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जेल में कुख्यात लेखराज की मौत: सियासी सरपस्ती ने बनाया था ताकतवर, यूपी में वारदात और इस राज्य में लेता था शरण
Sat, 27 Dec 2025 12:53 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 27 Dec 2025 12:53 PM IST
सार
गाजियाबाद जेल में बंद कुख्यात लेखराज यादव की मौत हो गई। वह लीवर सिरोसिस, शुगर समेत कई अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित था। लेखराज के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज 60 से अधिक मामले दर्ज थे।
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lekhraj yadav
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
हत्या, गैंगस्टर एक्ट समेत चार मामलों में गाजियाबाद के डासना जेल में बंद पूर्व ब्लॉक प्रमुख लेखराज यादव (76) की बृहस्पतिवार रात दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। लेखराज को अक्तूबर माह में वाराणसी जेल से डासना शिफ्ट किया गया था।
जेल अफसरों ने बताया कि वह लीवर सिरोसिस, शुगर समेत अन्य कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित था। उसका एम्स समेत मेरठ एवं गाजियाबाद के अस्पताल में उपचार चल रहा था। 22 दिसंबर को उसे एम्स ले जाया गया था। यहां से उसे दोबारा बुलाने की तारीख दी गई थी।
इसी दौरान तबीयत बिगड़ने पर पहले उसे एमएमजी अस्पताल ले जाया गया। यहां से उसे एम्स भेज दिया गया। एम्स से उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर किया गया। यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके खिलाफ झांसी समेत यूपी एवं मध्य प्रदेश में छह दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे। शनिवार को उसका अंतिम संस्कार झांसी के रानीपुर कस्बा में होगा।
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जेल अफसरों ने बताया कि वह लीवर सिरोसिस, शुगर समेत अन्य कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित था। उसका एम्स समेत मेरठ एवं गाजियाबाद के अस्पताल में उपचार चल रहा था। 22 दिसंबर को उसे एम्स ले जाया गया था। यहां से उसे दोबारा बुलाने की तारीख दी गई थी।
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इसी दौरान तबीयत बिगड़ने पर पहले उसे एमएमजी अस्पताल ले जाया गया। यहां से उसे एम्स भेज दिया गया। एम्स से उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल रेफर किया गया। यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उसके खिलाफ झांसी समेत यूपी एवं मध्य प्रदेश में छह दर्जन से अधिक मामले दर्ज थे। शनिवार को उसका अंतिम संस्कार झांसी के रानीपुर कस्बा में होगा।
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सियासी सरपस्ती ने लेखराज को बनाया था ताकतवर, यूपी में वारदात करके एमपी में लेता था शरण
झांसी के रानीपुर कस्बा निवासी लेखराज यादव का नाम बुंदेलखंड में दशकों तक आतंक का पर्याय रहा। सियासी सरपस्ती उसे ताकतवर बनाती गई। कुछ समय में वह खौफ का दूसरा नाम बन गया। उसके नाम की तूती बोलती थी। समर्थक उसे लंकेश एवं पापाजी नाम से बुलाते थे।
झांसी के रानीपुर कस्बा निवासी लेखराज यादव का नाम बुंदेलखंड में दशकों तक आतंक का पर्याय रहा। सियासी सरपस्ती उसे ताकतवर बनाती गई। कुछ समय में वह खौफ का दूसरा नाम बन गया। उसके नाम की तूती बोलती थी। समर्थक उसे लंकेश एवं पापाजी नाम से बुलाते थे।
उसे अपने अहाते में दरबार लगाने का शौक था। जहां वह न्याय के नाम पर अपनी मर्जी चलाता था। यहां हुए निर्णय को मानना इलाके के लोगों की मजबूरी थी। गाड़ियों के काफिले के साथ चलने वाले इस शख्स ने जरायम की दुनिया से जुड़े छोटे मोटे अपराधियों को मिलाकर अपना मजबूत नेटवर्क बना लिया था।
यूपी में वारदात को अंजाम देने के बाद एमपी में भाग जाता था। वहां पनाह लेता था। बताया जाता है जिनके यहां पनाह लेता था उनकी समय आने पर मदद भी करता था। सियासी रिश्तों की वजह से झांसी के बंगरा ब्लॉक का वह खुद दो बार प्रमुख रहा जबकि एक बार बहू शशि यादव को भी ब्लॉक प्रमुख बनाने में कामयाब रहा।
रानीपुर नगर पंचायत में उसका बेटा भगत सिंह एवं उसकी पत्नी राम मूर्ति चेयरमैन रहीं। उसके जेल जाने के बाद भी पत्नी राम मूर्ति ने नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीता। लेखराज जमीनों पर कब्जे, खनन के काले कारोबार से लेकर कई धंधों में शामिल रहा।
उसके सियासी रसूख को देख पुलिस भी उस पर हाथ डालने से बचती थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए थाने से दबिश निकलती थी लेकिन, पहले ही उस तक सूचना पहुंच जाती थी।अपनी इसी दंबगाई के चलते लेखराज ने तत्कालीन भाजयुमो जिलाध्यक्ष मनोज श्रोत्रिय, दीपचंद्र, विमल, मोनी पाल की 17 दिसंबर 2006 को सरेआम गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया था।
