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न कोच न ट्रैक, कैसे पदक लाएं एथलीट
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झांसी। झांसी में एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए न कोई कोच है और न ही ट्रैक। ध्यानचंद स्टेडियम, सीनियर रेलवे इंस्टीट्यूट में अस्थायी 200 मीटर ट्रैक पर खिलाड़ी जरूर ट्रेनिंग लेते हैं मगर सुविधाओं के अभाव में उनकी प्रतिभा नहीं निखर पा रही है। इसी वजह से पिछले 25 साल में झांसी में ट्रेनिंग लेने वाले किसी खिलाड़ी ने नेशनल नहीं खेला है। ऐसे में कैसे इस खेल में पदक की उम्मीद की जा सकती है।
एथलेटिक्स में कई तरह के खेल होते हैं, इसमें लघु दौड़, मध्यम दूरी, लंबी दूरी, रिले, जंप में लंबी कूद, ऊंची छलांग, बांस कूद, थ्रो में भाला फेंक, डिस्कस थ्रो, हथौड़ा फेंक आदि खेलने वाली कई प्रतिभाएं हैं। लेकिन, झांसी में अब तक कहीं पर भी इसका 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक नहीं बना है। न ही शॉटपुट का सर्किल है। इसके अलावा हाई जंप के लिए गद्दा तक नहीं है। जैवलिन थ्रो का भी रन-वे ट्रैक नहीं है।
खास बात ये है कि मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए एथलेटिक्स का कोई भी स्थायी कोच तक नहीं है। जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन की तरफ से पुराने खिलाड़ी स्टेडियम में जाकर ट्रेनिंग देते हैं। ऐसे में वह खिलाड़ी रनिंग ही करते रहते हैं ताकि उनका स्टेमिना बना रहे। उधर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर का कहना है कि जीआईसी में अंतरराष्ट्रीय मानक अनुसार आठ लाइन का 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक बन रहा है। दिसंबर 2022 तक इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद एथलेटिक्स खिलाड़ियों को काफी बेहतर सुविधाएं मिलने लगेंगी।
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सिल्वर जीतने वाली खिलाड़ी शैली की बंगलूरू में हुई प्रैक्टिस
झांसी। पिछले साल केन्या में हुई वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉग जंप में झांसी के पारीछा की रहने वाली शैली सिंह ने सिल्वर मेडल जीता था। उनकी मां सुनीता सिंह ने बताया कि शैली की पूरी ट्रेनिंग बंगलूरू में हुई है। झांसी में सिर्फ शैली ने ट्रायल दिया था। बंगलूरू की एकेडमी में उन्हें अच्छी ट्रेनिंग मिली, जिसके बाद वो ये मुकाम हासिल कर पाईं।
झांसी में ट्रेनिंग लेने वाले एथलीट धीरज परिहार 1995 में अंतिम बाद नेशनल खेले थे। इसके बाद शैली 2021 में नेशनल खेलीं। हालांकि, उनकी पूरी ट्रेनिंग बंगलूरू में हुई। अब तक झांसी में एथलेटिक्स खिलाड़ियों की प्रैक्टिस के लिए कोई ट्रैक नहीं है। एसोसिएशन की ओर से ध्यानचंद स्टेडियम में अस्थायी 200 मीटर का ट्रैक बनाकर प्रैक्टिस कराई जा रही है। हालांकि, हम सौभाग्यशाली हैं कि खेलो इंडिया की ओर से एथलेक्टिस का सेंटर झांसी में दिया गया है। जीआईसी में विश्व स्तरीय सिंथेटिक ट्रैक बन रहा है। - अर्जुन सिंह, सचिव, झांसी एथलेटिक्स एसोसिएशन।
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एथलेटिक्स में कई तरह के खेल होते हैं, इसमें लघु दौड़, मध्यम दूरी, लंबी दूरी, रिले, जंप में लंबी कूद, ऊंची छलांग, बांस कूद, थ्रो में भाला फेंक, डिस्कस थ्रो, हथौड़ा फेंक आदि खेलने वाली कई प्रतिभाएं हैं। लेकिन, झांसी में अब तक कहीं पर भी इसका 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक नहीं बना है। न ही शॉटपुट का सर्किल है। इसके अलावा हाई जंप के लिए गद्दा तक नहीं है। जैवलिन थ्रो का भी रन-वे ट्रैक नहीं है।
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खास बात ये है कि मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए एथलेटिक्स का कोई भी स्थायी कोच तक नहीं है। जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन की तरफ से पुराने खिलाड़ी स्टेडियम में जाकर ट्रेनिंग देते हैं। ऐसे में वह खिलाड़ी रनिंग ही करते रहते हैं ताकि उनका स्टेमिना बना रहे। उधर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर का कहना है कि जीआईसी में अंतरराष्ट्रीय मानक अनुसार आठ लाइन का 400 मीटर का सिंथेटिक ट्रैक बन रहा है। दिसंबर 2022 तक इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद एथलेटिक्स खिलाड़ियों को काफी बेहतर सुविधाएं मिलने लगेंगी।
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सिल्वर जीतने वाली खिलाड़ी शैली की बंगलूरू में हुई प्रैक्टिस
झांसी। पिछले साल केन्या में हुई वर्ल्ड जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉग जंप में झांसी के पारीछा की रहने वाली शैली सिंह ने सिल्वर मेडल जीता था। उनकी मां सुनीता सिंह ने बताया कि शैली की पूरी ट्रेनिंग बंगलूरू में हुई है। झांसी में सिर्फ शैली ने ट्रायल दिया था। बंगलूरू की एकेडमी में उन्हें अच्छी ट्रेनिंग मिली, जिसके बाद वो ये मुकाम हासिल कर पाईं।
झांसी में ट्रेनिंग लेने वाले एथलीट धीरज परिहार 1995 में अंतिम बाद नेशनल खेले थे। इसके बाद शैली 2021 में नेशनल खेलीं। हालांकि, उनकी पूरी ट्रेनिंग बंगलूरू में हुई। अब तक झांसी में एथलेटिक्स खिलाड़ियों की प्रैक्टिस के लिए कोई ट्रैक नहीं है। एसोसिएशन की ओर से ध्यानचंद स्टेडियम में अस्थायी 200 मीटर का ट्रैक बनाकर प्रैक्टिस कराई जा रही है। हालांकि, हम सौभाग्यशाली हैं कि खेलो इंडिया की ओर से एथलेक्टिस का सेंटर झांसी में दिया गया है। जीआईसी में विश्व स्तरीय सिंथेटिक ट्रैक बन रहा है। - अर्जुन सिंह, सचिव, झांसी एथलेटिक्स एसोसिएशन।