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खाद के कॉकस के आगे अधिकारी बेबस
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झांसी। जिले में चल रहे खाद संकट के आगे अधिकारी बेबस नजर आ रहे हैं। खाद बराबर उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी मऊरानीपुर और चिरगांव में खाद का संकट समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है।
जिले में 56 सहकारी समितियां हैं। लगभग 111 खाद की दुकानें हैं। समितियों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। दुकानों पर भी खाद है, लेकिन जिले में खाद की किल्लत चल रही है। दरअसल, संकट के पीछे खाद कॉकस काम कर रहा है। मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश की सीमा से लगता है। मध्यप्रदेश में भी खाद की किल्लत चल रही है। इसका फायदा यहां के खाद के दुकानदारों ने उठाया और मध्यप्रदेश खाद भेजकर मोटा मुनाफा कमा लिया।
जिले में जो लोग इस कॉकस के बारे में जानते हैं, वह मौन साधे रहे। यही कारण है कि किसान परेशान हो रहे हैं। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अनूप कुमार द्विवेदी ने बताया कि अक्तूबर तक शासन ने जिले में 2009 मीट्रिक टन डीएपी वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि, अभी तक लक्ष्य से ढाई गुनी खाद का वितरण हो चुका हैै और अभी भी खाद का संकट चल रहा है।
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गेहूं की बुवाई में लगने वाली खाद भी बांट दी
जिले में रबी सीजन में खाद की सर्वाधिक जरूरत पड़ती है। अक्तूबर में चना, मटर आदि की बुवाई होती है। उस हिसाब से जितनी खाद की जरूरत पड़ती है, उसके ढाई गुनी से अधिक खाद अब तक बांटी जा चुकी है। अब गेहूं की बुवाई के लिए खाद की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में हो सकता है कि आगे भी इसी तरह का संकट गहराए।
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जिले में 56 सहकारी समितियां हैं। लगभग 111 खाद की दुकानें हैं। समितियों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। दुकानों पर भी खाद है, लेकिन जिले में खाद की किल्लत चल रही है। दरअसल, संकट के पीछे खाद कॉकस काम कर रहा है। मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश की सीमा से लगता है। मध्यप्रदेश में भी खाद की किल्लत चल रही है। इसका फायदा यहां के खाद के दुकानदारों ने उठाया और मध्यप्रदेश खाद भेजकर मोटा मुनाफा कमा लिया।
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जिले में जो लोग इस कॉकस के बारे में जानते हैं, वह मौन साधे रहे। यही कारण है कि किसान परेशान हो रहे हैं। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अनूप कुमार द्विवेदी ने बताया कि अक्तूबर तक शासन ने जिले में 2009 मीट्रिक टन डीएपी वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि, अभी तक लक्ष्य से ढाई गुनी खाद का वितरण हो चुका हैै और अभी भी खाद का संकट चल रहा है।
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गेहूं की बुवाई में लगने वाली खाद भी बांट दी
जिले में रबी सीजन में खाद की सर्वाधिक जरूरत पड़ती है। अक्तूबर में चना, मटर आदि की बुवाई होती है। उस हिसाब से जितनी खाद की जरूरत पड़ती है, उसके ढाई गुनी से अधिक खाद अब तक बांटी जा चुकी है। अब गेहूं की बुवाई के लिए खाद की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में हो सकता है कि आगे भी इसी तरह का संकट गहराए।