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Jhansi News: पशुओं को गर्मी से बचाएं, दिन में पांच बार पानी पिलाएं
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गर्मियों में पशुओं की देखभाल करने की सलाह दी है। वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. प्रमोद कुमार सोनी ने बताया कि खेती किसानी में पशुधन की सुरक्षा जरूरी है। यह समय रबी की फसलों दलहन, तिलहन, गेहूं की कटाई का है और तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है। ऐसे में पशुओं में पानी व नमक की कमी, भूख कम होना एवं कम दूध उत्पादन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इसलिए पशुओं को गर्मी से बचाने का प्रयास करें। वैज्ञानिकों ने कहा कि दुधारू पशुओं को दोपहर से शाम पांच बजे तक छाया वाले तथा हवादार स्थान पर आराम करने दें। पशुओं को दिन में चार से पांच बार पानी पिलाने का प्रयास करें। थनैला रोग की पहचान और रोकथाम के उपाय करें। गाभिन पशुओं को प्रोटीनयुक्त आहार दें। चारे के लिए बोई गई मक्का, बाजरा एवं ज्वार की कटाई 45 से 50 दिन में करें। पशुओं की देखभाल करते हुए मास्क का प्रयोग तथा हाथों की साबुन से नियमित धुलाई करें।
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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गर्मियों में पशुओं की देखभाल करने की सलाह दी है। वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. प्रमोद कुमार सोनी ने बताया कि खेती किसानी में पशुधन की सुरक्षा जरूरी है। यह समय रबी की फसलों दलहन, तिलहन, गेहूं की कटाई का है और तापमान बढ़ना शुरू हो जाता है। ऐसे में पशुओं में पानी व नमक की कमी, भूख कम होना एवं कम दूध उत्पादन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इसलिए पशुओं को गर्मी से बचाने का प्रयास करें। वैज्ञानिकों ने कहा कि दुधारू पशुओं को दोपहर से शाम पांच बजे तक छाया वाले तथा हवादार स्थान पर आराम करने दें। पशुओं को दिन में चार से पांच बार पानी पिलाने का प्रयास करें। थनैला रोग की पहचान और रोकथाम के उपाय करें। गाभिन पशुओं को प्रोटीनयुक्त आहार दें। चारे के लिए बोई गई मक्का, बाजरा एवं ज्वार की कटाई 45 से 50 दिन में करें। पशुओं की देखभाल करते हुए मास्क का प्रयोग तथा हाथों की साबुन से नियमित धुलाई करें।