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जेल में कोरोना फैलने से बंदी खौफजदा, उड़ी नींद
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prisnors awe
झांसी। जिला कारागार में 127 बंदियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद से अन्य बंदी खौफजदा हो गए हैं। 450 की क्षमता वाली जेल में 1100 सौ से अधिक बंदी होने के कारण सभी को कोरोना का डर सताने लगा है। आलम यह है कि कोरोना की सुनकर बंदी अब बैरकों से भी निकलने में कतरा रहे हैं। हालांकि, अफसर जेल को कोरोना मुक्त कराने में जुट गए हैं।
पिछले बृहस्पतिवार को अचानक जिला कारागार के 127 बंदियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। डीआईजी जेल ने भी जेल पहुंचकर डेरा डाल लिया है। बृहस्पतिवार से ही वह व्यवस्थाओं पर नजर रखे हुए हैं। जेल के अंदर से लेकर बाहर का कोना-कोना सैनिटाइज किया जा रहा है। प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ भेजी जा रही है।
वर्तमान में जिला कारागार की क्षमता 450 कैदियों की है, लेकिन 1100 से अधिक बंदी हैं। ऐसे में दो गुना से अधिक कैदी होने के कारण जेल प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। मानक के अनुरूप स्टाफ की कमी और क्षमता से ज्यादा बंदी-कैदियों के होने की वजह से जेल की सुरक्षा को भी खतरा बना रहता है। पिछले दो महीने पहले जेल की संख्या 1200 से अधिक थी, लेकिन कई बंदियों की जेल ट्रांसफर भी की गई थी। इसी बीच कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच कई बंदियों को पैरोल पर भी छोड़ा जा चुका है। अब अचानक जेल में लगातार बंदी संक्रमित होने के बाद बंदियों में खौफ का माहौल है।
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व्यवस्था ठीक रखने की बनी रहती चुनौती
क्षमता से ज्यादा बंदियों और कैदियों का बोझ ढो रही जिला जेल में संगीन धाराओं के कैदी भी बंद हैं। ऐसे में सीमित सुरक्षा संसाधनों के बीच इनकी सुरक्षा और निगरानी में जेल प्रशासन के चुनौती भरा होता है। यह गैंग न बना लें, इसको लेकर भी अलग से टीम नजर बनाए रखती है। इसके अलावा, कैदियों से मुलाकात करने वालों की संख्या भी अधिक होने के कारण जेल प्रशासन परेशान रहता है।
अस्थायी जेल में भी हैं करीब 70 बंदी
कोरोना के बढ़ती संख्या के बीच हाफिज सिद्दीकी नेशनल इंटर कॉलेज को भी अस्थायी जेल में तब्दील किया गया था। जेल में पहुंचने से पहले बंदी की जांच होने के दौरान उसको अस्थायी जेल में रखा जाता है। वर्तमान में करीब 70 बंदी इस अस्थायी जेल में हैं। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही सभी को जिला कारागार भेजा जाएगा।
बंदियों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद दिन रात जेल को सैनिटाइज किया जा रहा है। बंदियों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए अलग से निर्देश जारी किए गए हैं।
राजीव शुक्ला, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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पिछले बृहस्पतिवार को अचानक जिला कारागार के 127 बंदियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। डीआईजी जेल ने भी जेल पहुंचकर डेरा डाल लिया है। बृहस्पतिवार से ही वह व्यवस्थाओं पर नजर रखे हुए हैं। जेल के अंदर से लेकर बाहर का कोना-कोना सैनिटाइज किया जा रहा है। प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार कर लखनऊ भेजी जा रही है।
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वर्तमान में जिला कारागार की क्षमता 450 कैदियों की है, लेकिन 1100 से अधिक बंदी हैं। ऐसे में दो गुना से अधिक कैदी होने के कारण जेल प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। मानक के अनुरूप स्टाफ की कमी और क्षमता से ज्यादा बंदी-कैदियों के होने की वजह से जेल की सुरक्षा को भी खतरा बना रहता है। पिछले दो महीने पहले जेल की संख्या 1200 से अधिक थी, लेकिन कई बंदियों की जेल ट्रांसफर भी की गई थी। इसी बीच कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच कई बंदियों को पैरोल पर भी छोड़ा जा चुका है। अब अचानक जेल में लगातार बंदी संक्रमित होने के बाद बंदियों में खौफ का माहौल है।
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व्यवस्था ठीक रखने की बनी रहती चुनौती
क्षमता से ज्यादा बंदियों और कैदियों का बोझ ढो रही जिला जेल में संगीन धाराओं के कैदी भी बंद हैं। ऐसे में सीमित सुरक्षा संसाधनों के बीच इनकी सुरक्षा और निगरानी में जेल प्रशासन के चुनौती भरा होता है। यह गैंग न बना लें, इसको लेकर भी अलग से टीम नजर बनाए रखती है। इसके अलावा, कैदियों से मुलाकात करने वालों की संख्या भी अधिक होने के कारण जेल प्रशासन परेशान रहता है।
अस्थायी जेल में भी हैं करीब 70 बंदी
कोरोना के बढ़ती संख्या के बीच हाफिज सिद्दीकी नेशनल इंटर कॉलेज को भी अस्थायी जेल में तब्दील किया गया था। जेल में पहुंचने से पहले बंदी की जांच होने के दौरान उसको अस्थायी जेल में रखा जाता है। वर्तमान में करीब 70 बंदी इस अस्थायी जेल में हैं। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही सभी को जिला कारागार भेजा जाएगा।
बंदियों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद दिन रात जेल को सैनिटाइज किया जा रहा है। बंदियों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए अलग से निर्देश जारी किए गए हैं।
राजीव शुक्ला, वरिष्ठ जेल अधीक्षक