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झांसी में ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ शुरू, सेप्टिक टैंक के पानी से होगी सिंचाई
Mon, 31 Dec 2018 08:02 AM IST
Priyesh Mishra
jhansi
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Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 31 Dec 2018 08:02 AM IST
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सिंचाई
- फोटो : अमर उजाला
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जल प्रदूषण में कमी लाने के लिए अब महानगर में सेप्टिक टैंक और नालियों के पानी का उपयोग सिंचाई में किया जाएगा। इस पानी से पार्क व बगीचों में फुलवारी की सिंचाई की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ‘सेप्टेज मैनेजमेंट योजना’ शुरू की गई है।
अटल मिशन फॉर रिजूवेशन एंड अरबन ट्रांसफारमेशन (अम्रृत) के अंतर्गत अब सेप्टिक टैंक के पानी को फिर से साफ किया जाएगा। साफ करने के बाद पानी का उपयोग सिंचाई करने में किया जाएगा। नगर निगम के पास अभी शौचालय टैंक की सफाई के लिए एक ही गाड़ी है। इस कारण एक बार में एक ही टैंक साफ हो पाता है। यदि कोई दूसरा टैंक साफ करने की मांग करता है तो उसे इंतजार करना पड़ता है।
अभी शौचालय टैंक खाली करने के बाद उसके मलबे को कचरे में डाल दिया जाता है, जिससे प्रदूषण फैलता है। अब ऐसा नहीं होगा। शौचालय का टैंक साफ करने के बाद उसका मलबा (गंदा पानी) हंसारी में बन रहे प्लांट में ले जाया जाएगा। जहां पानी शुद्ध करने के बाद आसपास फूलों की क्यारियों और पार्कों में सिंचाई के काम आएगा।
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नीति आयोग की टीम ने दो साल पहले पानी का सर्वे किया था। तब टीम ने माना था कि छह करोड़ लीटर (60 एमएलडी) पानी बेकार होकर नालियों में बह जाता है। झांसी में पहले से ही पानी की कमी है। यदि बेकार बहने वाले पानी का सदुपयोग किया जाए तो काफी हद तक पानी की किल्लत दूर की जा सकती है। टीम ने माना था कि पानी को शुद्ध करके दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाया जा सकता है। इसके लिए ‘फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट’ लगेगा। हंसारी में यह प्लांट तैयार हो रहा है।
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अटल मिशन फॉर रिजूवेशन एंड अरबन ट्रांसफारमेशन (अम्रृत) के अंतर्गत अब सेप्टिक टैंक के पानी को फिर से साफ किया जाएगा। साफ करने के बाद पानी का उपयोग सिंचाई करने में किया जाएगा। नगर निगम के पास अभी शौचालय टैंक की सफाई के लिए एक ही गाड़ी है। इस कारण एक बार में एक ही टैंक साफ हो पाता है। यदि कोई दूसरा टैंक साफ करने की मांग करता है तो उसे इंतजार करना पड़ता है।
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अभी शौचालय टैंक खाली करने के बाद उसके मलबे को कचरे में डाल दिया जाता है, जिससे प्रदूषण फैलता है। अब ऐसा नहीं होगा। शौचालय का टैंक साफ करने के बाद उसका मलबा (गंदा पानी) हंसारी में बन रहे प्लांट में ले जाया जाएगा। जहां पानी शुद्ध करने के बाद आसपास फूलों की क्यारियों और पार्कों में सिंचाई के काम आएगा।
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नीति आयोग की टीम ने दो साल पहले पानी का सर्वे किया था। तब टीम ने माना था कि छह करोड़ लीटर (60 एमएलडी) पानी बेकार होकर नालियों में बह जाता है। झांसी में पहले से ही पानी की कमी है। यदि बेकार बहने वाले पानी का सदुपयोग किया जाए तो काफी हद तक पानी की किल्लत दूर की जा सकती है। टीम ने माना था कि पानी को शुद्ध करके दोबारा इस्तेमाल योग्य बनाया जा सकता है। इसके लिए ‘फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट’ लगेगा। हंसारी में यह प्लांट तैयार हो रहा है।