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पारीछा में सिर्फ 20 दिन का है कोयले का स्टॉक
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पारीछा में सिर्फ 20 दिन का है कोयले का स्टॉक
झांसी। बिहार में हो रही लगातार बारिश से पारीछा थर्मल पावर प्लांट को जरूरत के हिसाब से कोयला नहीं मिल पा रहा है। कोयले के संकट का असर पारीछा थर्मल प्लांट पर भी पड़ सकता है। प्लांट के स्टॉक में सिर्फ 20 दिन का कोयला शेष है। आपूर्ति दुुरुस्त नहीं हुई तो बिजली का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वर्तमान में प्लांट की 1140 मेगावाट की छह इकाइयों में से चार से 780 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।
पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। इनमें से 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई मरम्मत कार्य के चलते व 250 मेगावाट की नंबर पांच इकाई जनरेटर खराब होने के कारण बंद चल रही है। जबकि, चार इकाइयां सुचारु रूप से काम कर रही हैं। 250 मेगावाट की छह नंबर इकाई को शनिवार को ही चालू किया गया। वह भी कुछ दिन से बंद चल रही थी। वर्तमान में चार इकाइयों से 920 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इन चार इकाइयों को चलाने के लिए औसतन प्रतिदिन मालगाड़ी के चार रैक (232 वैगन) कोयले की खपत होती है। बिहार में हो रही लगातार बारिश से इस माह अब तक 27 रैक ही मिले हैं, जबकि, मांग के हिसाब से यहां 72 रैक कोयले की आपूर्ति हो जानी चाहिए थी। अगर धनबाद व सिंगरौली से मिलने वाले कोयले की आपूर्ति में व्यवधान बना रहा तो स्टॉक में रखा कोयला खत्म हो सकता है। ऐसे में चालू इकाइयों से विद्युत उत्पादन संभव नहीं हो पाएगा। हालांकि, अभी प्लांट में 20 दिन के लिए कोयला उपलब्ध है। वहीं, प्लांट प्रशासन ने कोयला कंपनी के कोलकाता स्थित कार्यालय से संपर्क कर मालगाड़ियों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया है।
वर्तमान में प्रतिदिन चार रैक की जगह एक या दो रैक ही कोयला प्लांट को मिल रहा है। हालांकि, अभी एक लाख दस हजार मीट्रिक टन कोयला रखा हुआ है, जो 20 दिन तक बिजली उत्पादन करने के लिए पर्याप्त है। आगे कोयले की दिक्कत न होने इसके लिए कोयला कंपनी से संपर्क शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। - जीपी मिश्रा, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
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यह पड़ती है जरूरत
प्लांट में सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन लेने के लिए चौबीस घंटे में सोलह हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यानी, मालगाड़ी के साढ़े चार रैक (एक रैक में औसतन 65 वैगन होते हैं) कोयला प्रतिदिन चाहिए। उत्पादन के बाद चौदह हजार मीट्रिक टन ऐश प्रतिदिन प्लांट से निकलती है।
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झांसी। बिहार में हो रही लगातार बारिश से पारीछा थर्मल पावर प्लांट को जरूरत के हिसाब से कोयला नहीं मिल पा रहा है। कोयले के संकट का असर पारीछा थर्मल प्लांट पर भी पड़ सकता है। प्लांट के स्टॉक में सिर्फ 20 दिन का कोयला शेष है। आपूर्ति दुुरुस्त नहीं हुई तो बिजली का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वर्तमान में प्लांट की 1140 मेगावाट की छह इकाइयों में से चार से 780 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।
पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। इनमें से 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई मरम्मत कार्य के चलते व 250 मेगावाट की नंबर पांच इकाई जनरेटर खराब होने के कारण बंद चल रही है। जबकि, चार इकाइयां सुचारु रूप से काम कर रही हैं। 250 मेगावाट की छह नंबर इकाई को शनिवार को ही चालू किया गया। वह भी कुछ दिन से बंद चल रही थी। वर्तमान में चार इकाइयों से 920 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इन चार इकाइयों को चलाने के लिए औसतन प्रतिदिन मालगाड़ी के चार रैक (232 वैगन) कोयले की खपत होती है। बिहार में हो रही लगातार बारिश से इस माह अब तक 27 रैक ही मिले हैं, जबकि, मांग के हिसाब से यहां 72 रैक कोयले की आपूर्ति हो जानी चाहिए थी। अगर धनबाद व सिंगरौली से मिलने वाले कोयले की आपूर्ति में व्यवधान बना रहा तो स्टॉक में रखा कोयला खत्म हो सकता है। ऐसे में चालू इकाइयों से विद्युत उत्पादन संभव नहीं हो पाएगा। हालांकि, अभी प्लांट में 20 दिन के लिए कोयला उपलब्ध है। वहीं, प्लांट प्रशासन ने कोयला कंपनी के कोलकाता स्थित कार्यालय से संपर्क कर मालगाड़ियों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया है।
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वर्तमान में प्रतिदिन चार रैक की जगह एक या दो रैक ही कोयला प्लांट को मिल रहा है। हालांकि, अभी एक लाख दस हजार मीट्रिक टन कोयला रखा हुआ है, जो 20 दिन तक बिजली उत्पादन करने के लिए पर्याप्त है। आगे कोयले की दिक्कत न होने इसके लिए कोयला कंपनी से संपर्क शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। - जीपी मिश्रा, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।
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यह पड़ती है जरूरत
प्लांट में सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन लेने के लिए चौबीस घंटे में सोलह हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यानी, मालगाड़ी के साढ़े चार रैक (एक रैक में औसतन 65 वैगन होते हैं) कोयला प्रतिदिन चाहिए। उत्पादन के बाद चौदह हजार मीट्रिक टन ऐश प्रतिदिन प्लांट से निकलती है।