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किसानों का अनुदान हजम कर गए अफसर
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झांसी। बुंदेलखंड में किसानों की आय बढ़ाने के लिए शुरू हुई योजना ही भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई। लाखों रुपया अफसर अपने चहेतों के जरिए डकार गए। शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई। इसमें शिकायत की पुष्टि हुई है। अगली कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट कृषि निदेशालय को भेज दी गई।
केंद्र सरकार ने खास तौर से बुंदेलखंड इलाके लिए राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन प्रोग्राम लागू किया। इसके जरिए सरकार ने पिछले वर्ष 71.78 लाख रुपये जारी किए। इनसे किसानों को दुधारू पशु आधरित फसल प्रणाली, कृषि वानिकी आधारित फसल, अनाज भंडारण कक्ष, वर्मी कंपोस्ट पिट आदि बनवाने में वित्तीय मदद की जानी थी। इसे लागू कराने का जिम्मा भूमि संरक्षण इकाई की मैदानी इकाई को सौंपा गया। इकाई ने बामौर ब्लॉक के पुरैनिया गांव को योजना के लिए चुना और लाभार्थियों में अनुदान बांट दिया लेकिन, कुछ समय बाद ही लाभार्थी चयन में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगीं। इस पर उपनिदेशक अजीत सचान खुद मौके पर पहुंच गए। उनको भी शिकायतें सही मिलीं।
इसके बाद उपनिदेशक ने मामले की जांच के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी, उरई शहाबउद्दीन की अगुवाई में अवर अभियंता बीके पचौरी एवं अवर अभियंता रामकुमार स्वर्णकार की तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। कुछ समय पहले ही कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें इन शिकायतों को सही ठहराया गया। कमेटी के मुताबिक 106 लाभार्थियों के चयन में मानक पूरे नहीं किए गए। एक परिवार के सदस्यों को ही कई योजनाओं का लाभ दिया गया। सरकारी विद्यालय में तैनात एक शिक्षक को भी लाखों रुपये दे दिए गए। पशुपालन के नाम पर जिनको अनुदान दिया गया वह जांच टीम को पशु तक नहीं दिखा सके। फलदार पौधे लगाने के लिए अनुदान दिया गया वह भी मौके पर कोई बाग नहीं दिखा सके। सबसे बड़ी गड़बड़ी अनाज भंडार गृह
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बनाने को लेकर सामने आई। एक ही परिवार के लोगों को भंडार गृह के लिए सरकारी पैसा दिया गया लेकिन, भंडार गृह की जगह ड्राइंग रूम एवं किचन बना लिए गए। यह देख जांच टीम के सदस्यों के होश उड़ गए। इसी तरह किसानों को बीज, खाद एवं कीटनाशकों के नाम पर दिए गए अनुदान में भी गड़बड़ी की गई। ऊधौ सिंह नामक लाभार्थी ने जांच कमेटी को बताया कि परियोजना प्रभारी ने 40 हजार रुपये का अनुदान देकर 25 हजार नकद वापस ले लिया। जांच कमेटी ने चार पन्नों की जांच रिपोर्ट कुछ समय पहले प्रस्तुत कर दी। अब इसे यहां से कृषि निदेशालय को भेज दिया गया है।
चुनिंदा लाभार्थियों में ही बांट दी रकम
केंद्र सरकार की इस योजना का मकसद एक गांव के प्रत्येक किसान को लाभ पहुंचना था, जिससे उसकी आय में बढ़ोत्तरी हो सके। दूसरा मकसद था कि बुंदेलखंड से किसानों का पलायन रोका जा सके। लेकिन, अफसरों ने अपना हित साधने की खातिर सिर्फ चुनिंदा किसानों के बीच पूरी अनुदान राशि खपा दी। जांच रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि अधिकांश लाभार्थी एक ही परिवार के हैं। सरकारी नौकरी करने वालों को भी अनुदान दिया गया। योजना के लाभ के लिए एक ही खसरा नंबर का इस्तेमाल हुआ है।
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केंद्र सरकार ने खास तौर से बुंदेलखंड इलाके लिए राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन प्रोग्राम लागू किया। इसके जरिए सरकार ने पिछले वर्ष 71.78 लाख रुपये जारी किए। इनसे किसानों को दुधारू पशु आधरित फसल प्रणाली, कृषि वानिकी आधारित फसल, अनाज भंडारण कक्ष, वर्मी कंपोस्ट पिट आदि बनवाने में वित्तीय मदद की जानी थी। इसे लागू कराने का जिम्मा भूमि संरक्षण इकाई की मैदानी इकाई को सौंपा गया। इकाई ने बामौर ब्लॉक के पुरैनिया गांव को योजना के लिए चुना और लाभार्थियों में अनुदान बांट दिया लेकिन, कुछ समय बाद ही लाभार्थी चयन में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगीं। इस पर उपनिदेशक अजीत सचान खुद मौके पर पहुंच गए। उनको भी शिकायतें सही मिलीं।
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इसके बाद उपनिदेशक ने मामले की जांच के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी, उरई शहाबउद्दीन की अगुवाई में अवर अभियंता बीके पचौरी एवं अवर अभियंता रामकुमार स्वर्णकार की तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। कुछ समय पहले ही कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी। जिसमें इन शिकायतों को सही ठहराया गया। कमेटी के मुताबिक 106 लाभार्थियों के चयन में मानक पूरे नहीं किए गए। एक परिवार के सदस्यों को ही कई योजनाओं का लाभ दिया गया। सरकारी विद्यालय में तैनात एक शिक्षक को भी लाखों रुपये दे दिए गए। पशुपालन के नाम पर जिनको अनुदान दिया गया वह जांच टीम को पशु तक नहीं दिखा सके। फलदार पौधे लगाने के लिए अनुदान दिया गया वह भी मौके पर कोई बाग नहीं दिखा सके। सबसे बड़ी गड़बड़ी अनाज भंडार गृह
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बनाने को लेकर सामने आई। एक ही परिवार के लोगों को भंडार गृह के लिए सरकारी पैसा दिया गया लेकिन, भंडार गृह की जगह ड्राइंग रूम एवं किचन बना लिए गए। यह देख जांच टीम के सदस्यों के होश उड़ गए। इसी तरह किसानों को बीज, खाद एवं कीटनाशकों के नाम पर दिए गए अनुदान में भी गड़बड़ी की गई। ऊधौ सिंह नामक लाभार्थी ने जांच कमेटी को बताया कि परियोजना प्रभारी ने 40 हजार रुपये का अनुदान देकर 25 हजार नकद वापस ले लिया। जांच कमेटी ने चार पन्नों की जांच रिपोर्ट कुछ समय पहले प्रस्तुत कर दी। अब इसे यहां से कृषि निदेशालय को भेज दिया गया है।
चुनिंदा लाभार्थियों में ही बांट दी रकम
केंद्र सरकार की इस योजना का मकसद एक गांव के प्रत्येक किसान को लाभ पहुंचना था, जिससे उसकी आय में बढ़ोत्तरी हो सके। दूसरा मकसद था कि बुंदेलखंड से किसानों का पलायन रोका जा सके। लेकिन, अफसरों ने अपना हित साधने की खातिर सिर्फ चुनिंदा किसानों के बीच पूरी अनुदान राशि खपा दी। जांच रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि अधिकांश लाभार्थी एक ही परिवार के हैं। सरकारी नौकरी करने वालों को भी अनुदान दिया गया। योजना के लाभ के लिए एक ही खसरा नंबर का इस्तेमाल हुआ है।