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ऑक्सीजन न मिलने से थमे एंबुलेंस के पहिए, चार गुने दामों पर मिल रहे सिलेंडर
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oxigen cylender over rate charge
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झांसी। जिले में ऑक्सीजन की कमी की समस्या से नर्सिंगहोमों के साथ-साथ निजी एंबुलेंस चालकों को भी दो-चार होना पड़ रहा है। भरा हुआ ऑक्सीजन सिलेंडर न मिल पाने की वजह से लगातार दौड़ने वाली कई एंबुलेंसों के पहिए थम गए हैं। एक-एक सिलेंडर के लिए एंबुलेंस चालकों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जिनको सिलेंडर मिल भी रहा है, उनको चार गुने दाम देने पड़ रहे हैं।
कोरोना वायरस के दौर में ऑक्सीजन की खपत काफी बढ़ गई है। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीज लगातार मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो रहे हैं। सांस लेने की तकलीफ होने पर उन्हें कई-कई दिनों तक ऑक्सीजन पर रखना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में स्थापित लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से मिलने वाली ऑक्सीजन भी कम पड़ रही है। इस वजह से ऑक्सीजन की बाहर से भी खरीद करनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज में सप्लाई बढ़ने की वजह से निजी अस्पतालों की मांग के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पा रही है।
नर्सिंगहोमों को ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले झांसी के सप्लायरों का भी कहना है कि उनके पास मांग के अनुसार ऑक्सीजन नहीं आ पा रही है। ऐसे में नर्सिंगहोमों के साथ-साथ एबुलेंस चालक भी ऑक्सीजन की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। उनको भी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। निजी एंबुलेंस कर्मचारी राजू ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से ऑक्सीजन मिलने में काफी समस्या आने लगी है। सभी निजी एंबुलेंस को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। जो मिल भी रही हैं वो भी कई गुने दामों पर।
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दामों में इतना अंतर आया
सौ प्रेशर वाला जो सिलेंडर कोरोना के दौर के पहले 120 रुपये में मिल जाता था, वो अब 500 रुपये में मिल रहा है। इसके लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक सिलेंडर से लगभग सौ किलोमीटर तक ऑक्सीजन लगातार एंबुलेंस मरीज को ले जाती है।
रोज औसतन दस मरीज होते रेफर
झांसी से ग्वालियर, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर समेत विभिन्न महानगरों के लिए औसतन दस मरीज रोजाना रेफर किए जाते हैं। मौजूदा समय में जिन एंबुलेंस चालक को ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जा रहा है, वो मरीजों को लेकर जा रहे हैं। जिनको नहीं मिल पाता, वो नहीं जा पाते हैं।
अधिक दामों पर ऑक्सीजन देने की शिकायत मिलने पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सभी को पर्याप्त आपूर्ति देने को लेकर विक्रेताओं के साथ बैठक की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।
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कोरोना वायरस के दौर में ऑक्सीजन की खपत काफी बढ़ गई है। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीज लगातार मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो रहे हैं। सांस लेने की तकलीफ होने पर उन्हें कई-कई दिनों तक ऑक्सीजन पर रखना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में स्थापित लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से मिलने वाली ऑक्सीजन भी कम पड़ रही है। इस वजह से ऑक्सीजन की बाहर से भी खरीद करनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज में सप्लाई बढ़ने की वजह से निजी अस्पतालों की मांग के अनुसार ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पा रही है।
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नर्सिंगहोमों को ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले झांसी के सप्लायरों का भी कहना है कि उनके पास मांग के अनुसार ऑक्सीजन नहीं आ पा रही है। ऐसे में नर्सिंगहोमों के साथ-साथ एबुलेंस चालक भी ऑक्सीजन की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। उनको भी ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। निजी एंबुलेंस कर्मचारी राजू ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से ऑक्सीजन मिलने में काफी समस्या आने लगी है। सभी निजी एंबुलेंस को ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। जो मिल भी रही हैं वो भी कई गुने दामों पर।
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दामों में इतना अंतर आया
सौ प्रेशर वाला जो सिलेंडर कोरोना के दौर के पहले 120 रुपये में मिल जाता था, वो अब 500 रुपये में मिल रहा है। इसके लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक सिलेंडर से लगभग सौ किलोमीटर तक ऑक्सीजन लगातार एंबुलेंस मरीज को ले जाती है।
रोज औसतन दस मरीज होते रेफर
झांसी से ग्वालियर, दिल्ली, लखनऊ, कानपुर समेत विभिन्न महानगरों के लिए औसतन दस मरीज रोजाना रेफर किए जाते हैं। मौजूदा समय में जिन एंबुलेंस चालक को ऑक्सीजन सिलेंडर मिल जा रहा है, वो मरीजों को लेकर जा रहे हैं। जिनको नहीं मिल पाता, वो नहीं जा पाते हैं।
अधिक दामों पर ऑक्सीजन देने की शिकायत मिलने पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सभी को पर्याप्त आपूर्ति देने को लेकर विक्रेताओं के साथ बैठक की जाएगी। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक।