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मोटापा कमजोर करता इम्यूनिटी, बच्चा बार-बार पड़ सकता बीमार
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झांसी। बच्चों में मोटापा होना खतरनाक है। यह उनकी इम्यूनिटी को कमजोर कर देता है। इस वजह से बच्चा बार-बार बीमार पड़ सकता है। कोरोना काल में शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते बच्चों में मोटापा के केस 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
कोरोना काल में बच्चे घरों में ही कैद रहे। इस कारण उनकी खेलकूद की गतिविधियां भी कम हो गईं। कइयों को मानसिक तनाव भी हो गया। ऑनलाइन पढ़ाई के चलते मोबाइल, लैपटॉप की ऐसी लत पड़ी, जो छूटने का नाम नहीं ले रही है। अब हालात लगभग सामान्य होने को हैं, फिर भी अधिकतर बच्चे दिनभर इंटरनेट पर ही अधिकतर समय बिता रहे हैं। इस कारण बच्चों में मोटापा के मामलों में इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ओपीडी में मोटापा की समस्या लेकर आने वाले बच्चों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी है। मोटापा प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बनाता है। वजन बढ़ने से बच्चों के जोड़ों में दर्द के साथ-साथ चलने में भी दिक्कत हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात शिशु को छह महीने तक मां का दूध देने से भविष्य में मोटापा की संभावना कम होती है। इस अवधि में डब्बा बंद दूध का उपयोग नहीं करें। घर में बना हुआ ताजा संतुलित भोजन करें। हर प्रकार की सब्जी, मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, नट्स आदि का सेवन करें। फलों के रस की बजाए साबुत फल लें, जिससे फाइबर पहुंचे। जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्डड्रिंक, जूस, चॉकलेट से परहेज करें।
ये हैं कारण
- फास्ट फूड खाना
- चॉकलेट, मिठाई खाना
- हार्मोन का बिगड़ जाना
- मानसिक तनाव का बढ़ना
- शारीरिक गतिविधि कम होना
- टीवी, इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताना
ये हैं दुष्परिणाम
- नींद न आना,
- ह्रदय रोग हो सकता
- कद का बढ़ना रुकना
- थकान, शरीर में दर्द।
बच्चों में मोटापा की समस्या लगातार बढ़ रही है। कोरोना काल में बच्चों के घरों में कैद रहने से फिजिकल एक्टीविटी बहुत कम हो गई। ऐसे में मोटापा का शिकार बच्चों की ओपीडी में संख्या 20 फीसदी तक बढ़ी है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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ओपीडी में पहले जहां 50 में से दो-तीन बच्चे ही मोटापा की समस्या लेकर आते थे। अब इनकी संख्या में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। मोटापा इम्यूनिटी कमजोर करता है। इसलिए बच्चा बार-बार बीमार पड़ सकता है। - डॉ. अनुज सेठी, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज।
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कोरोना काल में बच्चे घरों में ही कैद रहे। इस कारण उनकी खेलकूद की गतिविधियां भी कम हो गईं। कइयों को मानसिक तनाव भी हो गया। ऑनलाइन पढ़ाई के चलते मोबाइल, लैपटॉप की ऐसी लत पड़ी, जो छूटने का नाम नहीं ले रही है। अब हालात लगभग सामान्य होने को हैं, फिर भी अधिकतर बच्चे दिनभर इंटरनेट पर ही अधिकतर समय बिता रहे हैं। इस कारण बच्चों में मोटापा के मामलों में इजाफा हुआ है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ओपीडी में मोटापा की समस्या लेकर आने वाले बच्चों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी है। मोटापा प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बनाता है। वजन बढ़ने से बच्चों के जोड़ों में दर्द के साथ-साथ चलने में भी दिक्कत हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात शिशु को छह महीने तक मां का दूध देने से भविष्य में मोटापा की संभावना कम होती है। इस अवधि में डब्बा बंद दूध का उपयोग नहीं करें। घर में बना हुआ ताजा संतुलित भोजन करें। हर प्रकार की सब्जी, मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, नट्स आदि का सेवन करें। फलों के रस की बजाए साबुत फल लें, जिससे फाइबर पहुंचे। जंक फूड, फास्ट फूड, कोल्डड्रिंक, जूस, चॉकलेट से परहेज करें।
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ये हैं कारण
- फास्ट फूड खाना
- चॉकलेट, मिठाई खाना
- हार्मोन का बिगड़ जाना
- मानसिक तनाव का बढ़ना
- शारीरिक गतिविधि कम होना
- टीवी, इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताना
ये हैं दुष्परिणाम
- नींद न आना,
- ह्रदय रोग हो सकता
- कद का बढ़ना रुकना
- थकान, शरीर में दर्द।
बच्चों में मोटापा की समस्या लगातार बढ़ रही है। कोरोना काल में बच्चों के घरों में कैद रहने से फिजिकल एक्टीविटी बहुत कम हो गई। ऐसे में मोटापा का शिकार बच्चों की ओपीडी में संख्या 20 फीसदी तक बढ़ी है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
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ओपीडी में पहले जहां 50 में से दो-तीन बच्चे ही मोटापा की समस्या लेकर आते थे। अब इनकी संख्या में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। मोटापा इम्यूनिटी कमजोर करता है। इसलिए बच्चा बार-बार बीमार पड़ सकता है। - डॉ. अनुज सेठी, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज।