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पारीछा प्लांट के लिए सिर्फ एक दिन के कोयले का हो सका इंतजाम
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झांसी। पारीछा थर्मल पावर प्लांट के लिए सिर्फ एक दिन के कोयले का ही इंतजाम हो पाया है। संयंत्र की चारों इकाइयों के संचालन के लिए रोजाना तीन रैक कोयले की खपत होती है, जबकि सोमवार को सिर्फ एक रैक ही मिली है। कोयले की कमी की वजह से प्लांट में बिजली उत्पादन घटकर आधा रह गया है।
कानपुर रोड स्थित पारीछा थर्मल पावर प्लांट में चार इकाइयों के जरिये प्रतिदिन 920 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से शनिवार को 250 मेगावाट की एक इकाई को बंद कर दिया गया था और इसके बाद रविवार को 210 मेगावाट की एक इकाई और बंद करनी पड़ गई। 250 और 210 मेगवाट की एक-एक इकाई से ही 460 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इन्हें चलाने के लिए भी सोमवार शाम तक का ही कोयला बचा था। लेकिन, सोमवार देर शाम एक रैक (मालगाड़ी) कोयला प्लांट को मिल गया। ये धनबाद से आया है, जिससे दो इकाइयां निर्बाध रूप से एक दिन और चलती रहेंगी। हालांकि, प्लांट पर संकट बरकरार है। विदित हो कि प्लांट की चारों इकाइयों को चलाने के लिए रोजाना तीन-चार रैक कोयले की खपत होती है। जबकि, सोमवार को केवल एक रैक ही मिला है। जल्द ही और कोयला न मिलने पर विद्युत उत्पादन ठप हो सकता है।
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कानपुर रोड स्थित पारीछा थर्मल पावर प्लांट में चार इकाइयों के जरिये प्रतिदिन 920 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से शनिवार को 250 मेगावाट की एक इकाई को बंद कर दिया गया था और इसके बाद रविवार को 210 मेगावाट की एक इकाई और बंद करनी पड़ गई। 250 और 210 मेगवाट की एक-एक इकाई से ही 460 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इन्हें चलाने के लिए भी सोमवार शाम तक का ही कोयला बचा था। लेकिन, सोमवार देर शाम एक रैक (मालगाड़ी) कोयला प्लांट को मिल गया। ये धनबाद से आया है, जिससे दो इकाइयां निर्बाध रूप से एक दिन और चलती रहेंगी। हालांकि, प्लांट पर संकट बरकरार है। विदित हो कि प्लांट की चारों इकाइयों को चलाने के लिए रोजाना तीन-चार रैक कोयले की खपत होती है। जबकि, सोमवार को केवल एक रैक ही मिला है। जल्द ही और कोयला न मिलने पर विद्युत उत्पादन ठप हो सकता है।
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