे अवैध करार देकर बंद करवा दिया। भारत में वर्ष 1936 में सरकारी इंपीरियल रेडियो ऑफ इंडिया की शुरूआत हुई थी। जो आजादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो आकाशवाणी बन गया। सुभाषचंद्र बोस ने नवंबर 1941 में रेडियो पर जर्मनी से भारतवासियों को संबोधित किया था।