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पंचायत चुनाव के इम्तिहान में भाजपा के विधायक फेल

Wed, 05 May 2021 01:07 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 May 2021 01:07 AM IST
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panchyat chunav me vidhyak fail
झांसी। पंचायत चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव का रिहर्सल माना जा रहा है। लेकिन, घोषित परिणामों ने भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिला पंचायत की 24 सीटों में से भाजपा महज नौ पर ही जीत दर्ज कर पाई है। तीनों ग्रामीण विधानसभाओं की आठ-आठ सीटों में से भाजपा के खाते में महज तीन-तीन सीटें ही गईं हैं।
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प्रदेश और देश की राजनीति की दिशा और दशा ग्रामीण मतदाता तय करते हैं। भाजपा की केंद्र और प्रदेश में सरकार बनाने में ग्रामीणों की बड़ी भूमिका रही है। जिले की तीनों ग्रामीण क्षेत्र की विधानसभा गरौठा, मऊरानीपुर व बबीना पर भाजपा के ही विधायक हैं। ऐसे में प्रदेश के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए पंचायत चुनाव को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी खासी उत्साहित थी। चौपालों की सियासत के जरिये भाजपा की ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी जमीन और भी मजबूत करने की तैयारी थी। लेकिन, चुनाव परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। भाजपा ने जिला पंचायत की सभी 24 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। प्रत्याशियों के नामों की घोषणा प्रदेश नेतृत्व के द्वारा की गई थी। लेकिन, इनमें से नौ पर ही भाजपा जीत हासिल कर सकी है। तीनों विधानसभाओं की आठ-आठ सीटों में से भाजपा की झोली में तीन-तीन सीटें आईं हैं। मऊरानीपुर विधानसभा में भाजपा ने वार्ड नंबर 13 (सकरार), वार्ड 16 (भदरवारा) व वार्ड 17 (स्यावरी) में जीत हासिल की है। गरौठा विधानसभा की वार्ड एक (पूंछ), वार्ड तीन (भरोसा) तथा वार्ड 22 (ककरबई) को जीतने में भाजपा कामयाब रही है। जबकि, बबीना विधानसभा में आने वाली वार्ड आठ (फुटेरा बरुआसागर), वार्ड नौ (रक्सा) व वार्ड 12 (बबीना रूरल) में ही भाजपा जीत हासिल करने में कामयाब हुई है। साफ जाहिर है कि भाजपा तीनों विधानसभाओं में आधे से कम सीट हासिल कर पाई है। हालांकि, विधायक इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि पिछले पंचायत चुनाव में भाजपा को चौबीस में से महज चार सीटें ही हासिल हुईं थीं। जबकि, इस बार दोगुनी आठ सीटें मिली हैं। कई सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी बेहद करीबी वोटों के अंतर से हारी है। पंचायत चुनाव से जाहिर होता कि ग्रामीण इलाकों में भाजपा सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी है।
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इस पंचायत चुनाव में भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में उभरकर सामने आई है। जबकि, सपा को जनता ने नकार दिया है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पहले भाजपा की बबीना विधानसभा में महज एक सीट थी, ये बढ़कर तीन हो गई हैं। जबकि, सपा छह सीटों पर काबिज थी और इस चुनाव में एक पर सिमट गई है। इसके अलावा भाजपा तीन सीटों पर बेहद करीबी अंतर से हारी है।
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- राजीव सिंह पारीछा, विधायक बबीना
गरौठा विधानसभा में पिछले पंचायत चुनाव में भाजपा ने तीन सीटों पर दर्ज की थी। इस चुनाव में भी भाजपा के खाते में तीन सीटें आईं हैं। इसके अलावा कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर भाजपा प्रत्याशी बेहद करीबी अंतर से हारे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि साकिन सीट पर महज 32 वोट से भाजपा हारी है। इसमें भी एक कर्मचारी की गड़बड़ी सामने आई है। भाजपा के वोटों में भारी वृद्धि हुई है।
- जवाहर लाल राजपूत, विधायक गरौठा
पिछले पंचायत चुनाव में मऊरानीपुर में भाजपा के पास एक भी सीट नहीं थी, लेकिन इस चुनाव में जिला पंचायत के तीन सदस्य जीतकर आए हैं। ये दर्शाता है कि ग्रामीण राजनीति में भाजपा की जमीन मजबूत हुई है। वोटों का प्रतिशत भी बढ़ा है। इसके अलावा पंचायत के चुनाव में राष्ट्रीय या प्रदेशीय मुद्दे हावी नहीं होते। ये चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं। बावजूद, भाजपा की ग्रामीण राजनीति में दखल बढ़ी है।
- बिहारी लाल आर्य, विधायक मऊरानीपुर
सपा की हालत हुई पतली
झांसी। ग्रामीण राजनीति में समाजवादी पार्टी का इकतरफा बोलबाला रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 2015 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के जिला पंचायत के 24 में से 16 सदस्य थे। सदन में पूर्ण बहुमत के बूते पर पार्टी ने आसानी से अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बना लिया था। इतना ही नहीं, प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद बुंदेलखंड के सभी जिलों में सपा के जिला पंचायत अध्यक्षों की कुर्सी चली गई थी, लेकिन झांसी इसमें अपवाद बना रहा। सदन में सदस्यों की संख्या बहुमत से कहीं अधिक होने की वजह से सपा पूरे पांच साल जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रही। लेकिन, संपन्न हुए पंचायत चुनाव में सपा की हालत पतली हो गई है। सपा 16 सीटों से गिरकर चार पर पहुंच गई है।

समाजवादी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी भले ही चार जीतकर आए हों, परंतु चार सीटें ऐसी हैं, जिन पर सपा के ही लोग जीते हैं। इन सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की थी। इसके अलावा दो अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों से भी सपा का तालमेल है। ये स्थिति तब है कि जब मतदान से लेकर मतगणना तक भाजपा के इशारे पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र ही चौबीस घंटे बाद मुश्किल से दिए गए। ग्रामीण मतदाताओं ने भाजपा को नकार दिया है, जबकि सपा पकड़ कायम है।
- डा. चंद्रपाल सिंह यादव, पूर्व सांसद
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