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Jhansi News: न तो आवास मिला न ही पेंशन, दिव्यांग आदिवासी दंपती परेशान
Sat, 22 Feb 2025 01:14 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Updated Sat, 22 Feb 2025 01:14 AM IST
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चिरगांव के ग्राम पच्चरगढ़ में दिव्यांग आदिवासी दंपती
ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद नहीं मिल रहीं सरकारी सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चिरगांव। शासन द्वारा दिव्यांगजनों को अधिक से अधिक सुविधा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पेंशन से लेकर आवास तथा उपकरण तक वितरित किये जा रहे हैं। लेकिन ग्राम पच्चरगढ़ में एक दलित आदिवासी दंपती जो कि दिव्यांग हैं। उन्हें अब तक कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली है। उनका कहना है कि जिन्हें वास्तविक रूप से जरूरत है, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है।
ग्राम पच्चरगढ़ निवासी दशरथ आदिवासी ने बताया कि वह और उसकी पत्नी रामा एक-एक पैर से दिव्यांग हैं। इस कारण वह दोनों घर पर रहते हैं। उनका पुत्र प्रयागराज में मजदूरी करने गया है। वहीं से जो पैसा भेज देता है, उसी से उनका गुजर बसर चल रहा है। उनके पास जो छोटा सा कमरा है, उसकी दीवारें तो पक्की हैं। लेकिन पर पक्की छत के लिए पैसा न होने पर टिन शेड डाल दी गई है। इससे बरसात में पानी आता है। कमरे में बने गेट में फाटक नहीं है, जिस पर एक पाॅलीथिन टांगकर गेट बंद कर लेते हैं। पेंशन के लिए फाॅर्म भरे थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ है। उन्होंने शासन से आवास, पेंशन एवं ट्राई साइकिल देने की मांग की है।
वर्जन
पेंशन की प्रक्रिया ऑनलाइन है। इसके बाद भी वे स्वयं गांव जाकर स्थिति का पता करेंगे।
-राम कुमार वर्मा, खंड विकास अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
चिरगांव। शासन द्वारा दिव्यांगजनों को अधिक से अधिक सुविधा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पेंशन से लेकर आवास तथा उपकरण तक वितरित किये जा रहे हैं। लेकिन ग्राम पच्चरगढ़ में एक दलित आदिवासी दंपती जो कि दिव्यांग हैं। उन्हें अब तक कोई सरकारी सुविधा नहीं मिली है। उनका कहना है कि जिन्हें वास्तविक रूप से जरूरत है, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है।
ग्राम पच्चरगढ़ निवासी दशरथ आदिवासी ने बताया कि वह और उसकी पत्नी रामा एक-एक पैर से दिव्यांग हैं। इस कारण वह दोनों घर पर रहते हैं। उनका पुत्र प्रयागराज में मजदूरी करने गया है। वहीं से जो पैसा भेज देता है, उसी से उनका गुजर बसर चल रहा है। उनके पास जो छोटा सा कमरा है, उसकी दीवारें तो पक्की हैं। लेकिन पर पक्की छत के लिए पैसा न होने पर टिन शेड डाल दी गई है। इससे बरसात में पानी आता है। कमरे में बने गेट में फाटक नहीं है, जिस पर एक पाॅलीथिन टांगकर गेट बंद कर लेते हैं। पेंशन के लिए फाॅर्म भरे थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ है। उन्होंने शासन से आवास, पेंशन एवं ट्राई साइकिल देने की मांग की है।
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पेंशन की प्रक्रिया ऑनलाइन है। इसके बाद भी वे स्वयं गांव जाकर स्थिति का पता करेंगे।
-राम कुमार वर्मा, खंड विकास अधिकारी