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20 लाख की आबादी के लिए सिर्फ 30 यूनिट ब्लड
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only 30 unit blood remain for 20 lac population
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झांसी। कोरोना वायरस के चलते पिछले लगभग दो महीने से लगे लॉकडाउन के कारण शिविरों का आयोजन नहीं हो पा रहा है। इस वजह से सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक में खून का जबरदस्त टोटा हो गया है। स्थिति ये है कि 20 लाख की आबादी में सिर्फ 30 यूनिट ब्लड ही बचा है। अगर अलग-अलग ब्लड ग्रुपों की बात करें तो लगभग चार से पांच यूनिट ही रक्त बचा है।
चाहें जिला अस्पताल हो या मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक सामान्य दिनों में यहां 50 से 60 यूनिट ब्लड की उपलब्धता रहती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंक समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन कराती रहती हैं। वहीं, स्वयं सेवी संगठन, विभिन्न संस्थान भी शिविरों का आयोजन कर रक्तकोष के लिए रक्तदान करते रहते हैं। कोरोना वायरस की वजह से मार्च के अंतिम सप्ताह से देश भर में लॉकडाउन है। इस कारण बेवजह लोगों के घरों से बाहर निकलने पर रोक है। वहीं, लगातार कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से भी लोग रक्तदान करने से कतरा रहे हैं। इस कारण सरकारी अस्पतालों के रक्तकोष में ब्लड की कमी हो गई है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में सात यूनिट रक्त बचा हुआ है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में 23 यूनिट रक्त है। कुल मिलाकर 20 लाख की झांसी की आबादी के लिए सरकारी चिकित्सालयों की रक्तकोषों में सिर्फ 30 यूनिट ब्लड ही उपलब्ध है। वहीं, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमसी वर्मा का कहना है कि जो लोग रक्तदान करने के इच्छुक हैं, वो सोशल डिस्टेंसिंग समेत विभिन्न नियमों का पालन करते हुए ब्लडबैंक आकर रक्तदान कर सकते हैं।
नहीं लगती है प्रोसेसिंग फीस
जो मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती होते हैं, उनको रक्त की आवश्यकता पड़ने पर सरकारी रक्तकोषों से ब्लड लेने पर प्रोसेसिंग फीस नहीं लगती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह राहत भरा होती है।
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निजी रक्तकोष वसूलते मनमाना शुल्क
सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक में रक्त नहीं मिलने पर जब मरीज निजी रक्तकोष में जाता है तो उससे मनमाना शुल्क वसूला जाता है। ऐसे में ज्यादातर मरीजों की निर्भरता सरकारी चिकित्सालयों के रक्तकोष पर रहती है।
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चाहें जिला अस्पताल हो या मेडिकल कॉलेज की ब्लड बैंक सामान्य दिनों में यहां 50 से 60 यूनिट ब्लड की उपलब्धता रहती है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंक समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन कराती रहती हैं। वहीं, स्वयं सेवी संगठन, विभिन्न संस्थान भी शिविरों का आयोजन कर रक्तकोष के लिए रक्तदान करते रहते हैं। कोरोना वायरस की वजह से मार्च के अंतिम सप्ताह से देश भर में लॉकडाउन है। इस कारण बेवजह लोगों के घरों से बाहर निकलने पर रोक है। वहीं, लगातार कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से भी लोग रक्तदान करने से कतरा रहे हैं। इस कारण सरकारी अस्पतालों के रक्तकोष में ब्लड की कमी हो गई है। मौजूदा समय में जिला अस्पताल में सात यूनिट रक्त बचा हुआ है। जबकि, मेडिकल कॉलेज में 23 यूनिट रक्त है। कुल मिलाकर 20 लाख की झांसी की आबादी के लिए सरकारी चिकित्सालयों की रक्तकोषों में सिर्फ 30 यूनिट ब्लड ही उपलब्ध है। वहीं, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमसी वर्मा का कहना है कि जो लोग रक्तदान करने के इच्छुक हैं, वो सोशल डिस्टेंसिंग समेत विभिन्न नियमों का पालन करते हुए ब्लडबैंक आकर रक्तदान कर सकते हैं।
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नहीं लगती है प्रोसेसिंग फीस
जो मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती होते हैं, उनको रक्त की आवश्यकता पड़ने पर सरकारी रक्तकोषों से ब्लड लेने पर प्रोसेसिंग फीस नहीं लगती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह राहत भरा होती है।
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निजी रक्तकोष वसूलते मनमाना शुल्क
सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक में रक्त नहीं मिलने पर जब मरीज निजी रक्तकोष में जाता है तो उससे मनमाना शुल्क वसूला जाता है। ऐसे में ज्यादातर मरीजों की निर्भरता सरकारी चिकित्सालयों के रक्तकोष पर रहती है।