फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   not only gps, isro navik see way soon

जीपीएस ही नहीं, जल्द इसरो का ‘नाविक’ भी दिखाएगा रास्ता

Mon, 21 Oct 2019 12:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2019 12:42 AM IST
विज्ञापन
not only gps, isro navik see way soon
जीपीएस ही नहीं, जल्द इसरो का ‘नाविक’ भी दिखाएगा रास्ता
विज्ञापन

प्रशांत शर्मा
झांसी। भारत में अब स्वदेशी इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट यानी ‘नाविक’ के जरिए भी मोबाइल से पथ प्रदर्शन (नेविगेशन) हो सकेगा। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भविष्य में एप्लीकेशन लांच करने जा रहा है। इसके बाद आप ‘नाविक’ के सहारे भी रास्ता तलाश कर मंजिल तक पहुंच सकेंगे। रक्षा क्षेत्र में नाविक का उपयोग शुरू हो चुका है। ऐसे में भारत की अमेरिकी जीपीएस पर निर्भरता नहीं रहेगी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी में यह जानकारी इसरो के वैज्ञानिकों ने दी।
स्वदेशी नाविक को अंतरराष्ट्रीय संस्था 3 जीपीपी (थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट) मान्यता दे चुका है। हालांकि, यह जीपीएस नहीं, बल्कि आरपीएस (रीजनल पोजीशनिंग सिस्टम) है। जल्द ही अंतरराष्ट्रीय और देसी मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां नाविक का उपयोग कर सकेंगी। इसरो इस दिशा में बहुत तेजी से काम कर रहा है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि कब तक इस एप्लीकेशन की लांचिंग हो सकेगी। इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि नाविक अमेरिका के जीपीएस से कहीं अधिक ज्यादा बेहतर होगा। इसका कारण है कि नाविक सिर्फ भारत के ऊपर ही काम करेगा। इसके लिए इसरो ने आठ सेटेलाइट्स पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए हैं। सात सेटेलाइट नेविगेशन (पथ प्रदर्शन) के लिए हैं और एक सेटेलाइट संदेशों के लिए। जबकि, अमेरिकी सेटेलाइट भारत के ऊपर नहीं है।
विज्ञापन

बाजार में उपलब्ध रिसीवर
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार वाहनों के लिए नाविक रिसीवर भी बाजार में उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में इसका उपयोग कर सकता है। इसके अलावा ट्रेन, बस आदि में भी रिसीवर लगाकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ये होंगे फायदे
नाविक एप्लीकेशन शुरू होने के बाद जल, थल और वायु मार्ग का आसानी से पता चलेगा। वाहनों की ट्रैकिंग, फ्लीट प्रबंधन में भी आसानी होगी। साथ ही, आपदा प्रबंधन में भी मदद मिल सकेगी। बताया गया कि भारतीय सीमाओं से एक हजार से लेकर डेढ़ हजार किलोमीटर दूर तक का भी जानकारी पता की जा सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed