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फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद निरस्त हुई एनओसी
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झांसी। जमीन की फर्जी एनओसी जारी होने का मामला उजागर होने के बाद निगम प्रशासन ने उक्त एनओसी निरस्त कर दी। अब इस फर्जीवाड़े की जांच कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की भी तैयारी है।
नौ अगस्त को नगर निगम की ओर से मसीहागंज निवासी पुष्पेंद्र सिंह, शिवपुरी रोड निवासी शिव कुमार सोलंकी एवं मसीहागंज निवासी राजकुमार को एक भूखंड की एनओसी जारी हुई। इन लोगों ने जिस गाटा नंबर की एनओसी ली वहां निर्माण न कराकर उसकी जगह दूसरे गाटा नंबर पर निर्माण शुरू करा दिया। उस एनओसी के आधार पर नगर निगम की कीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी। निगम की जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने पर निगम दस्ता वहां पहुंच गया लेकिन, इन लोगोें ने फर्जी एनओसी दिखाकर दस्ते को लौटा दिया। पार्षद राजू साहू ने इस मामले की शिकायत कर दी। जांच पड़ताल में फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। मालूम चला कि यह एनओसी भी बहुत कम समय सिर्फ 18 दिन के भीतर ही जारी कर दी गई जबकि एनओसी जारी होने में कई महीने लग जाते हैं। मामला उजागर होने के बाद एनओसी निरस्त कर दी गई। दस्ते ने भी मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया। वहीं, इस फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर पार्षद ने महापौर को ज्ञापन सौंपा है। महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है पूरे मामले का परीक्षण कराया जा रहा है। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई कराई जाएगी।
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नौ अगस्त को नगर निगम की ओर से मसीहागंज निवासी पुष्पेंद्र सिंह, शिवपुरी रोड निवासी शिव कुमार सोलंकी एवं मसीहागंज निवासी राजकुमार को एक भूखंड की एनओसी जारी हुई। इन लोगों ने जिस गाटा नंबर की एनओसी ली वहां निर्माण न कराकर उसकी जगह दूसरे गाटा नंबर पर निर्माण शुरू करा दिया। उस एनओसी के आधार पर नगर निगम की कीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी। निगम की जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने पर निगम दस्ता वहां पहुंच गया लेकिन, इन लोगोें ने फर्जी एनओसी दिखाकर दस्ते को लौटा दिया। पार्षद राजू साहू ने इस मामले की शिकायत कर दी। जांच पड़ताल में फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। मालूम चला कि यह एनओसी भी बहुत कम समय सिर्फ 18 दिन के भीतर ही जारी कर दी गई जबकि एनओसी जारी होने में कई महीने लग जाते हैं। मामला उजागर होने के बाद एनओसी निरस्त कर दी गई। दस्ते ने भी मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया। वहीं, इस फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर पार्षद ने महापौर को ज्ञापन सौंपा है। महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है पूरे मामले का परीक्षण कराया जा रहा है। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई कराई जाएगी।
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