इस घटना से पूरा इलाका दहल उठा था। लेखराज मध्य प्रदेश भाग गया। इस मामले में वर्ष 2019 में दस्यु उन्मूलन विशेष कोर्ट ने लेखराज समेत उसके आठ गुर्गों को उम्र कैद की सजा सुना दी। इसके बाद से लेखराज जेल के सीखचों के पीछे कैद था।
अलग-अलग थानों में दर्ज हैं 60 से अधिक मामले
हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह का लंबा-चौड़ा आपराधिक रिकॉर्ड है। उसके खिलाफ झांसी समेत आसपास के जनपद एवं मध्य प्रदेश के कई थानों में करीब साठ मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में वह मउऊरानीपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर होने के साथ गैंगस्टर भी था। इस गैंग का लीडर वह खुद था। गैंग में उसके साथी के तौर पर पुत्र जय हिंद यादव, रामस्वरूप, महेंद्र समत नौ अन्य सदस्य हैं।
हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह का लंबा-चौड़ा आपराधिक रिकॉर्ड है। उसके खिलाफ झांसी समेत आसपास के जनपद एवं मध्य प्रदेश के कई थानों में करीब साठ मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में वह मउऊरानीपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर होने के साथ गैंगस्टर भी था। इस गैंग का लीडर वह खुद था। गैंग में उसके साथी के तौर पर पुत्र जय हिंद यादव, रामस्वरूप, महेंद्र समत नौ अन्य सदस्य हैं।
उसके पुत्र जय हिंद पर 21 मुकदमे एवं साथी रामस्वरूप के खिलाफ 22 एवं महेंद्र सिंह के खिलाफ सात मुकदमे हैं। लेखराज के खिलाफ सिर्फ झांसी में ही 25 मामले दर्ज हैं। इनमें मऊरानीपुर में 22 मामले हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट जैसे गंभीर मामले शामिल हैं वहीं, कटेरा में एक एवं उल्दन थाना में दो मामले दर्ज हैं।
मुठभेड़ की वायरल ऑडियो क्लिप ने मचा दिया था हंगामा
लेखराज सिंह के पुत्र भगत सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता था। बीजेपी पार्षद प्रदीप गुप्ता ने लेखराज एवं उसके पुत्र भगत सिंह पर रंगदारी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी मुकदमे के लिए कोतवाल सुनीत सिंह लेखराज सिंह से एनकाउंटर की चर्चा कर रहा था।
लेखराज सिंह के पुत्र भगत सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता था। बीजेपी पार्षद प्रदीप गुप्ता ने लेखराज एवं उसके पुत्र भगत सिंह पर रंगदारी का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसी मुकदमे के लिए कोतवाल सुनीत सिंह लेखराज सिंह से एनकाउंटर की चर्चा कर रहा था।
इस ऑडियो के वायरल होने के बाद पूरे यूपी में हलचल मच गई थी। ऑडियो क्लिप लीक होने के बाद कोतवाल सुनील सिंह को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। करीब आठ मिनट लंबी इस बातचीत में लेखराज एवं कोतवाल के बीच पुलिस मुठभेड़ को लेकर बातचीत की जा रही थी।
लेखराज खराब इतिहास की बात कहते हुए अच्छे भविष्य की बात कोतवाल से कह रहा था जबकि कोतवाल उसे मुठभेड़ से बचने के तरीके बता रहा था। दोनों की बातचीत उजागर होने के बाद योगी सरकार पुलिस मुठभेड़ को लेकर सवालों में घिर गई थी। इस ऑडियो क्लिप के लीक होने से कुछ दिन पहले ही लेखराज की पुलिस से मुठभेड़ हुई थी लेकिन, लेखराज अपने पुत्र के साथ भागने में कामयाब रहा था।
लेखराज को छुड़ाने के लिए झांसी में पुलिस काफिले पर हुआ था हमला
कन्नौज जेल से एक मामले में सुनवाई के लिए लेखराज को झांसी लाया गया था। पुलिस का कहना है कि 16 सितंबर 2022 को जब पुलिस टीम उसे लेकर लौट रही थी, तब काफिले में हमला करके लेखराज को छुड़ाने की कोशिश हुई। तत्कालीन मोंठ थाना प्रभारी विनय दिवाकर ने इस मामले में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव समेत उनके भाई बृजेंद्र यादव, अनिल यादव, मलखान शिवहरे, धीरेंद्र पाल तथा मुकेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
कन्नौज जेल से एक मामले में सुनवाई के लिए लेखराज को झांसी लाया गया था। पुलिस का कहना है कि 16 सितंबर 2022 को जब पुलिस टीम उसे लेकर लौट रही थी, तब काफिले में हमला करके लेखराज को छुड़ाने की कोशिश हुई। तत्कालीन मोंठ थाना प्रभारी विनय दिवाकर ने इस मामले में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव समेत उनके भाई बृजेंद्र यादव, अनिल यादव, मलखान शिवहरे, धीरेंद्र पाल तथा मुकेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
इस मामले में झांसी समेत कन्नौज में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पुलिस ने साजिश रचने के आरोप में पूर्व विधायक दीपनारायण यादव के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। इसके बाद से पूर्व विधायक के खराब दिन शुरू हो गए। इस मामले में उनको कई माह जेल काटनी पड़ी थी।