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देश की सबसे बड़ी नैरोगेज लाइन के विदाई की तैयारी
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झांसी। देश की सबसे बड़ी नैरोगेज लाइन ग्वालियर-श्योपुर रेल मार्ग के विदाई की तैयारी है। इस रेल लाइन को अब ब्राडगेज में बदला जाएगा। ब्राडगेज में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर हो चुका। इस प्रोजेक्ट में कुल 3712 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां जमीन समतलीकरण समेत अन्य कार्य आरंभ करा दिए गए हैं।
झांसी मंडल के अंतर्गत आने वाले ग्वालियर-शिवपुरी सेक्शन में इसकी शुरूआत वर्ष 1889 में हुई। इसके बाद यह रेल लाइन ग्वालियर से श्योपुर कलां तक पहुंची। रेल अफसरों के मुताबिक इसका निर्माण तत्कालीन सिंधिया शासक माधवराव सिंधिया के समय में हुआ। आश्चर्य की बात यह कि करीब 132 वर्ष पुराना होने के बावजूद इस ट्रैक पर रेलगाड़ी चलती है। दो सौ किलोमीटर लंबी यह रेललाइन देश की सबसे लंबी नैरोलाइन है। इस ट्रैक की चौड़ाई दो फीट है। यह रेल लाइन शहर के बीचों-बीच से गुजरती है। कई जगह पर रेल लाइन के करीब ही लोगों ने घर भी बनवा लिए हैं। रेल प्रशासन अब इसकी जगह ब्राडगेज बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कुल 3712 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसकी मदद से पटरियों को चौड़ी करके के साथ इस रुट पर सिग्नलिंग का काम भी नए सिरे से कराया जाएगा। जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह के मुताबिक बजट स्वीकृत हो गया है। जमीन समतलीकरण समेत अन्य कार्य भी शुरू करा दिए गए हैं। रेल लाइन के ब्राडगेज लाइन में बदल जाने से यहां रेल की रफ्तार तेज हो सकेगी।
कोरोना काल के बाद दुबारा पटरी पर नहीं लौटी ट्रेन
इस रेल लाइन पर पिछले करीब डेढ़ साल से रेल संचालन बंद है। पिछले वर्ष कोरोना काल के दौरान इस पर रेल संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इसी अभी दुबारा शुरू नहीं किया गया है। इसके पहले यहां पर रोजाना करीब आठ हजार यात्री सफर करते थे।
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यह होती है नैरोगेज रेल लाइन
रेलवे के मानक के मुताबिक नैरोगेज वह रेलट्रैक होता है जिसकी चौड़ाई 1435 मिमी होती है। मानक के मुताबिक इसकी चौड़ाई चार फीट साढ़े आठ इंच की होती है। कम चौड़ाई होने की वजह से इस पर ट्रेन अधिक रफ्तार से नहीं दौड़ पातीं। देश की अधिकांश रेल पटरियां अब ब्राड गेज में तब्दील हो चुकी हैं। इनकी चौड़ाई पांच फीट से अधिक होती है। इस पर ट्रेन अपनी क्षमता के साथ दौड़ सकती हैं।
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झांसी मंडल के अंतर्गत आने वाले ग्वालियर-शिवपुरी सेक्शन में इसकी शुरूआत वर्ष 1889 में हुई। इसके बाद यह रेल लाइन ग्वालियर से श्योपुर कलां तक पहुंची। रेल अफसरों के मुताबिक इसका निर्माण तत्कालीन सिंधिया शासक माधवराव सिंधिया के समय में हुआ। आश्चर्य की बात यह कि करीब 132 वर्ष पुराना होने के बावजूद इस ट्रैक पर रेलगाड़ी चलती है। दो सौ किलोमीटर लंबी यह रेललाइन देश की सबसे लंबी नैरोलाइन है। इस ट्रैक की चौड़ाई दो फीट है। यह रेल लाइन शहर के बीचों-बीच से गुजरती है। कई जगह पर रेल लाइन के करीब ही लोगों ने घर भी बनवा लिए हैं। रेल प्रशासन अब इसकी जगह ब्राडगेज बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कुल 3712 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसकी मदद से पटरियों को चौड़ी करके के साथ इस रुट पर सिग्नलिंग का काम भी नए सिरे से कराया जाएगा। जनसंपर्क अधिकारी मनोज सिंह के मुताबिक बजट स्वीकृत हो गया है। जमीन समतलीकरण समेत अन्य कार्य भी शुरू करा दिए गए हैं। रेल लाइन के ब्राडगेज लाइन में बदल जाने से यहां रेल की रफ्तार तेज हो सकेगी।
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कोरोना काल के बाद दुबारा पटरी पर नहीं लौटी ट्रेन
इस रेल लाइन पर पिछले करीब डेढ़ साल से रेल संचालन बंद है। पिछले वर्ष कोरोना काल के दौरान इस पर रेल संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इसी अभी दुबारा शुरू नहीं किया गया है। इसके पहले यहां पर रोजाना करीब आठ हजार यात्री सफर करते थे।
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यह होती है नैरोगेज रेल लाइन
रेलवे के मानक के मुताबिक नैरोगेज वह रेलट्रैक होता है जिसकी चौड़ाई 1435 मिमी होती है। मानक के मुताबिक इसकी चौड़ाई चार फीट साढ़े आठ इंच की होती है। कम चौड़ाई होने की वजह से इस पर ट्रेन अधिक रफ्तार से नहीं दौड़ पातीं। देश की अधिकांश रेल पटरियां अब ब्राड गेज में तब्दील हो चुकी हैं। इनकी चौड़ाई पांच फीट से अधिक होती है। इस पर ट्रेन अपनी क्षमता के साथ दौड़ सकती हैं।