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बजट का टोटा, इलाज को मोहताज गोमाता

Sat, 09 Sep 2017 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो
अमर उजाला ब्यूराो Updated Sat, 09 Sep 2017 12:40 AM IST
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no budget for cows treatment
cow jhansi news - फोटो : demo pic
जनपद के पशु अस्पतालों में भर्ती गायें दवाएं नहीं होने से इलाज को मोहताज हैं। अस्पताल में पड़े-पड़े गायों के शरीर से खून बह रहा है और जख्मों पर मक्खियां मंडरा रही हैं। सरकार ने छह महीने से बजट नहीं दिया है। यदि गायों को जल्द बेहतर इलाज नहीं मिला तो कुछ की मौत भी हो सकती है।
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आम रास्ते, हाइवे और ट्रेन की पटरियों पर गायें आए दिन दुर्घटना का शिकार हो रही हैं। जब इन गायों को इलाज के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया जाता है, तो यहां दवाएं नहीं मिलती हैं। इलाइट चौराहे के पास बने पशु चिकित्सालय के हालात बहुत बदहाल हैं। अस्पताल में प्रतिदिन पांच से सात घायल गायें भर्ती कराई जा रही हैं। चंद दिन पूर्व ही करारी में ट्रक की टक्कर से घायल हुई गाय अस्पताल लाई गई है। जांच में वो गर्भवती मिली है। दुर्घटना के चलते उसका पैर कूल्हे के पास से टूट गया है। देखभाल कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि यदि गाय के पेट का बच्चा मर जाएगा, तो यह भी जिंदा नहीं रहेगी। वहीं, दो दिन पहले ही रेल की चपेट में आने से एक गाय का पैर कट गया था, वह भी तपती धूप में चिकित्सालय में पड़ी है। दर्द से कराहते हुए गाये बार-बार उठने का प्रयास करती है, मगर गर्दन भर उठने पर उसका मुंह जमीन पर जोर से गिर जाता है। अब गाय का मुंह जमीन पर गिरते-गिरते सूज गया है। चलने फिरने में असमर्थ होने के कारण गाय वहीं गोबर और पेशाब कर रही है, जिससे उसकी स्थिति और दयनीय हो गई है।
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पशु चिकित्सालय में दो और गायों का पैर कटा हुआ है। जख्मी गायें दर्द से कराह रही हैं। उनके जख्मों को भरने के लिए चिकित्सालय में दवा नहीं हैं। शरीर से खून रिस रहा है और जख्मों पर मक्खियां मंडरा रही हैं। अस्पताल स्टाफ बजट का टोटा बता रहे हैं। बताया कि छह महीने से अधिक समय से सरकार ने बजट नहीं दिया है। अब भला कैसे गोमाता का इलाज हो।
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कुछ नागरिक कर रहे मदद
सरकार द्वारा पशुओं के दवाओं के लिए बजट न देने से अब कुछ आम नागरिकों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। सुविधानुसार कुछ लोग दवाएं, इंजेक्शन खरीद कर अस्पताल को दे जाते हैं। कुछ लोग एक-एक गाय का चयन कर उसका इलाज कराते हैं। ऐसे लोगों की बदौलत कुछ गायों का इलाज हो पा रहा है।

सिर्फ मरहम पट्टी की व्यवस्था
मौजूदा समय में पशु चिकित्सालय में सिर्फ मरहम पट्टी करने की व्यवस्था है। बताया गया कि निदेशालय से 400-500 दवाएं स्वीकृत हैं, इसके बाद भी पशु अस्पताल में एंटीबायोटिक दवाएं, इंजेक्शन, पेन किलर आदि का टोटा है। स्टाफ ने बताया कि अस्पताल में सिर्फ मरहम पट्टी की व्यवस्था है।

दवा लाओ, इलाज कराओ
बजट न होने से पशु अस्पताल का स्टाफ गायों को भर्ती करने से पहले लोगों से खुद दवा लाने की बात कह रहा है। शुक्रवार को ज्वाला श्रीवास्तव जब घायल गाय को लेकर पशु अस्पताल पहुंचे, तब उन्हें बाहर से दवा लाने को कहा गया। इस पर अस्पताल स्टाफ से उनकी तीखी बहस भी हुई।

22 अस्पताल, मिलते सिर्फ आठ लाख
जनपद में 22 पशु चिकित्सालय बने हुए हैं। पशुधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक सिर्फ आठ लाख रुपये का बजट मिलता रहा है। यानी कि साल भर में एक पशु अस्पताल को 36,363 रुपये ही मिलते हैं। ऐसे में सभी गायों का इलाज कैसे संभव है।


एक सप्ताह में आएंगी दवाएं
बजट की समस्या होने के कारण दवाओं की काफी कमी है। डीएम, विधायक, मंत्री सभी को बजट की समस्या के बारे में पहले ही अवगत कराया जा चुका है। अब नगर आयुक्त ने दवाओं के लिए बजट दिया है। एक सप्ताह के अंदर दवाएं खरीद ली जाएंगी।
- डॉ. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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