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पारीछा की राख, दूसरों को दे रही लाभ

Sun, 12 May 2019 01:16 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Sun, 12 May 2019 01:16 AM IST
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paricha power plant fly ash profit to other person
parichha power plant - फोटो : demo
झांसी। पारीछा थर्मल पावर प्लांट को फिलहाल नए ऐश डैम (राख) की आवश्यकता नहीं है। पिछले एक साल में प्लांट से निकली राख का नब्बे फीसदी हिस्सा लोग ईंट, खदान भरने व अन्य कामों के लिए मुफ्त में उठा ले गए। इसके अलावा सीमेंट के एपेक्स बनाने वाली कंपनियों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की योजना फेल होने के बाद प्लांट प्रशासन ने यह कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट के एश डैम भरने से कोयले की राख के बगल से गुजरने वाली बेतवा नदी में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्लांट प्रशासन ने इस चुनौती से निपटने के लिए राख के नए बांध बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए प्लांट से सटे ग्राम गुलारा, महेबा व मुराटा की 572 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जानी थी। मगर, पर्यावरण विभाग के मंजूरी देने से इंकार करने पर पिछले साल यह योजना फेल हो गई। इसके बाद प्लांट प्रशासन ने राख को ठिकाने लगाने के लिए विकल्प तलाशना शुरू किए। राख के प्रयोग के पर्चे बंटवाए। खदानों को भरने, इंटरलॉकिंग टाइल्स और एपेक्स बनाने वाली कंपनियों से भी राख लेने के लिए संपर्क किया गया। नतीजतन इस बार 90 फीसदी राख को लोग अपने कार्यों के लिए उठा ले गए। मालूम हो कि पारीछा प्लांट के सभी ऐश डैम भर चुके हैं और उनको ऊंचा करके राख को एकत्रित किया जा रहा है।
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अभी सीमेंट समेत 17 फैक्ट्रियों को निशुल्क राख दी जा रही है। लोग जमीन व खदानों को भरने, एपेक्स बनाने के लिए निशुल्क राख ले जा रहे हैं। इस बार नब्बे फीसदी राख को लोग ले गए। फिलहाल ऐश डैम की जरूरत नहीं है। - जीपी वर्मा, मुख्य महाप्रबंधक पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
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यह है एश डैम की क्षमता
प्लांट में 110 की दो, 210 की दो और 250 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। राख के भंडारण के लिए पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट और 210 मेगावाट के दो-दो राख के बांध बने हैं। पारीछा थर्मल पावर प्लांट में चार एश डैम बने हैं। प्रत्येक डैम की क्षमता 50 लाख टन की है। हर महीने पांच से छह लाख टन राख प्लांट से निकलती है।


मुफ्त में उपलब्ध है प्लांट की राख
पारीछा पावर प्लांट में निकली राख मुफ्त में उपलब्ध है। इससे ईंट, एपेक्स और सजावटी सामान बनाकर पैसा कमा सकते हैं। प्लांट के विशेषज्ञ अधिकारियों का दावा है कि इस राख का जैविक खाद के साथ उपयोग करके कृषि उपज बढ़ाई जा सकती है। प्लांट प्रशासन ने निशुल्क राख देकर उसके इस्तेमाल पर जोर दे रहा है।

ये हैं सरकारी आदेश
- सभी अभिकरण, व्यक्ति या संगठन निचले क्षेत्रों के भूमि भराव कोयला की राख से करेंगे।
- कोई भी व्यक्ति मिट्टी के ईंटों का निर्माण कम से कम 50 प्रतिशत कोयला राख के बिना नहीं करेगा।
- सड़कों, फ्लाईओवर पुलों के निर्माण में सभी संस्थाएं कोयला राख का उपयोग करेंगी।
- मनरेगा, पीएमजीएसवाई, अर्बन रूरल हाउसिंग, स्वच्छ भारत अभियान और अन्य संचालित निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों का प्रयोग अनिवार्य है।
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