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Jhansi News: न हेलीकॉप्टर, न लग्जरी कार... बैलगाड़ी से आई किसान की बेटी की बरात

Mon, 04 Mar 2024 12:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2024 12:51 AM IST
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Neither helicopter, nor luxury car... the wedding procession of the farmer's daughter came by bullock cart.
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। आधुनिक होते दौर में जहां बरात कार और बस से आती है। दूल्हा हेलीकॉप्टर से दुल्हन को विदा कराने आता है, लेकिन बुंदेलखंड के एक किसान की बेटी की बरात बैलगाड़ी से आई। बरात में एक-दो नहीं बल्कि 25 बैलगाड़ियों में बराती सवार थे। शादी के गीतों को गाते और हंसी ठिठोली करते बराती चार किमी दूर विवाहघर तक बरात लेकर पहुंचे। जिसने भी सजी-धजी बैलगाड़ियों में जाती बरात को देखा उसे 70-80 के दशक का जमाना याद आ गया। विवाह के बाद दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से हुई। सालाें पुरानी इस परंपरा की रविवार को शहर में दिन भर चर्चा रही।
महानगर के लहरगिर्द निवासी हरिओम यादव के बेटे रणवीर सिंह की शादी चिरगांव के सिया गांव निवासी किसान चतुर सिंह यादव की बेटी चाहत से तय हुई थी। शनिवार को शिवपुरी रोड स्थित विवाहघर के लिए बरात बैलगाड़ी में रवाना हुई। लड़की के परिवार के लोग सोच रहे थे कि बरात सजी-धजी लग्जरी कार में आएगी। लेकिन, विवाह घर के दरवाजे पर बैलगाड़ियां आकर खड़ी हो गईं। इसे देख शादी में शामिल मेहमान भी अचंभे में पड़ गए। रात भर विवाह की रस्में पूरी होने के बाद रविवार सुबह विदाई की बेला आई।
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वर पक्ष ने बताया कि वह दुल्हन की विदाई भी बैलगाड़ी से कराएंगे। इसके बाद दूल्हा-दुल्हन दोनों बैलगाड़ी में सवार हो गए। उनकी बैलगाड़ी को दूल्हे के चाचा पूर्व ब्लॉक प्रमुख पंजाब सिंह यादव हांक रहे थे। दूल्हा-दुल्हन के पीछे अन्य बैलगाड़ियां थीं, जिनमें बराती सवार थे। बैलगाड़ियों की रवानगी के दौरान नदिया के पार फिल्म का गाना “कौन दिशा में लेके चला रे बटुहिया…” बजाया गया। इस दरम्यान डीजे की धुनों पर कुछ बराती नाचते भी नजर आए। बैलगाड़ियों का यह काफिला लगभग चार किलोमीटर चलकर लहरगिर्द स्थित दूल्हे के घर पहुंचा। यह नजारा देखने के लिए सड़क पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए।
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दूल्हे के पिता हरिओम यादव ने बताया कि हम किसान परिवार के हैं। परिवार में कई कारें हैं, लेकिन पुरानी परंपरा से नई पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए बैलगाड़ी से बरात ले गए। और बहू की विदा भी बैलगाड़ी से कराई। गांव में लोगों से संपर्क कर बैलगाड़ियों की व्यवस्था की गई।
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