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बिना नक्शा पास कराए नहीं बनेंगे 62 गांवों में मकान

Mon, 14 Aug 2017 12:39 AM IST
amarujala
amarujala Updated Mon, 14 Aug 2017 12:39 AM IST
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 No house to be built in 62 villages
nagar nigam jhansi news - फोटो : demo
झांसी। 
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झांसी विकास प्राधिकरण की सीमा में 04 साल पहले शामिल हुए 62 गांवों में अब मकान का नक्शा बनवाना जरूरी होगा। इसके लिए सभी गांवों में प्रचार-प्रसार के लिए दीवार लेखन कराया जाएगा, ताकि गांव के लोगों को नक्शा बनवाने के बारे में जानकारी हो सके।
शासन ने 26 नवंबर 2013 को 62 गांवों को जेडीए सीमा में शामिल करने का सरकारी गजट प्रकाशित कर दिया था। इसके बाद से यह सभी गांव पूरी तरह से जेडीए के नियंत्रण में आ गए थे। इन गांवों में मकान बनाने से पहले जेडीए से नक्शा पास कराना अनिवार्य हो गया था, लेकिन चार साल से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इससे न केवल जेडीए को राजस्व की क्षति हो रही, बल्कि अनियोजित तरीके से मकान बनाए जा रहे हैं, जिससे झांसी महायोजना में इन गांवों को शामिल करने के बाद अनियोजित विकास हो जाने के कारण आने वाले समय में कहां हरित पट्टी है और कहां नहीं, इसको लेकर भी दिक्कत हो सकती है। जेडीए में अवर अभियंताओं की कमी है, जिससे गांवों में मकान नियमानुसार मानक से बन रहे हैं या नहीं, इसकी देखरेख हो पाने में दिक्कत आ रही है।
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इसे देखते हुए उप्र नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धाराओं के अंतर्गत मकान निर्माण करने की अनुमति जेडीए से लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अंतर्गत सभी 62 गांवों में प्रचार्र-प्रसार के लिए दीवारों पर लिखवाया जाएगा कि मकान बनाने से पहले जेडीए से नक्शा स्वीकृत करा लें। बता दें कि जेडीए की सीमा में आसपास के 101 गांव शामिल हैं।
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मिलेंगी शहरी सुविधाएं
जेडीए की सीमा में शामिल गांवों को भविष्य में शहरी सुविधाओं से लैस किया जाएगा। गांवों की जमीन को व्यावसायिक, आवासीय, कृषि क्षेत्र में अलग-अलग बांटकर गांवों में पक्की सड़कें, नालियां, पार्क समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां आवासीय कालोनियां भी विकसित की जाएंगी। 

ये गांव हैं शामिल
जेडीए की सीमा में बरुआसागर क्षेत्र के लक्ष्मनपुरा, वनगुवां, फुटेरा बरुआसागर, हरपुरा, ताल रमन्ना, घुघुवा, चिपलौटा, नौटक्षीर, कोलवा, बरेठी, दानीपुरा, बड़ागांव क्षेत्र के दौन, बचावली खुर्द, बचावली बुजुर्ग, दुनारा, सुजाटा, भूपनगर, बड़ागांव, तौरबराटा, मथनपुरा- रमपुरा, मड़ोरा, बराटा, पारीछा, रिछौरा, गढ़मऊ, पठेश्वर, आरी, रूंदकरारी, रौनीजा, बेहटा, भरारी, कलोथरा, सारमऊ, सिमरा, गेवरा, लकारा, अंबाबाय, चंद्रा, रक्सा क्षेत्र के  कोटखेरा, रक्सा, डगरवाहा, पठारी, पुनावली कलां, डोमागोर, ढिकौली, डोंगरी, गुढ़ा, रमपुरा, मठ, बाजना,  किल्चवारा खुर्द, बमेर, राजापुर, गागौनी, बरुआपुरा, मुरारी, चमरुआ, किल्चवारा बुजुर्ग, बैदोरा, खजराहा खुर्द और खजराहा बुजुर्ग को शामिल किया गया है।


पहले शामिल हुए थे 39 गांव
झांसी विकास प्राधिकरण का गठन 12 अक्तूबर 1984 को हुआ था। उस समय तत्कालीन नगर पालिका झांसी समेत आसपास के 39 राजस्व गांव डड़ियापुरा, करगुवां, दिगारा, डिमरौनी, सिमराहा, सिंगर्रा, भगवंतपुरा, गोरामछिया, पिछोर, छपरा, पाड़री, भोजला, कोछाभांवर, मैरी, मुस्तरा, टांकोरी, सिमरधा, करारी, परबई, बूढ़ा, नयागांव, पड़री, पलींदा, पाली पहाड़ी, लहरगिर्द, सिजवाहा, अठौंदना, रुद्र पंचमहल, गढ़िया, हंसारी गिर्द, बलौरा, रूंद बलौरा, बिजौली, सफा, हरचंदपुरा, सैंयर, मथुरापुरा, खैलार व सिमरावारी को शामिल किया गया था। लेकिन, 23 साल बाद भी इनमें से ज्यादातर गांवों की तस्वीर नहीं बदली। इन गांवों में देखकर नहीं लगता कि यह झांसी महानगर का हिस्सा हैं। और तो और इन गांवों तक पहुंचने का सुगम साधन भी नहीं है।

टेंडर मांगे गए
गांवों में दीवार लेखन कराया जाएगा। इसके लिए ठेकेदारों से तीस अगस्त तक दीवार लेखन के लिए टेंडर मांगे गए हैं।
- सीपी तिवारी, सचिव, झांसी विकास प्राधिकरण
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