{"_id":"5dacb1a28ebc3e93d2291a84","slug":"not-only-gps-isro-navik-see-way-soon-jhansi-news-jhs150789145","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीपीएस ही नहीं, जल्द इसरो का ‘नाविक’ भी दिखाएगा रास्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीपीएस ही नहीं, जल्द इसरो का ‘नाविक’ भी दिखाएगा रास्ता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीपीएस ही नहीं, जल्द इसरो का ‘नाविक’ भी दिखाएगा रास्ता
प्रशांत शर्मा
झांसी। भारत में अब स्वदेशी इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट यानी ‘नाविक’ के जरिए भी मोबाइल से पथ प्रदर्शन (नेविगेशन) हो सकेगा। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भविष्य में एप्लीकेशन लांच करने जा रहा है। इसके बाद आप ‘नाविक’ के सहारे भी रास्ता तलाश कर मंजिल तक पहुंच सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में नाविक का उपयोग शुरू हो चुका है। ऐसे में भारत की अमेरिकी जीपीएस पर निर्भरता नहीं रहेगी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी में यह जानकारी इसरो के वैज्ञानिकों ने दी।
स्वदेशी नाविक को अंतरराष्ट्रीय संस्था 3 जीपीपी (थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट) मान्यता दे चुका है। हालांकि, यह जीपीएस नहीं, बल्कि आरपीएस (रीजनल पोजीशनिंग सिस्टम) है। जल्द ही अंतरराष्ट्रीय और देसी मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां नाविक का उपयोग कर सकेंगी। इसरो इस दिशा में बहुत तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि कब तक इस एप्लीकेशन की लांचिंग हो सकेगी। इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि नाविक अमेरिका के जीपीएस से कहीं अधिक ज्यादा बेहतर होगा। इसका कारण है कि नाविक सिर्फ भारत के ऊपर ही काम करेगा। इसके लिए इसरो ने आठ सेटेलाइट्स पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए हैं। सात सेटेलाइट नेविगेशन (पथ प्रदर्शन) के लिए हैं और एक सेटेलाइट संदेशों के लिए। जबकि, अमेरिकी सेटेलाइट भारत के ऊपर नहीं है।
बाजार में उपलब्ध रिसीवर
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार वाहनों के लिए नाविक रिसीवर भी बाजार में उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में इसका उपयोग कर सकता है। इसके अलावा ट्रेन, बस आदि में भी रिसीवर लगाकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
ये होंगे फायदे
नाविक एप्लीकेशन शुरू होने के बाद जल, थल और वायु मार्ग का आसानी से पता चलेगा। वाहनों की ट्रैकिंग, फ्लीट प्रबंधन में भी आसानी होगी। साथ ही, आपदा प्रबंधन में भी मदद मिल सकेगी। बताया गया कि भारतीय सीमाओं से एक हजार से लेकर डेढ़ हजार किलोमीटर दूर तक का भी जानकारी पता की जा सकेगी।
विज्ञापन
प्रशांत शर्मा
झांसी। भारत में अब स्वदेशी इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट यानी ‘नाविक’ के जरिए भी मोबाइल से पथ प्रदर्शन (नेविगेशन) हो सकेगा। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भविष्य में एप्लीकेशन लांच करने जा रहा है। इसके बाद आप ‘नाविक’ के सहारे भी रास्ता तलाश कर मंजिल तक पहुंच सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में नाविक का उपयोग शुरू हो चुका है। ऐसे में भारत की अमेरिकी जीपीएस पर निर्भरता नहीं रहेगी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी में यह जानकारी इसरो के वैज्ञानिकों ने दी।
स्वदेशी नाविक को अंतरराष्ट्रीय संस्था 3 जीपीपी (थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट) मान्यता दे चुका है। हालांकि, यह जीपीएस नहीं, बल्कि आरपीएस (रीजनल पोजीशनिंग सिस्टम) है। जल्द ही अंतरराष्ट्रीय और देसी मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां नाविक का उपयोग कर सकेंगी। इसरो इस दिशा में बहुत तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि कब तक इस एप्लीकेशन की लांचिंग हो सकेगी। इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि नाविक अमेरिका के जीपीएस से कहीं अधिक ज्यादा बेहतर होगा। इसका कारण है कि नाविक सिर्फ भारत के ऊपर ही काम करेगा। इसके लिए इसरो ने आठ सेटेलाइट्स पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए हैं। सात सेटेलाइट नेविगेशन (पथ प्रदर्शन) के लिए हैं और एक सेटेलाइट संदेशों के लिए। जबकि, अमेरिकी सेटेलाइट भारत के ऊपर नहीं है।
विज्ञापन
बाजार में उपलब्ध रिसीवर
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार वाहनों के लिए नाविक रिसीवर भी बाजार में उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में इसका उपयोग कर सकता है। इसके अलावा ट्रेन, बस आदि में भी रिसीवर लगाकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
ये होंगे फायदे
नाविक एप्लीकेशन शुरू होने के बाद जल, थल और वायु मार्ग का आसानी से पता चलेगा। वाहनों की ट्रैकिंग, फ्लीट प्रबंधन में भी आसानी होगी। साथ ही, आपदा प्रबंधन में भी मदद मिल सकेगी। बताया गया कि भारतीय सीमाओं से एक हजार से लेकर डेढ़ हजार किलोमीटर दूर तक का भी जानकारी पता की जा सकेगी।